Kerala Assembly Election Result: केरल विधानसभा चुनाव में क्या इस बार दशकों का इतिहास बदल डालेगा लेफ्ट?

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन. (पीटीआई फाइल फोटो)

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन. (पीटीआई फाइल फोटो)

Kerala Assembly Election Result: केरल का चुनाव (Kerala Assembly Election) लेफ्ट के लिए महज एक चुनाव नहीं अस्तित्व की लड़ाई भी है. पश्चिम बंगाल (West Bengal) और त्रिपुरा (Tripura) जैसे राज्यों से बाहर होने के बाद अब वामपंथी राजनीति के लिए केरल का दुर्ग बचाए रखना बेहद जरूरी है.

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नई दिल्ली. मतदान का दौर पूरा हो चुका है. आज चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश के नतीजे घोषित होंगे. केरल विधानसभा चुनाव (Kerala Assembly Election) इस बार जीत और हार दोनों ही स्थिति में लेफ्ट के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकता है. दरअसल 2018 में लेफ्ट त्रिपुरा में अपने गढ़ से करीब ढाई दशक बाद बाहर हो गया था. पश्चिम बंगाल में अब स्थितियां कमजोर हैं और वो सत्ता का एक मजबूत दावेदार भी नहीं. संसद में भी लेफ्ट फ्रंट की स्थिति बेहद कमजोर है. इस वजह से सीपीएम की अगुवाई वाले लेफ्ट फ्रंट के लिए केरल के चुनाव का महत्व किसी भी अन्य पार्टी या गठबंधन से ज्यादा है.

टाइम्स ऑफ इंडिया पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही कांग्रेस मुक्त भारत की बात कही हो लेकिन वर्तमान स्थिति लेफ्ट मुक्त भारत जैसी हो रही है. पिनराई विजयन की अगुवाई वाले लेफ्ट के सामने केरल चुनाव अस्तित्व का सवाल भी है. सामान्य तौर पर दशकों से केरल में कांग्रेस की अगुवाई वाला यूडीएफ और सीपीएम की अगुवाई वाला एलडीएफ बारी-बारी से सरकार बनाते रहे हैं. बीते 40 वर्षों में केरल में कोई गठबंधन लगातार दूसरी बार सत्ता में वापस नहीं लौटा है. लेकिन इस बार के ओपिनियन पोल्स कुछ और कहानी बयान कर रहे हैं. पोल्स में एलडीएफ को बढ़त दिखाई गई है.

मिले-जुले अनुभव

बीते कुछ चुनावों की बात करें तो लेफ्ट फ्रंट के लिए लोकसभा और निकाय चुनाव में मिले-जुले अनुभव रहे हैं. एक तरफ 2019 के लोकसभा चुनाव में फ्रंट को तगड़ा झटका लगा था और राज्य में सिर्फ एक सीट हाथ आई थी. लेकिन 2020 के निकाय चुनावों में एलडीएफ को जबरदस्त जीत मिली थी.
कौन सी बातें पक्ष में

यह भी कहा गया है कि राज्य में पिनराई विजयन सरकार को कोरोना वायरस के दौरान बेहतर तैयारियों का चुनावी लाभ मिल सकता है. निकाय चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर टॉप लीडरशिप को लेकर सवाल भी खड़े किए गए थे जिससे पार्टी के भीतर असंतोष की स्थित पैदा हुई थी. कांग्रेस के हक में एक बड़ी बात ये है कि राहुल गांधी राज्य की वायनाड सीट से ही सांसद हैं. 6 अप्रैल को राज्य की सभी सीटों पर वोटिंग संपन्न हो गई है. लेकिन केरल का दशकों का इतिहास अभी एलडीएफ गठबंधन की धड़कनें बढ़ाए रखेगा.
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