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केरलः जानें कौन हैं फातिमा तहिलिया, जिन्होंने मुस्लिम लीग में सुधार के लिए लड़ाई तेज करने का किया ऐलान

2012 में हरिता के गठन के बाद 
फातिमा ताहिलिया इसकी पहली प्रदेश अध्यक्ष थी. (फोटो: News18 Malayalam)

2012 में हरिता के गठन के बाद फातिमा ताहिलिया इसकी पहली प्रदेश अध्यक्ष थी. (फोटो: News18 Malayalam)

Fathima Thahiliya on IUML: 2012 में हरिता के गठन के बाद ताहिलिया इसकी पहली प्रदेश अध्यक्ष थी. तब तक कॉलेज भवनों में IUML की महिला समर्थकों के पास अपनी बात रखने के लिए कोई मंच नहीं था.

  • News18Hindi
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    तिरुवनंतपुरम. इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के छात्र संगठन मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF) के कुछ नेताओं पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाले महिला मोर्चा हरिता (Haritha) की फातिमा ताहिलिया ने अपनी लड़ाई तेज करने का फैसला किया है. उन्होंने ऐलान किया है कि वे पार्टी के भीतर की ताकतों से लड़ने के लिए महिलाओं को एकजुट करने जा रही हैं. MSF नेताओं पर आरोप लगाने के बाद हरिता को खत्म कर दिया गया था.

    केरल को कोझिकोड में ताहिलिया ने कहा, ‘मैं इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के अंदर एक सुधारात्मक ताकत के तौर पर लड़ने के लिए एक जैसी सोच वाली महिलाओं का एक समूह बनाने जा रही हूं. इसे नाम की घोषणा जल्द ही की जाएगी.’ पार्टी नेतृत्व पर आरोपों का दबाने का आरोप लगाने पर उन्हें बीते हफ्ते MSF के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया था.

    ताहिलिया IUML समर्थक एक रूढ़िवादी परिवार से आती हैं, लेकिन वे बेफिक्र रहती हैं. उनका कहना है, ‘हमारे हाथ और पेर बांधे नहीं गए हैं. मैं अब IUML की आम सदस्य भर हूं. मैंने पद से हटाए जाने को सकारात्मक रूप से लिया है.’ मलप्पुरम के पनक्कड़ थंगल परिवार को IUML में प्रभाव को लेकर उन्होंने कहा, ‘IUML एक व्यक्ति की नहीं है और लोकतंत्र के मूल्य इसके संविधान में शामिल हैं. अगर हाल के सालों में पार्टी किसी एक व्यक्ति की होकर रह गई है, तो इसे वापस पटरी पर लाना होगा. पार्टी को और ज्यादा लोकतांत्रिक बनाना होगा.’

    2012 में हरिता के गठन के बाद ताहिलिया इसकी पहली प्रदेश अध्यक्ष थी. तब तक कॉलेज भवनों में IUML की महिला समर्थकों के पास अपनी बात रखने के लिए कोई मंच नहीं था. ताहिलिया बताती हैं, ‘हरिता को मान्यता तब मिली जब हमने भवनों में MSF की पहुंच बढ़ाने और कई कॉलेज यूनियन जीतने में मदद की थी. लेकिन तब भी, हमें स्थानीय निकाय चुनावों में महिला उम्मीदवारों को उतारने के लिए बीते साल तक इंतजार करना पड़ा.’

    ताहिलिया के मुताबिक, हरिता ने नेतृत्व पर सवाल नहीं उठाए थे. बल्कि राजनीतिक के मामले में लैंगिक निष्पक्षता और महिलाओं और उनकी आवाज के लिए जगह सुनिश्चित करना चाहती थी. दो महीने पहले हरिता नेताओं ने आरोप लगाए थे कि जून में MSF पदाधिकारियों की बैठक के दौरान तीन नेताओं- प्रदेश अध्यक्ष पीके नवास, मलप्पुरम जिला अध्यक्ष एम कबीर और जिला महासचिव वीए वहाब ने कथित रूप से उन्हें लेकर अभद्र टिप्पणी की थी. इस मामले पर जब पार्टी ने कार्रवाई नहीं की, तो हरिता नेताओं ने अगस्त में राज्य की महिला आयोग के पास शिकायत दर्ज कराई थी.

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