Kerala Exit Poll Results 2019: केरल के एग्जिट पोल में लेफ्ट का जलवा बरकरार, कांग्रेस गठबंधन 7-9 सीटें

Kerala Exit Poll Results 2019: केरल के एग्जिट पोल में लेफ्ट का जलवा बरकरार, कांग्रेस गठबंधन 7-9 सीटें
Kerala Exit Poll/Opinion Polls Results 2019: केरल के NEWS 18 - IPSOS एग्जिट पोल रिजल्ट आ चुके हैं. केरल की 20 सीटों के एग्जिट पोल में तीन प्रमुख पार्टियों में सीट बंटी है. के के लोकसभा चुनाव परिणाम 23 मई को आएंगे.

Kerala Exit Poll/Opinion Polls Results 2019: केरल के NEWS 18 - IPSOS एग्जिट पोल रिजल्ट आ चुके हैं. केरल की 20 सीटों के एग्जिट पोल में तीन प्रमुख पार्टियों में सीट बंटी है. के के लोकसभा चुनाव परिणाम 23 मई को आएंगे.

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Lok Sabha Exit Poll Results 2019: राहुल गांधी के कांग्रेस उम्मीदवार बनने का असर केरल के एग्जिट पोल पर भी दिखाई दे रहा है. NEWS 18 - IPSOS एग्जिट पोल में केरल में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के गठबंधन को 07-09 सीटें, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के गठबंधन को 0-1 सीटें और मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (CPIM) के गठबंधन को 11-13 सीटें मिलती दिख रही हैं. 20 लोकसभा क्षेत्रों वाला केरल 2019 आम चुनाव के लिए बेहद खास हो गया, जैसे ही राहुल गांधी ने केरल की वायनाड सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की. इससे पहले केरल राज्य की चर्चा लगातार सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर होती रही. सबरीमाला मंदिर को इस बार राजनी‌तिक ढाल भी बनाया गया है.

क्या है केरल का गणित
केरल के चुनाव इस बार बेहद रोचक हो गए हैं. एक तरफ बीजेपी ने राज्य में घुसने की पूरी तैयारी कर रखी है तो दूसरी तरफ कांग्रेस नीत यूपीए अपने अंतिम बचे हुए किले को बचाने की कोशिश में लगी है. 2014 की मोदी लहर में भी बीजेपी यहां खाता नहीं खोल पाई थी. जबकि कांग्रेस ने राज्य की 20 में से आठ सीटें जीती थीं. जबकि यूपीए की पूरी सीटें 12 थीं. लेकिन इस बार चुनाव में यूपीए, एनडीए और लफ्ट यूनाइटेड फ्रंट में तगड़ी टक्कर है.

यहां यूपीए गठबंधन में कांग्रेस 16 सीटों पर, एनडीए में बीजेपी 15 लोकसभा क्षेत्रों पर जबकि लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट में मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी 14 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं. जबकि सभी गठबंधनों ने करीब पांच सीटों पर स्‍थानीय पार्टियों को मौका दिया है. 2014 के आम चुनावों में प्रमुख पार्टियों में कांग्रेस ने कुल आठ, मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी ने पांच, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी ने एक सीट जीती थीं.
ये हैं केरल की 'हॉट सीट' और बड़े चेहरे


केरल की हॉट सीटों में इस बार वायनाड, तिरुवनंतपुरम, पथानमथिट्टा, थ्र‌िसुर, पलक्कड़ और एर्नाकुलम हैं. कांग्रेस ने अपने गढ़ को बचाने के लिए परिसीमन के बाद 2008 में बनी वायनाड सीट पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को उतार दिया. 2008 में इस सीट के बनने के बाद से दोनों ही चुनावों में वायनाड सीट को कांग्रेस ने ही जीता है. अब दक्षिण भारत में कांग्रेस को बचाए रखने के उद्देश्य का हवाला देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष वायनाड से चुनाव लड़ा है.

इसके अलावा तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर ने फिर से ताल ठोंकी है. उनके चलते सीट का महत्व काफी बढ़ गया है. इसी तरह थ्र‌िसुर सीट से कांग्रेस के टीएन प्रतापन और बीजेपी के सुरेश गोपी में टक्कर है. लेकिन इस सीट को जीतती सीपीआईएम आई है. इस बार भी सीपीआईएम उम्मीदवार राजाजी मथ्यू थॉमस ने पूरा जोर लगा रखा है. पथानमथिट्टा से एंट एंटनी और सीपीआईएम के वीना जॉर्ज और बीजेपी उम्मीदवार के सुरेंद्रन के बीच मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है.

पलक्कड़ सीट पर कांग्रेस वीके श्रीकंदन और सीपीआईएम के एमबी राजेश व बीजेपी के सी कृष्‍णाकुमार भी टक्कर में है. एर्नाकुलम की लड़ाई इस बार काफी रोचक हो गई है. यहां बीजेपी ने मौजूदा केंद्रीय मंत्री अल्फोंस कन्नाथनन को यहां से उम्मीदवार बनाया है जबकि कांग्रेस ने हीबी इडेन, माकपा ने पी. राजीव, बहुजन समाज पार्टी ने पीए नियामाथुल्ला, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ने वीएम फैजल और समाजवादी फॉरवर्ड ब्लॉक ने अब्दुल खादेर वाझाक्काला को टिकट दिया है. यहां की लड़ाई काफी दिलचस्प बताई जा रही है.

केरल में इन मुद्दों पर लड़ा गया लोकसभा चुनाव 2019
केरल में चुनाव के दौरान इस बार सबरीबाला मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए फैसले की चर्चा सबसे ज्यादा रही. इसके अलावा प्रदेश में जमकर मोदी विरोधी नारे लगे. यहां के स्‍थानीय मुद्दों के ऊपर मोदी विरोध को तरजीह दी गई. बीजेपी के अलावा सभी विरोधी पार्टियों ने जमकर मोदी विरोध में प्रचार किया. ठीक इसी तरह कांग्रेस ने राहुल के पक्ष में भी जमकर प्रचार किए. केरल में इस चुनाव में स्‍थानीय मुद्दों की तुलना में राहुल के पक्ष में ज्यादा प्रचार किया गया, क्योंकि वे पहली बार केरल की धरती से चुनाव लड़ रहे हैं. केरल में लोकसभा चुनाव 2019 के तीसरे चरण में 23 अप्रैल को वोटिंग की गई. इसमें कुल 77.82 प्रतिशत वोटिंग हुई है.

कैसा है केरल का परिसीमन
भौगोलिक प्रकृति के हिसाब से देखें तो केरल भारत के सबसे प्रमुख टूरिस्ट प्लेस में से एक है. हालांकि इसे पूर्वी मलनाड (Eastern Highland), अडिवारम (तराई - Foot Hill Zone), ऊंचा पहाड़ी क्षेत्र (Hilly Uplands), पालक्काड दर्रा, तृश्शूर-कांजगाड समतल, एरणाकुलम - तिरुवनन्तपुरम रोलिंग समतल और पश्चिमी तटीय समतल में बांटते हैं. राजनीतिक दृष्टि से इसका को इसका कोई अलग से विभाजन नहीं है.

केरल की सामान्य वर्ग वोटर्स में नैयर जाति के लोग करीब 14 फीसदी वोट हैं. ये राज्य की करीब नौ से 10 सीटों को प्रभावित करते हैं. इस जाति के उम्मीदवारों को भी तीनों प्रमुख पार्टियों ने बहुत ही ज्यादा अहम‌ियत दी है. इसके अलावा प्रदेश में इझावा जाति के करीब 26 फीसदी वोटर हैं जिनको लेफ्ट का पारंपरिक वोटर माना जाता है. इसके अलावा केरल में पिछड़ी जाति के चार, अनुसूचित जाति के नौ और अनुसूचित जनजाति के दो फीसदी वोट हैं.

इसी तरह प्रदेश में कुल 27 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं. इनके बीजेपी विरोध में जाने की संभावना जताई जा रही है. इसी तरह प्रदेश में 18 फीसदी वोटर क्रिश्चिन समुदाय से भी आते हैं. इस समुदाय के राहुल गांधी के साथ जाने की संभावना जताई गई थी.

केरल में किसने लगाया कितना जोर
केरल में इस बार पीएम मोदी ने खुद कमान संभाली. उन्होंने पूरी कोशिश की कि इस बार बीजेपी का केरल में खाता खुल जाए. लेकिन उनके काट के तौर पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी दोनों ही कूद गए थे. एक तरफ बीजेपी की कमान नरेंद्र मोदी ने इस प्रदेश में सभाल रखी थी तो दूसरी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने कांग्रेस की कमान संभाली थी. जबकि सीपीआईएम की पूरी कमान केरल सीएम पी विजयन ने संभाल रखी थी.

 
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