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केरल: 40% कम निकला कार का माइलेज, कंज्यूमर कोर्ट का आदेश- मालिक को मुआवजा दें निर्माता और डीलर

एक कार कंपनी द्वारा विज्ञापन में किए गए माइलेज के दावे को एक उपभोक्ता ने भ्रामक बताकर केरल की उपभोक्ता अदालत की शरण ली. ( सांकेतिक फोटो -साभार मनीकंट्रोल)

एक कार कंपनी द्वारा विज्ञापन में किए गए माइलेज के दावे को एक उपभोक्ता ने भ्रामक बताकर केरल की उपभोक्ता अदालत की शरण ली. ( सांकेतिक फोटो -साभार मनीकंट्रोल)

Kerala news: एक कार कंपनी द्वारा विज्ञापन में किए गए माइलेज के दावे को एक उपभोक्ता ने भ्रामक बताकर केरल की उपभोक्ता अदा ...अधिक पढ़ें

केरल. एक कार कंपनी द्वारा विज्ञापन में किए गए माइलेज के दावे को एक उपभोक्ता ने भ्रामक बताकर कोर्ट की शरण ली. इस मामले में केरल की एक उपभोक्ता अदालत ने निर्माता और डीलर को कार मालिक को 3 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया. कार मालिक ने शिकायत की थी कि कार विज्ञापन के अनुसार माइलेज नहीं दे रही है. कोर्ट ने पाया कि वास्तविक माइलेज 32 किमी/लीटर के प्रस्तावित आंकड़े से 40% कम था. उसकी कार 2014 मॉडल फोर्ड क्लासिक डीजल थी.

जानकारी के मुताबिक त्रिशूर में उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम ने 2015 में सौदामिनी पीपी द्वारा दायर शिकायत पर आदेश पारित किया है. बताया गया कि उन्होंने 2014 में 8,94,876 रुपये की राशि में नई फोर्ड क्लासिक डीजल कार खरीदी थी. यह आदेश कैराली फोर्ड प्राइवेट लिमिटेड, त्रिशूर, कार के डीलर और निर्माता फोर्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ पारित किया गया. शिकायतकर्ता ने डीलर और निर्माता द्वारा किए गए 32 किलोमीटर प्रति लीटर के माइलेज के वादे पर भरोसा किया, लेकिन कार का माइलेज बहुत कम था. शिकायत सामने आने के बाद कंज्यूमर कोर्ट ने सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के पीएचडी धारक एसोसिएट प्रोफेसर को विशेषज्ञ आयुक्त नियुक्त किया. सभी पक्षों की उपस्थिति में रनिंग टेस्ट के दौरान कार द्वारा दिया गया वास्तविक माइलेज लगभग 19.6 kmpl ही पाया गया.

फोरम ने कहा दायित्व से पल्ला नहीं झाड़ सकती कंपनी
इस पर फोर्ड इंडिया ने दलील दी कि ब्रोशर में उल्लिखित माइलेज “ऑटो कार क्रॉस कंट्री ड्राइव” नामक तृतीय पक्ष एजेंसी द्वारा किए गए ट्रायल पर आधारित है. फोरम ने कहा कि एक बार मैन्युफैक्चरर द्वारा जारी किए गए ब्रोशर में इस तरह के आंकड़ों का समर्थन करने के बाद वह दायित्व से पल्ला नहीं झाड़ सकता. फोरम ने कहा, “कार का प्रत्येक संभावित खरीदार विभिन्न निर्माताओं के विभिन्न वाहनों के विज्ञापनों, ब्रोशर, पत्रक आदि की तुलना करता है और इसी आधार पर वाहन की पसंद के निर्णय को प्रभावित करती हैं.

अदालत ने शिकायतकर्ता को उसके वित्तीय नुकसान के लिए 1.50 लाख रुपये, मानसिक पीड़ा और संकट के लिए 1.50 लाख रुपये और कानूनी खर्च के लिए 10,000 रुपये, शिकायत दर्ज करने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 9% के ब्याज के साथ सम्मानित किया.

Tags: Car, Kerala News

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