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केरल: कोरोना महामारी और भारी बारिश के बावजूद सबरीमाला पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालु

केरल: कोरोना महामारी और भारी बारिश के बावजूद सबरीमाला पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालु

केरल में भारी बारिश के बावजूद सबरीमाला में सैकड़ों  श्रद्धालु पहुंचे हैं.

केरल में भारी बारिश के बावजूद सबरीमाला में सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे हैं.

कोरोना महामारी (Corona epidemic) और भारी बारिश (heavy rains) के कारण केरल (Kerala) में खराब मौसम की स्थिति के बावजूद मंगलवार को यहां सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसिद्ध भगवान अयप्‍पा मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पवित्र सबरीमाला ( Sabarimala temple) की यात्रा की. यहां दो महीनों तक चलने वाले मंडलम-मकरविलक्कू तीर्थयात्रा सीजन की शुरुआत हुई. यहां के मुख्‍य पुजारी एन परमेश्‍वरन नंबूथिरी ने मंगलवार सुबह मंदिर के कपाट खोलने के बाद गर्भगृह में पारंपरिक दीप जलाया और भक्‍तों को तलहटी से पहाड़ियों की यात्रा करने की अनुमति मिल गई. मंदिर के अधिकारियों ने कहा कि इस साल 'पम्पा स्नानम' यानी पंपा नदी में अनुष्ठानिक स्नान की अनुमति नहीं दी जाएगी.

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    पत्तनंतिट्टा (केरल). कोरोना महामारी (Corona epidemic) और भारी बारिश (heavy rains) के कारण केरल (Kerala) में खराब मौसम के बावजूद मंगलवार को यहां सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसिद्ध भगवान अयप्‍पा मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पवित्र सबरीमाला ( Sabarimala temple) की यात्रा की. यहां दो महीनों तक चलने वाले मंडलम-मकरविलक्कू तीर्थयात्रा सीजन की शुरुआत हुई. यहां के मुख्‍य पुजारी एन परमेश्‍वरन नंबूथिरी ने मंगलवार सुबह मंदिर के कपाट खोलने के बाद गर्भगृह में पारंपरिक दीपक जलाया और भक्‍तों को तलहटी से पहाड़ियों की यात्रा करने की अनुमति मिल गई. पिछले कुछ दिनों से राज्‍य में हो रही भारी बारिश और बाढ़ जैसे हालात के बावजूद बड़ी संख्‍या में श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं.

    श्रद्धालुओं ने बताया कि कोरोना प्रोटोकॉल के पालन करते हुए आभासी कतार प्रणाली का पालन करना जरूरी है. साथ ही मास्‍क और सोशल डिस्‍टेंसिंग जैसे जरूरी उपाय भी यहां लागू हैं. ये नियम पिछले साल भी लागू किए गए थे. इस बार महामारी के साथ-साथ खराब मौसम, भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति ने कुछ दिक्‍कतें बढ़ा दी हैं. बड़ी संख्‍या में पहुंचे तीर्थयात्रियों के कारण यहां व्‍यवस्‍था बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं है. वहीं, मंदिर परिसर में कभी इससे कहीं अधिक संख्‍या में श्रद्धालु पहुंचते थे. मंदिर प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि मलयालम महीने के वृचिकम के पहले दिन यहां भक्‍तों की अपार भीड़ हुआ करती थी, उसके मुकाबले तो इस बार संख्‍या कम है. उन्‍होंने बताया कि कोरोना महामारी और भारी बारिश को देखते हुए तीर्थयात्रियों की संख्‍या को सीमित करने का फैसला लिया गया है.

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    मंदिर के अधिकारियों ने कहा कि इस साल ‘पम्पा स्नानम’ यानी पंपा नदी में अनुष्ठानिक स्नान की अनुमति नहीं दी जाएगी क्योंकि इसका जल स्तर खतरे के निशान से ऊपर है. वहीं, मंदिर के गर्भगृह को सोमवार शाम को तंत्री (प्रमुख) की उपस्थिति में खोला गया. यहां के पुजारी कंदरारू महेश मोहनारारू और निवर्तमान पुजारी वीके जयराज पोट्टी द्वारा यहां पूजा अर्चना की गई. मौसम विभाग ने बताया कि अगले तीन या चार दिनों तक शीर्ष मंदिर के आसपास के इलाके में भारी बारिश हो सकती है.

    सरकारी सूत्रों ने बताया कि सरकार ने कोरोना महामारी की स्थिति पर विचार करने के बाद इस सीजन में प्रति दिन केवल 30,000 भक्तों को आभासी कतार प्रणाली के माध्यम से दर्शन करने की अनुमति देने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रा को कोविड​-19 प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करते हुए आयोजित किया जाएगा. इसमें अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि सभी तीर्थयात्रियों के लिए कोविड सर्टिफिकेट या आरटी-पीसीआर नेगेटिव सर्टिफिकेट अनिवार्य है, इसके बिना किसी को भी पहाड़ी मंदिर में जाने की अनुमति नहीं होगी.

    गौरतलब है कि यहां 41 दिनों तक मंडल पूजा उत्‍सव होता है, जिसका समापन 26 दिसंबर को होता है. तीर्थयात्रा के दूसरे चरण, मकरविलक्‍कु उत्‍सव के लिए मंदिर को 30 दिसंबर को फिर से खोला जाएगा. इसके बाद 14 जनवरी 2022 को मकरविलक्‍कु उत्‍सव के बाद 20 जनवरी को पहाड़ी मंदिर को बंद कर दिया जाएगा.

    Tags: Corona epidemic, Heavy rains, Kerala, Sabarimala temple

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