जब एक स्‍टॉकब्रोकर ने केरल बाढ़ के लिए लाइव टीवी पर साइन कर दिया पांच करोड़ का चेक

अगस्‍त के पहले सप्‍ताह में भारी बरसात के बाद अधिकारियों को समझ लेना चाहिए था कि बाढ़ आ सकती है. 16 अगस्‍त तक राज्‍य में 2191 मिलीमीटर पानी गिरा जो कि राष्‍ट्रीय बारिश का 30 प्रतिशत था.

News18Hindi
Updated: September 7, 2018, 5:09 PM IST
जब एक स्‍टॉकब्रोकर ने केरल बाढ़ के लिए लाइव टीवी पर साइन कर दिया पांच करोड़ का चेक
केरल में अगस्‍त के महीने में भारी बारिश और फिर दो बांधों के दरवाजे खोलने के बाद 100 साल की सबसे भयंकर बाढ़ आई थी.(FIle Photo:AP)
News18Hindi
Updated: September 7, 2018, 5:09 PM IST
बीनू के जॉन

केरल में अगस्‍त के महीने में भारी बारिश और फिर दो बांधों के दरवाजे खोलने के बाद 100 साल की सबसे भयंकर बाढ़ आई थी. इस आपदा में 400 के करीब लोगों की जान गई थी और तकरीबन 8000 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ था. अगस्‍त के पहले सप्‍ताह में भारी बरसात के बाद अधिकारियों को समझ लेना चाहिए था कि बाढ़ आ सकती है. 16 अगस्‍त तक राज्‍य में 2191 मिलीमीटर पानी गिरा जो कि राष्‍ट्रीय बारिश का 30 प्रतिशत था.

इस आपदा के बाद लोगों ने दिल खोलकर राज्‍य की मदद की. इसके तहत आर्थिक मदद से लेकर राहत सामग्री तक मुहैया कराई गई. हमने एक ऐसा दुर्लभ पल भी देखा जिसमें मुंबई के एक स्‍टॉकब्रोकर ने लाइव टीवी पर पांच करोड़ रुपये का चेक मदद के लिए साइन कर दिया. पूरे एक महीने तक देश की नजरें केरल में राहत कार्यों पर रहीं. ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया. ताजा आंकड़ों के अनुसार मदद के लिए मिली रकम 1000 करोड़ के पार जा चुकी है.

हम ऐसा कह सकते हैं कि आपदा का स्‍तर निम्‍न से मध्‍यम दर्जे का था और यह राष्‍ट्रीय आपदा नहीं थी. तुलनात्‍मक रूप से देखें तो जून 2013 में उत्‍तराखंड में आई आपदा में 7000 लोग मारे गए थे और कई गांव बह गए थे. केरल में एक भी गांव नहीं बहा क्‍योंकि दूरस्‍थ जगहों पर भी पक्‍के मकान बने हुए थे. यह केरल के विकसित समाज की निशानी है. उत्‍तराखंड आपदा से उबर गया था और केरल भी उबर जाएगा. केरल न तो औद्योगिक राज्‍य है और न ही कृषि के लिहाज से बड़ा है. खाद्य सामग्री के लिए केरल तमिलनाडु पर आश्रित है. हालांकि इस महीने केरल में चावल व अन्‍य सामान की कमी महसूस की जा रही है.

दक्षिण के राज्‍यों में भी केरल अपने आर्थिक मॉडल के जरिए अकेला खड़ा है. उसके मॉडल में विदेशों से आए पैसे-सर्विस सेक्‍टर और पर्यटन शामिल हैं. उसने नॉलेज सेक्‍टर में भी जगह बनाई है. उद्योगों के लिए यह दूसरे राज्‍यों से प्रतिस्‍पर्धा नहीं कर सकता. इसलिए जब आपदा आती है तो इन जगहों पर काम रुक जाता है और अर्थव्‍यवस्‍था की कड़ी परीक्षा होती है. इसका सबसे बुरा असर पर्यटन पर पड़ता है. बाढ़ के बाद अब अगले दो महीने तक पर्यटन पर बुरा असर पड़ेगा.

केरल ज्‍यादा धन मुहैया नहीं कराता लेकिन वहां खपत ज्‍यादा है. टाटा मोटर्स के एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने हाल ही में कहा था कि दिल्‍ली/एनसीआर के बाद केरल में सबसे ज्‍यादा कारें खरीदी जाती हैं और महंगी और सस्‍ती दोनों तरह की कार कंपनियों को प्रत्‍येक जिले में शोरूम रखना होता है. बाढ़ के चलते इस पर भी बुरा असर हुआ है. पिछले साल की तुलना में कार की बिक्री एक प्रतिशत कम रही है और आने वाले महीनों में भी गिरावट जारी रह सकती है.

बाढ़ के चलते मकानों की हालत खस्‍ता है. ज्‍यादातर मकानों को मरम्‍मत की जरूरत है. ऐसे में सबसे ज्‍यादा खर्च इसी पर होगा. हालांकि इसका नुकसान भी है कि यह पैसा आएगा कहां से. बैंकों से कर्ज लेने पर वापस चुकाने के लिए लोगों को सोना बेचना पड़ सकता है. बता दें कि केरल में सोने को लेकर अलग ही तरह की दीवानगी है.

केरल के ज्‍यादातर पुल पुराने हैं और सरकार के पास इनकी मरम्‍मत के लिए पैसा नहीं है. लेकिन बाढ़ के चलते ज्‍यादातर पुलों को बनाना होगा. सरकार का अनुमान है कि इस पर लगभग 20 हजार करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं. राज्‍य के खजाने पर इसका भी बड़ा असर होगा. विडंबना है कि ज्‍यादातर अमीर मलयाली बाहर रहते हैं(केरल के 10 एनआरआई अरबपति हैं) और सरकार को इनकी कमाई से कुछ नहीं मिलता.

(लेखक वरिष्‍ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर