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हाईकोर्ट ने केंद्र से कहा: AADHAR का दुरूपयोग रोकने के लिए OTP जैसे सुझावों पर ध्यान दें

अदालत का सहयोग करने वाले वकीलों ने यूआईडीएआई को सुझाव दिया कि बायोमेट्रिक्स के बजाए ओटीपी प्रमाणीकरण पर विचार करें. (सांकेतिक तस्वीर)

अदालत का सहयोग करने वाले वकीलों ने यूआईडीएआई को सुझाव दिया कि बायोमेट्रिक्स के बजाए ओटीपी प्रमाणीकरण पर विचार करें. (सांकेतिक तस्वीर)

अदालत ने आधार नंबर जारी करने वाले भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (Unique Identification Authority of India) को भी निर्देश दिया कि दुरूपयोग की स्थिति में इसे कानून के मुताबिक और हर मामले के तथ्यों के मुताबिक कार्रवाई करनी चाहिए.

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    नई दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने गुरुवार को केंद्र को निर्देश दिया कि आधार (Aadhar) संबंधी सूचना के दुरूपयोग को रोकने के लिए बायोमीट्रिक्स के प्रयोग के बजाए अदालत के सहयोगी की तरफ से बताए गए ओटीपी प्रमाणीकरण जैसे सुझावों पर "ध्यान दे."मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की पीठ ने कहा, ‘‘आप (केंद्र) अदालत के सहयोगी के सुझावों पर ध्यान दें.’’

    अदालत ने आधार नंबर जारी करने वाले भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (Unique Identification Authority of India) को भी निर्देश दिया कि दुरूपयोग की स्थिति में इसे कानून के मुताबिक और हर मामले के तथ्यों के मुताबिक कार्रवाई करनी चाहिए.

    इस मामले की सुनवाई कर रही थी अदालत
    इस निर्देश के साथ ही पीठ ने जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया. उच्च न्यायालय ने एक आपराधिक मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की थी जिसमें मोबाइल दुकान के एक मालिक ने अनभिज्ञ ग्राहकों के ब्यौरे का दुरूपयोग कर धोखाधड़ी की गतिविधियों में इस्तेमाल के लिए नये सिम कार्ड जारी किए.

    ऐसे हो रही थी धोखाधड़ी
    उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका का स्वत: संज्ञान लेते हुए गौर किया कि दुकान मालिक आधार पुष्टिकरण के दौरान ग्राहकों का मशीन पर दो बार अंगूठा यह कहकर लगवाता था कि पहली बार में उपयुक्त तरीके से अंगूठा नहीं लगा और दूसरी बार अंगूठा लगवाकर किसी तीसरे पक्ष को नया सिम कार्ड जारी करता था.

    इसके बाद उच्च न्यायालय ने मामले में सहयोग के लिए वरिष्ठ वकील दया कृष्णन और वकील ऋषभ अग्रवाल को अदालत का सहयोगी नियुक्त किया था.

    अदालत का सहयोग करने वाले वकीलों ने यूआईडीएआई को सुझाव दिया कि बायोमेट्रिक्स के बजाए ओटीपी प्रमाणीकरण पर विचार करें.

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