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OPINION: राजीव गांधी के खिलाफ AAP का प्रस्ताव, दोनों पक्षों को साधने की कोशिश!

OPINION: राजीव गांधी के खिलाफ AAP का प्रस्ताव, दोनों पक्षों को साधने की कोशिश!

दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की फाइल फोटो

दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की फाइल फोटो

केजरीवाल को उम्मीद है कि कांग्रेस, आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन कर सकती है, जैसे कि 2013 में कांग्रेस पार्टी ने उनका साथ देकर उन्हें पहली बार दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया था.

  • News18.com
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    (सिद्धार्थ मिश्रा)

    कहते हैं कि क्रांति अपने ही बच्चों को खा जाती है. अन्ना हज़ारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से निकले अरविंद केजरीवाल ने तीन साल बाद दिल्ली में काफी बहुमत से चुनाव जीता. लेकिन अब आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रही हैं.

    हाल ही में दिल्ली विधान सभा में सिख विरोधी दंगों के पीडितों को सहायता पहुंचाने के लिए के लिए जब बिल लाया जा रहा था तो वह बिना पास हुए ही खत्म हो गया क्योंकि सदस्यों द्वारा मांग की जाने लगी कि  कि राजीव गांधी को भारत सरकार द्वारा दिया गया भारत रत्न पुरस्कार छीन लिया जाए. इसकी वजह से सत्तारूढ़ पार्टी में ही दो धड़े हो गए. पहले यह संदेश वॉट्स एप पर एक दूसरे को भेजा गया बाद में यह बातें खबरों में आ गईं. बाद में पार्टी द्वारा स्पष्ट किया गया कि जो प्रस्ताव लाया गया था वह पार्टी की विचारधारा से मेल नहीं खाता है. कहा गया कि यह उस सदस्य का व्यक्तिगत विचार था.

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    हालांकि, इस बात में दम नहीं है क्योंकि दिल्ली विधानसभा में इस वक्त 90 फीसदी विधायक आम आदमी पार्टी के हैं इसलिए वे कोई भी प्रस्ताव पारित किया जा सकता है. इस बात को लेकर नरेंद्र मोदी पर आरोप नहीं लगाया जा सकता.

    फिर क्या कारण है कि एक पार्टी जो कि सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर को टिकट दिए जाने की वजह से पी चिदंबरम पर जूता फेंकने वाले पत्रकार को टिकट देती है, वह सिख विरोधी दंगों की आलोचना करने वाले प्रस्ताव को लेकर दुखी महसूस करती है. सिख विरोधी दंगों में पीड़ितों की ओर से केस लड़ने वाले एचएस फुल्का भी आम आदमी पार्टी की तरफ से पंजाब विधान सभा में  विधायक रहे हैं. फिर प्रस्ताव में राजीव गांधी का ज़िक्र होने पर इस तरह  का पूर्वाग्रह क्यों है.

    आम आदमी पार्टी इस मामले में आगे भी चल रही है और पीछे भी चल रही है. आम आदमी पार्टी की कोशिश है कि अपने लोगों को भी खुश रखे और बीजेपी विरोधी गुट में भी शामिल हो जाए. इस बात को लेकर कांग्रेस पार्टी में गठबंधन के पैरोकारों के मन में शंका है कि क्या आम आदमी पार्टी से गठबंधन करना ठीक रहेगा. क्योंकि एचएस फुल्का और जरनैल सिंह को लेकर वो संदेह की स्थिति में हैं कि वे कांग्रेस पार्टी और आम आदमी पार्टी का गठबंधन स्वीकार कर पाएंगे या नहीं.

    दिल्ली में कांग्रेस पार्टी प्रमुख अजय माकन अभी तक आम आदमी पार्टी के साथ किसी भी तरह का गठबंधन करने के पक्ष में नहीं है. दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित गठबंधन के पक्ष में थीं लेकिन उन्होंने भी अब इस फैसले को पार्टी हाई कमान के ऊपर छोड़ दिया है.

    अभी कांग्रेस के पास दिल्ली की पांच सीटों पर संभावित उम्मीदवार हैं. पूर्वी दिल्ली से संदीप दीक्षित, पूर्वोत्तर दिल्ली से जेपी अग्रवाल, चांदनी चौक से कपिल सिब्बल, नई दिल्ली से अजय माकन और पश्चिमी दिल्ली से महाबल मिश्रा. ये सभी लोग पहले सांसद रह चुके हैं.

    उत्तर पश्चिम की आरक्षित सीट पर देखें तो मूल रूप से तीन उम्मीदवार जय किशन, राजकुमार चौहान और सुरेंद्र कुमार रेस में हैं. सिर्फ दक्षिण दिल्ली की सीट पर ही कोई नहीं है क्योंकि इस सीट पर कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार सिख विरोधी दंगों में सज़ा पा चुके हैं.

    आम आदमी पार्टी की चिंता ये है कि अगर लोकसभा चुनाव में पार्टी खराब प्रदर्शन करती है तो आने वाले 2020 के विधान सभा चुनाव में इसकी संभावनाएं काफी कम हो जाएंगी.

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    केजरीवाल को उम्मीद है कि कांग्रेस, आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन कर सकती है, जैसे कि 2013 में कांग्रेस पार्टी ने उनका साथ देकर उन्हें पहली बार दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया था. हालांकि बाद में कांग्रेस को इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा और पार्टी पूरे शहर से साफ हो गई. खैर, यह तो समय ही बताएगा कि अब चार सालों के बाद जब कांग्रेस ने फिर से अपना खोया हुआ विश्वास लोगों में जमाया है तो क्या वो आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन करेगी.

    (लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं, दिए गए विचार उनके निजी हैं)

    Tags: Aam aadmi party, AAP, Arvind kejriwal, BJP, Congress

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