केरल में प्रति दस लाख आबादी में एक्टिव मामले देश में सबसे ज्यादा, 2 सप्ताह में पीक की संभावना

इस अवधि के दौरान केरल में परीक्षण सकारात्मकता दर (TPR) भी 13.8% थी, जो राष्ट्रीय औसत 7.3% से बहुत अधिक थी (फोटो- AP)
इस अवधि के दौरान केरल में परीक्षण सकारात्मकता दर (TPR) भी 13.8% थी, जो राष्ट्रीय औसत 7.3% से बहुत अधिक थी (फोटो- AP)

प्रति दस लाख जनसंख्या (per million) पर अधिकतम नए मामले भी केरल (Kerala) में ही पाये जा रहे हैं. पिछले सप्ताह यानी 26 सितंबर से 3 अक्टूबर के बीच प्रतिदिन 1599 नए मामले (daily new cases) केरल में सामने आए, जबकि दिल्ली में 1198 मामले प्रतिदिन, कर्नाटक (Karnataka) में 1055 मामले प्रतिदिन और महाराष्ट्र (Maharashtra) में 976 मामले प्रतिदिन सामने आए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 6, 2020, 8:42 PM IST
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कोच्चि. देश में प्रति दस लाख की जनसंख्या (Per Million Population) पर केरल (Kerala) में सक्रिय कोविड-19 मामलों (Active COVID-19 Cases) की संख्या फिलहाल सबसे अधिक है. केरल में वर्तमान में प्रति दस लाख की जनसंख्या पर कोविड-19 (COVID-19) से संक्रमित 2421 मामले हैं. जबकि उसके मुकाबले महाराष्ट्र (Maharashtra) में यह आंकड़ा 2297, कर्नाटक (Karnataka) में 1845 और दिल्ली (Delhi) में 1503 है.

प्रति दस लाख जनसंख्या (per million) पर अधिकतम नए मामले भी केरल (Kerala) में ही पाये जा रहे हैं. पिछले सप्ताह यानी 26 सितंबर से 3 अक्टूबर के बीच प्रतिदिन 1599 नए मामले (daily new cases) केरल में सामने आए, जबकि दिल्ली में 1198 मामले प्रतिदिन, कर्नाटक (Karnataka) में 1055 मामले प्रतिदिन और महाराष्ट्र (Maharashtra) में 976 मामले प्रतिदिन सामने आए. इस अवधि के दौरान यहां पर परीक्षण सकारात्मकता दर (TPR) भी 13.8% थी, जो राष्ट्रीय औसत 7.3% से बहुत अधिक थी. देश में केवल महाराष्ट्र में इससे अधिक TPR है. जहां TPR 16.7% है.





केरल में कोविड मामलों का पीक दो सप्ताह में आने की उम्मीद
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा है कि केरल में कोविड मामलों का पीक दो सप्ताह में आने की उम्मीद है और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या राज्य का स्वास्थ्य ढांचा अधिक रोगियों को संभालने के लिए तैयार है. इस सवाल का उत्तर उत्साहजनक नहीं है.

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा, "कोविड रोगियों के इलाज के लिए जिलों में आईसीयू और वेंटिलेटर तो तैयार हैं, लेकिन पर्याप्त प्रशिक्षित डॉक्टर और नर्सें इसके लिए नहीं हैं. इसके चलते मौजूदा सुविधाओं पर अधिक दबाव है. एक बार जब हम अपने पीक पर पहुंच जाएंगे, तो यह विनाशकारी होगा और हम अधिक मौतें देख रहे होंगे."

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स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा, "कोविड रोगियों के इलाज के लिए जिलों में आईसीयू और वेंटिलेटर तो तैयार हैं, लेकिन पर्याप्त प्रशिक्षित डॉक्टर और नर्सें इसके लिए नहीं हैं. इसके चलते मौजूदा सुविधाओं पर अधिक दबाव है. एक बार जब हम अपने पीक पर पहुंच जाएंगे, तो यह विनाशकारी होगा और हम अधिक मौतें देख रहे होंगे." अच्छी बात यह है कि, डॉ. बी इकबाल और साथ ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति स्वास्थ्य विभाग से डॉक्टरों और नर्सों को क्रिटिकल केयर यूनिट्स को संभालने के लिए प्रशिक्षित करने के लिए कह रही है, लेकिन जमीन पर बहुत कुछ नहीं हो सका है.
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