अपना शहर चुनें

States

2020 में केरल में हुई थी मुस्लिम व्‍यक्ति और ईसाई महिला की शादी, अब चर्च ने ठहराई अवैध

चर्च में हुई थी शादी. (File Pic)
चर्च में हुई थी शादी. (File Pic)

अंतर धार्मिक शादी को बढ़ावा देने के लिए चर्च को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. इन विवादों के बाद साइरो मालाबार चर्च आर्कबिशप मार जॉर्ज एलेनचेरी ने तीन सदस्‍यीय चर्च पैनल के जरिये शादी समारोह के मामले की जांच का आदेश दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 5, 2021, 1:03 PM IST
  • Share this:
नई दिल्‍ली. केरल में अंतरधार्मिक विवाह (Inter-religious marriage) का एक अजब मामला सामने आया है. पिछले साल केरल (Kerala) में एक मुस्लिम व्‍यक्ति और कैथोलिक महिला ने शादी रचाई थी. उनकी शादी वहां के पादरी ने कराई थी. लेकिन अब केरल के कोच्चि (Kochi) में स्थित साइरा-मालाबार चर्च की तीन सदस्‍यीय इंक्‍वायरी कमीशन ने इस शादी को अवैध करार दे दिया है. इसके साथ ही इस शादी को कराने वाले पादरी (Priest) के खिलाफ भी कार्रवाई की अनुशंसा की गई है.

9 नवंबर, 2020 को केरल के कदावांथरा के सेंट जोसेफ चर्च में कोच्चि के रहने वाले मुस्लिम व्‍यक्ति और इरिनजलाकुडा की रहने वाली कैथोलिक महिला के बीच शादी हुई थी. इस शादी ने पहले भी विवादों को न्‍योता दिया था. इसकी वजह थी इस शादी में मध्‍य प्रदेश के सतना के बिशप मैथ्‍यू वनियाकिजक्‍कल ने शिरकत की थी. जबकि परंपरा के मुताबिक दो धर्मों के लोगों के बीच होने वाले शादी समारोह में बिशप शामिल नहीं हो सकते.

इस शादी समारोह की एक फोटो भी सामने आई थी, जिसमें दंपती बिशप के साथ खड़े दिख रहे थे. यह एक अखबार में प्रकाशित हुई थी. इसकी हर ओर आलोचना हुई थी. इसके बाद एक स्‍पष्‍टीकरण भी सामने आया था, जिसमें कहा गया था कि बिशप को शादी समारोह में शिरकत करने का अफसोस है. उनकी ओर से कहा गया कि उन्‍होंने दुल्‍हन के परिवार से नजदीकी होने के कारण ऐसा किया.



अंतर धार्मिक शादी को बढ़ावा देने के लिए चर्च को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. इन विवादों के बाद साइरो मालाबार चर्च आर्कबिशप मार जॉर्ज एलेनचेरी ने तीन सदस्‍यीय चर्च पैनल के जरिये शादी समारोह के मामले की जांच का आदेश दिया.
इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई और इसमें पाया गया कि दुल्‍हन के परिवार ने कैनन कानून का उल्‍लंघन किया था. इस कानून के तहत अगर दो धर्मों के लोगों की बीच शादी होती है तो उसके लिए पहले डायोसीस बिशप (Diocese Bishops) से अनुमति लेनी होती है. लेकिन दुल्‍हन के परिवार ने ऐसा नहीं किया था. इस कानून में दो धर्मों के लोगों के बीच की शादी को 'डिसपैरिटी ऑफ कल्‍ट' कहा गया है.

जांच रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि शादी के बारे में एर्नाकुलम-अंगामली और इरिनजलाकुडा क्षेत्र के बिशप को नहीं बताया गया था. इसके बजाय दुल्हन के परिवार को सिर्फ कुजिक्कटुसेरी चर्च के पादरी से एक पत्र मिला था, यह दुल्हन के परिवार का का क्षेत्र था. उसने समारोह आयोजित करने की अनुमति के रूप में सेंट जोसेफ चर्च को यह पत्र सौंप दिया था.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज