निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी केरल महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष, टिकट न मिलने पर दिया था इस्तीफा

लतिका सुभाष केरल कांग्रेस की सीनियर नेताओं में शुमार की जाती रही हैं. (तस्वीर-ani)

लतिका सुभाष केरल कांग्रेस की सीनियर नेताओं में शुमार की जाती रही हैं. (तस्वीर-ani)

लतिका सुभाष (Lathika Subhash) ने टिकट न दिए जाने पर विरोध का अजीबोगरीब तरीका अपनाया था. राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित पार्टी दफ्तर के सामने लतिका ने अपना सिर मुंडवाकर (head tonsured) विरोध दर्ज कराया था. अब उन्होंने राज्य की एत्तूमन्नूर सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 23, 2021, 7:28 PM IST
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तिरुवनंतपुरम. केरल महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष लतिका सुभाष अब निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरेंगी. वो राज्य की एत्तूमन्नूर सीट से चुनाव लड़ेंगी. लतिका सुभाष (Lathika Subhash) ने टिकट न दिए जाने पर विरोध का अजीबोगरीब तरीका अपनाया था. राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित पार्टी दफ्तर के सामने लतिका ने अपना सिर मुंडवाकर (head tonsured) विरोध दर्ज कराया था. हालांकि उन्होंने ये भी कहा था कि वो किसी दूसरी पार्टी में नहीं जा रही हैं. उन्होंने कहा था कि मैं पार्टी में सभी पदों से इस्तीफा दे रही हूं.

गौरतलब है कि राहुल गांधी इस वक्त केरल की वायनाड लोकसभा सीट से सांसद हैं. 2019 में जब उन्होंने इस सीट का चयन किया था तो इसे प्रतीकात्मक निर्णय भी माना गया था. कहा गया कि इससे दक्षिण भारतीय राज्यों में कांग्रेस मजबूत हो सकती है. लेकिन अभी ऐसा होता नहीं दिख रहा है. इससे पहले राज्य में जब निकाय चुनाव हुए थे तब भी पार्टी लीडरशिप को लेकर नाराजगी जाहिर की गई थी. उस चुनाव में सीपीएम की अगुआई वाले एलडीएफ ने जीत हासिल की थी.

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हाल ही में पीसी चाको ने भी दिया है इस्तीफा
केरल के एक और दिग्गज कांग्रेसी नेता पीसी चाको ने भी हाल ही में इस्तीफा दिया है. उन्होंने भी पार्टी छोड़ने के पहले नाराजगी जाहिर की थी. चाको ने एनसीपी जॉइन कर ली है. उन्होंने साफ किया था कि वो विधानसभा चुनाव में एलडीएफ गठबंधन की तरफ से प्रचार करेंगे.

एक चरण में होने हैं चुनाव

दक्षिण भारतीय राज्य केरल में 140 विधानसभा सीटों पर 6 अप्रैल को वोटिंग की जानी है. राज्य में चुनाव के नतीजों का ऐलान 2 मई को होगा. केरल के अलावा तमिलनाडु और पुडुचेरी भी ऐसे राज्य हैं, जहां एक चरण में मतदान संपन्न होंगे. सबसे लंबा कार्यक्रम पश्चिम बंगाल में चलेगा. यहां 29 अप्रैल तक मतदान किए जाएंगे.
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