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केरल: LDF की जीत से टूटेगा 40 साल का रिकॉर्ड या कांग्रेस गठबंधन करेगा वापसी, समझें समीकरण

केरल में 140 सीटों पर चुनाव होने हैं.

केरल में 140 सीटों पर चुनाव होने हैं.

Kerala Election: 140 विधानसभा सीटों वाले केरल में 71 सीटें जीतने वाली पार्टी बहुमत हासिल करेगी. केरल में 1980 के बाद से सत्ता पर काबिज होने के बाद किसी भी राजनीतिक दल या गठबंधन को दोबारा जीत नहीं मिली है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 27, 2021, 1:34 PM IST
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तिरुवनंतपुरम. पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) की तारीखों का ऐलान हो चुका है. इस बार दो दक्षिणी राज्य तमिलनाडु (Tamil Nadu) और केरल (Kerala) भी सियासी दौर से गुजर रहे हैं. इनमें सबसे ज्यादा खास केरल चुनाव को कहा जा सकता है. जानकार मानते हैं कि इस चुनाव में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) की जीत के साथ केरल में सियासत का 40 साल पुराना रिकॉर्ड टूट सकता है. वहीं, महीनों पहले से मेहनत कर रहे राहुल गांधी (Rahul Gandhi) राज्य में कांग्रेस की वापसी कराने में सफल हो सकते हैं. दक्षिण की राजनीति में अपनी स्थिति मजूबत करने में जुटी बीजेपी को मेट्रोमैन श्रीधरन की मौजूदगी का फायदा मिल सकता है. राज्य में 140 सीटों पर चुनाव होने हैं.

40 साल के हिसाब को ऐसे समझें
केरल में 1980 के बाद से सत्ता पर काबिज होने के बाद किसी भी राजनीतिक दल या गठबंधन को दोबारा जीत नहीं मिली है. आसान भाषा में समझें, तो यहां हर पांच साल बाद सत्ता परिवर्तन हुआ है. सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली एलडीफ और कांग्रेस नेतृत्व वाली यूडीएफ ने अलग-अलग कार्यकालों में राज्य में 3 दशक तक शासन किया है.

140 विधानसभा सीटों वाले केरल में 71 सीटें जीतने वाली पार्टी बहुमत हासिल करेगी. एशियानेट न्यूज सीफोर सर्वे बताता है कि इस चुनाव में एलडीएफ 72-78 सीटें तक अपने नाम कर सकता है. वहीं, यूडीएफ को 59-65 सीटें मिलने का अनुमान है. सर्वे के आंकड़ों की मानें, तो राज्य में बीजेपी 3-7 सीटों के साथ तीसरी पार्टी बनेगी. सर्वे के अनुमान के मुताबिक, एलडीएफ उत्तरी और दक्षिण केरल में यूडीएफ (UDF) पर बढ़त हासिल करेगी. वहीं, यूडीएफ राज्य के केंद्रीय क्षेत्रों में मजबूत रह सकती है.
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राहुल गांधी ने झोंकी ताकत
इस साल केरल और असम ऐसे दो राज्य हैं, जहां कांग्रेस को सत्ता पाने की उम्मीद है. दोनों राज्यों में सत्ता हासिल करने और खासतौर से केरल में जीत राहुल गांधी के अमेठी में हुए नुकसान को सुधारने में मददगार होगी. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने केरल चुनाव में अपनी पूरी ताकत लगा दी है. वहीं, इस जीत के साथ राहुल को अपने गृह राज्य में जीत हासिल करने का भी श्रेय मिलेगा.

यह कहा जा सकता है कि इस चुनाव में केरल कांग्रेस के लिए प्राथमिक राज्य है. क्योंकि यहां जनवरी से ही राहुल गांधी ने चुनावी प्रयास शुरू कर दिए थे. बीते महीने दो दिन के दौरे पर गांधी ने अपने लोकसभा क्षेत्र वायनाड में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित किया था. इसके अलावा उन्होंने कुछ दिन पहले राज्य में एक रोडशो भी किया.

मेट्रोमैन के आने से बीजेपी का पाला हुआ मजबूत
देशभर में मेट्रोमैन के नाम से मशहूर ई श्रीधरन ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का फैसला किया है. अपने इस फैसले के साथ ही उन्होंने यह भी ऐलान कर दिया था कि उनका मुख्य उद्देश्य राज्य में पार्टी को सत्ता में लाना है. इसके बाद उन्होंने लव-जिहाद और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर भी बात की. उन्होंने राज्य में वाम दल समेत पुराने कांग्रेस शासन पर आरोप भी लगाए.

इतना ही नहीं श्रीधरन ने मुख्यमंत्री बनने की इच्छा भी जाहिर कर दी है. अगर पार्टी राज्य में चुनाव जीतने में सफल होती है, तो मेट्रोमैन भगवा दल का सीएम चेहरा हो सकते हैं. कुछ दिनों पहले ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केरल का दौरा किया था. बीजेपी इस बार विधानसभा चुनाव के जरिए दक्षिण भारत में एंट्री की राह तैयार करने में जुटी हुई है.

केरल में एक चरण में वोटिंग, 2 मई को नतीजे
कांग्रेस और लेफ्ट का गढ़ कहे जाने वाले केरल में भी एक फेज में वोटिंग का फैसला किया गया है. पड़ोसी राज्य तमिलनाडु की तरफ केरल में भी 6 अप्रैल को सभी सीटों पर वोटिंग की जाएगी.
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