बाढ़ से जूझते केरल की मदद में केंद्र से हुई कोताही?

बाढ़ से जूझते केरल की मदद में केंद्र से हुई कोताही?
केरल में बाढ़ की तस्वीर- तस्वीर PTI

केंद्र की तरफ जारी सौ करोड़ रुपये की राहत राशि तब जारी की गई, जब राज्य ने 1,220 करोड़ रुपये की तत्काल सहायता मांगी थी, ऐसे में यह पर्याप्त नहीं लगता...

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 18, 2018, 9:06 AM IST
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शेख शालिक, मयंक मोहंती
बारिश और बाढ़ की मार झेल रहे केरल में राज्य सरकार प्रकृति के आगे असहाय महसूस कर रही है. राज्य की पिनराई विजयन सरकार प्रकृति के कोप और संसाधनों की कमी के बीच घिर गई है. 'गॉड्स ओन कन्ट्री' कहे जाने वाले केरल में हर ओर पानी ही पानी है.

प्रकृति की मार झेलने के लिए राज्य के निवासी, नेता और अधिकारी एकजुट होकर राहत और बचाव कार्य में लगें हैं, लेकिन इसके लिए केंद्र की ओर से देरी से मदद मिलना ज्यादा परेशान करने वाला है.

केंद्र की ओर से सेना और नौसेना की इकाइयों समेत केंद्रीय बलों की 52 बचाव टीमों की तैनाती के जरिये बचाव कार्य में प्रशासन की सहायता कर रहा है. इसके साथ ही 339 मोटरबोट, 2,800 लाइफ जैकेट, 1,400 लाइफबोट, 27 लाइट टावर और 1,000 रेनकोट्स के जरिये राहत और बचाव कार्य किया जा रहा है.
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केंद्र द्वारा जारी सौ करोड़ रुपये की राहत राशि तब जारी की गई, जब राज्य ने 1,220 करोड़ रुपये की तत्काल सहायता मांगी थी, ऐसे में यह पर्याप्त नहीं लगता है. अनुमानों के मुताबिक, केरल में मानसून से जुड़ा करीब दस हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. इन सबके बीच, यह काफी तथ्य काफी हैरान करते हैं कि उसी केंद्र सरकार ने केरल में अनुमानित क्षति के 10 प्रतिशत से भी कम जारी किया, जबकि अन्य राज्य जो हाल ही में बाढ़ों का शिकार हुए उनके लिए बेहतर पैकेज जारी किया. इसमें गुजरात, असम और बिहार शामिल है, जहां बीजेपी की सरकार है.

गुजरात
पिछले साल 25 जुलाई को देश में कई जगहों पर बारिश हुई. राजस्थान में दो की मौत हो गई और गुजरात को हाई रिस्क जोन घोषित किया गया. एक हफ्ते बाद भारी बारिश के चलते 222 लोगों की मौत हो गई.

अपने गृह राज्य में आपदा प्रबंधन के लिए प्रधानमंत्री ने तेजी से प्रतिक्रिया की. उन्होंने 500 करोड़ रुपये के अंतरिम राहत पैकेज की घोषणा की और उन्होंने मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया.

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असम
बीते साल 13 जून से 3 अगस्त तक, उत्तर-पूर्वी राज्य असम ने दो बार बाढ़ का सामना किया जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई. राज्य के सात जिलों में लगभग 11 लाख लोग प्रभावित हुए थे.

पीएमओ के उत्तर पूर्वी क्षेत्र के विकास मंत्रालय जितेंद्र सिंह ने राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (एसडीआरएफ) में केंद्रीय हिस्से की पहली किश्त के जरिए 239.40 करोड़ रुपये जारी किए गए. इसके साथ ही अंतरिम बाढ़ राहत पैकेज के रूप में 340.4 करोड़ रुपये की घोषणा की गई. पूर्वोत्तर मंत्रालय (डीओएनईआर) से योगदान के रूप में 101 करोड़ रुपये दिए.

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बिहार
बीते साल 12 अगस्त से 20 अगस्त तक की बाढ़ ने बिहार में भी भारी नुकसान किया. राज्य के उत्तरी इलाके के 19 जिलों में आई बाढ़ में 514 लोग मारे गए और 1.71 करोड़ लोग प्रभावित हुए. गंडक, बूढ़ी गंडक, कमला, कोसी महानंदा और बागमती में भारी बाढ़ आई.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रभावित जिलों, पूर्णिया, कटिहार, किसनगंज और अररिया में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ हवाई सर्वेक्षण किया और 500 करोड़ रुपये की राहत राशि जारी की. इसके साथ बाढ़ में मारे गए लोगों के परिजनों को 2 लाख रुपये देने का ऐलान भी किया गया.

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