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चर्च के कैलेंडर में रेप के आरोपी बिशप मुलक्‍कल के फोटो पर बवाल, विरोध में उतरे लोग

नन रेप केस में आरोपी है बिशप मुलक्‍कल. (File Pic ANI)
नन रेप केस में आरोपी है बिशप मुलक्‍कल. (File Pic ANI)

ऐसा लगातार दूसरी बार हुआ है और इसकी वजह से चर्च में आस्था रखने वाले लोगों के एक वर्ग में नाराज़गी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 15, 2020, 12:42 PM IST
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तिरुवनंतपुरम. केरल (Kerala) के सीरो-मालाबार चर्च (Syro Malabar church) के आधिकारिक कैलेंडर में बलात्कार के आरोपों से घिरे बिशप फ्रैंको मुलक्‍‍‍कल (Franco Mulakkal) का फोटो छापे जाने पर काफी हंगामा हो रहा है. ऐसा लगातार दूसरी बार हुआ है और इसकी वजह से चर्च में आस्था रखने वाले लोगों के एक वर्ग में नाराज़गी है. इन लोगों ने राज्य में कई स्थानों पर विरोध में इस कैलेंडर की कॉपियां जलाई हैं.

‘कैथोलिक सभा’ के नए साल के कैलेंडर में मार्च पृष्ठ पर बिशप फ़्रैंको मुलक्कल का उनकी जन्मतिथि सहित फ़ोटो छापने के लिए सीरो-मालाबार कैथोलिक चर्च के त्रिसूर आर्चडायसेस की काफ़ी आलोचना हो रही है. वर्ष 2021 के नए आधिकारिक कैलेंडर में अन्य बिशप के साथ बिशप मुलक्कल का भी फ़ोटो छापा गया है. उनकी जन्मतिथि 25 मार्च है. 56 साल के मुलक्कल इस समय बलात्कार के आरोप झेल रहे हैं. उन पर आरोप है कि उन्होंने 2014 और 2016 के बीच कोट्टायम ज़िले के एक कॉन्वेंट में एक नन के साथ कई बार बलात्कार किया.

एडवोकेट बोरिस पॉल ने न्यूज़18 से बातचीत में कहा, 'पिछले साल भी इन लोगों ने इस बिशप का फ़ोटो कैलेंडर पर छापा था. उस समय उनके ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल नहीं किया गया था. हालांकि, अब उनके ख़िलाफ बलात्कार के आरोपों में मुक़दमा चल रहा है. चर्च को पीड़ित नन का साथ देना चाहिए था. ऐसा करना एक ऐसे व्यक्ति की प्रशंसा करना है जिसके ख़िलाफ़ बलात्कार और यौन अत्याचार के आरोप हैं और ऐसा करके पूरे समुदाय को इस पेशे की नैतिकता के बारे में गलत संदेश दिया गया है. इसलिए चर्च के कैलेंडर में आरोपी की तस्वीर को शामिल किए जाने को हम क़ानूनी व्यवस्था, सिविल सोसायटी और समुदाय को चुनौती मानते हैं.' बोरिस पॉल ऑल केरला चर्च एक्ट एक्शन काउंसिल के अध्यक्ष भी हैं.



चर्च के इस कदम का विरोध करते हुए सेव आवर सिस्टर्ज़ एक्शन काउंसिल के कुछ सदस्य और इस पंथ में विश्वास करने वाले लोगों ने त्रिसूर, कोट्टायम, एर्नाकुलम और कोल्लम में रविवार और सोमवार को इस कैलेंडर की प्रतियां चर्च के गेट के सामने में जलाईं. चर्च में ननों के ख़िलाफ उत्पीड़न को रोकने के लिए इस सेव आवर सिस्टर्ज़ ऐक्शन काउंसिल की स्थापना की गयी है और कैलेंडर की प्रतियां जलाने में इसके सदस्यों के अलावा केरल कैथलिक रेफ़ॉर्म्ज़ मूवमेंट एवं चर्च ऐक्ट ऐक्शन काउंसिल के सदस्यों ने भी हिस्सा लिया.
बोरिस पॉल ने कहा, 'अब यह मुद्दा सोशल मीडिया पर भी एक बड़ा मुद्दा बन गया है. भारी संख्या में लोग इसका समर्थन कर रहे हैं और इस कैलेंडर की प्रतियां जला रहे हैं और सोशल मीडिया पर इसे पोस्ट कर रहे हैं. इन लोगों का कहना है कि बिशप के फ़ोटो को कैलेंडर में शामिल करना भारी संख्या में चर्च के पुजारियों और ननों का अपमान है जिन्होंने समाज की भलाई में अपना जीवन लगा दिया है.'

चर्च ने मुलक्कल की तस्वीर को कैलेंडर में शामिल किए जाने के फ़ैसले को सही ठहराया और कहा कि मुलक्कल अभी भी बिशप है और उनके ख़िलाफ़ लगाए गए आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं और इसके ख़िलाफ़ हो रहे विरोध को उसने ‘अवांछित’ बताया. मुलक्कल जालंधर डायसेस, लैटिन चर्च डायसेस, पंजाब का प्रमुख था पर बाद में वेटिकन ने उसके ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के बाद उसे इनकी प्रशासनिक ज़िम्मेदारी से मुक्त कर दिया. उसके ख़िलाफ़ आईपीसी की विभिन्‍न धाराओं के तहत मुक़दमा चलाया जा रहा है.

मुलक्कल के ख़िलाफ़ यह मामला कोट्टायम के अतिरिक्त सत्र जज की अदालत में चल रहा है. इससे पूर्व केरल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने बलात्कार के मामले में बरी किए जाने की मुलक्कल की अपील ठुकरा दी.
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