केरल: कांग्रेस नीत UDF का दावा, सत्ता में आए तो सबरीमाला के 'नियमों' की रक्षा का कानून बनाएंगे

सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2018 में दिए गए फैसले में पवित्र सबरीमला मंदिर में सभी आयुवर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दे दी थी. फाइल फोटो

Sabarimala Temples Customs: कांग्रेस (Congress) ने हाल ही में केरल की वामपंथी सरकार से पूछा था कि सबरीमाला मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले (Supreme court verdict) पर LDF कौन से कानूनी फैसले लेने जा रही है.

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    कोट्टायम. केरल विधानसभा चुनाव (Kerala Assembly Election 2021) से पहले कांग्रेस के नेतृत्‍व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने सबरीमला मंदिर की परंपराओं को सहेजने के एवज में वोट की अपील की है. फ्रंट ने कहा, 'अगर जनता सत्‍ता के लिए वोट देती है तो फ्रंट सबरीमाला मंदिर के रीति-रिवाजों की रक्षा का कानून बनाएगा.' कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता और विधायक तिरूवंचूर राधाकृष्‍णन ने 'कानून का मसौदा' रिलीज करते हुए कहा कि यदि यूडीएफ सत्‍ता में आई तो इसे कानून बनाकर पारित करेंगे. पत्रकारों से चर्चा करते हुए राधाकृष्‍णन ने कहा, 'यदि हम सत्‍ता में आए तो इस कानून को लागू करेंगे. इस प्रस्तावित कानून के तहत, पुजारी की सलाह पर, सबरीमला में अनाधिकृत प्रवेश पर प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाएगा. जो भी इस कानून का उल्‍लंघन करेगा उसे दो साल के कारावास की सजा हो सकेगी.'

    इससे पहले कांग्रेस ने सत्ताधारी एलडीएफ सरकार से कहा था कि वह कोई कानून उपाय सोचे ताकि कथित तौर पर 'जल्‍दबाजी में लिए गए सरकारी फैसले' से हुए 'घाव ठीक हो सकें.' उसका इशारा उस आदेश को लागू कराने के संबंध में था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2018 में दिए गए फैसले में पवित्र सबरीमला मंदिर में सभी आयुवर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दे दी थी. इस आदेश को लेकर दक्षिणपंथी समूहों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था. सबरीमला मंदिर के रीति रिवाज सहेजने के पक्षधर धर्मस्‍थल में 10 से 50 आयुवर्ग की महिलाओं को जाने की अनुमति देने के खिलाफ थे. इसी मुद्दे पर शीर्ष अदालत में कई समीक्षा याचिकाएं लंबित हैं.

    हालांकि, माकपा के प्रभारी राज्य सचिव ए विजयराघवन ने दावा किया कि यूडीएफ लोगों को बेवकूफ बना रहा है, क्योंकि जो मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है. उस मामले में कानून बनाना संभव नहीं है. उन्‍होंने कहा कि "यूडीएफ ने घोषणा कर दी है कि सबरीमला में महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ एक नया कानून तैयार किया जाएगा, ऐसी घोषणा राज्य के लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए है. पहली बात कि यूडीएफ सत्ता में वापस नहीं आने वाली है." विजयराघवन ने कहा, "दूसरी बात कि ऐसे मामले में कानून बनाना संभव नहीं है, जो उच्चतम न्यायालय की एक बड़ी पीठ के पास विचाराधीन हो. ऐसा करने के लिए कोई कानूनी अधिकार नहीं है."

    विजयराघवन ने कहा कि राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार कार्य करेगी और उन्होंने दावा किया कि नई घोषणा लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए यूडीएफ के एजेंडे का हिस्सा थी.

    शुक्रवार को मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा था कि आने वाले विधानसभा चुनावों के कारण यूडीएफ सबरीमला मुद्दे को उठा रहा है.

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