केरल के पहले 'गे कपल' की प्रेम कहानी, वो अब 'राइट टू एडॉप्ट' के लिए लड़ रहे हैं

निकेश ने बताया, "मैंने डेटिंग ऐप (Dating App) पर एक प्रोफाइल बनाई, मुझे सोनू का मैसेज मिला. सोनू बिल्कुल उसी तरह का साथी था जिसकी मुझे तलाश थी. हम बातें करने लगे. मिलने के दो दिन बाद, हम कोच्चि (Kochi) के एक रेस्तरां में डेट पर गए. फिर बात आगे बढ़ी और हम एक-दूसरे के हो गए."

News18Hindi
Updated: September 6, 2019, 12:23 PM IST
केरल के पहले 'गे कपल' की प्रेम कहानी, वो अब 'राइट टू एडॉप्ट' के लिए लड़ रहे हैं
केरल के पहले 'गे कपल' की प्रेम कहानी.
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Updated: September 6, 2019, 12:23 PM IST
केरल- 5 जुलाई, 2018 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को रद्द किए जाने से ठीक दो महीने पहले, केरल के दो युवाओं ने गुरुवायुर श्रीकृष्ण मंदिर (Guruvayur Sri Krishna Temple) में एक दूसरे को अंगूठी पहनाई. इस सगाई समारोह के गवाह के तौर पर केवल भगवान की प्रतिमा वहां मौजूद थी, उन दोनों में से किसी के भी रिश्तेदार वहां नहीं आए थे. आज से कुछ दिन पहले, निकेश उषा पुष्करन (Nikesh Usha Pushkaran) और सोनू एमएस (Sonu MS) ने फेसबुक पर अपनी शादी की घोषणा की. सगाई के लगभग एक साल बाद उन्होंने शादी कर ली. वे खुले तौर पर शादी की घोषणा करने वाले केरल के पहले विवाहित समलैंगिक जोड़े (Openly Married Gay Couple) हैं.

दोनों एक-दूसरे को दो साल से ज्यादा समय से जानते हैं और अब खुशी-खुशी शादी कर चुके हैं. इस जोड़ी ने इस शादी के बारे में तब बताया जब उन्हें लगा की अब इस बारे में बात करने का साहस उनके अंदर आ चुका है. फिर सही समय आने पर फेसबुक पर इसकी घोषणा कर दी. निकेश कहते हैं, "यह मेरे और सोनू द्वारा लिया गया एक सर्वसम्मत फैसला था." वो आगे कहते हैं, "हमने सोचा कि ये कई लोगों के लिए एक प्रेरणा होगी जो अभी भी बाहर आने और दुनिया को अपनी पहचान बताने से डरते हैं."

जानिए निकेश को कैसे हुआ सोनू से प्यार

त्रिशूर जिले के गुरुवायूर के मूल निवासी 35 वर्षीय निकेश के लिए जीवन इतना आसान नहीं था. वो 14 साल से ज्यादा समय से रिलेशनशिप में थे. उन्होंने कहा, "हमें जिंदगी के एक ऐसे चरण में थे, जहां हमने अपनी पहचान के बारे में सार्वजनिक रूप से जाने का फैसला किया. दुर्भाग्य से वो समाज की प्रतिक्रियाओं के डर से बाहर नहीं आया." वो निकेश के लिए एक भयानक समय था. वह लगभग दो साल से डिप्रेशन की चपेट में रहा. कोच्चि में व्यवसाय चलाने वाले निकेश कहते हैं कि वे एक बैग के साथ बैंगलोर और तिरुवनंतपुरम की यात्रा करते थे और अक्सर सोचते थे कि उन्हें अपनी यात्रा में कहीं न कहीं सही इंसान मिलेगा.

इस बीच, निकेश से पांच साल छोटे सोनू के पास साझा करने के लिए एक अलग कहानी है. वो कूटट्टुकुलम के रहने वाले हैं. उन्होंने अपने माता-पिता को 29 साल की उम्र में अपने यौन अभिविन्यास के बारे में बताया. जब उनके माता-पिता उनके लिए एक दुल्हन की तलाश करने लगहे थे. सोनू का कहना है कि उनके माता-पिता को उसके बारे में पता चलने के बाद वो काफी हैरान थे. अंत में, एक डॉक्टर के समझाने के बाद उन्होंने सोनू की पहचान को स्वीकार कर ली. सोनू कोच्चि में एक आईटी फर्म में काम करते हैं. निकेश ने अपने परिवार को अपने यौन अभिविन्यास के बारे में बहुत पहले ही बता रखा था, इसलिए इसके बारे में उन्हें बहुत कुछ नहीं समझाना पड़ा.

निकेश कहते हैं, सामान्य लोगों के उलट वे अपना मैच खोजने के लिए वैवाहिक वेबसाइटों के माध्यम से सर्फिंग की उम्मीद में नहीं थे. उन्होंने कहा, "मुझे राज्य में दो प्रमुख एलजीबीक्यूआई समर्थन समूहों के साथ अपने डेटिंग के बाद समलैंगिक डेटिंग एप्लिकेशन के बारे में पता चला. जल्द ही मैंने डेटिंग ऐप पर एक प्रोफाइल बनाई, मुझे सोनू का मैसेज मिला. सोनू बिल्कुल उसी तरह का साथी था जिसकी मुझे तलाश थी. हम बातें करने लगे. मिलने के दो दिन बाद, हम कोच्चि के एक रेस्तरां में डेट पर गए. फिर बात आगे बढ़ी और हम एक-दूसरे के हो गए."

अब 'राइट टू एडॉप्ट' के लिए लड़ रहे हैं
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इस दंपति को लगता है कि भारत में समलैंगिकों के साथ भादभाव होता रहा है. निकेश कहते हैं 6 सितंबर हमारा स्वतंत्रता दिवस है. लेकिन ये काफी नहीं है. वो कहते हैं, "हमारी लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक हम सभी को शादी करने और बच्चों को गोद लेने के समान अधिकार नहीं मिल जाते." ये दंपति किसी अनाथ बच्चे को अपनाना चाहती है. निकेश ने कहा, "बच्चे को दो पिता मिलेंगे." फेसबुक पर उनकी शादी की घोषणा के बाद, दोस्तों और सहकर्मियों सहित बहुत से लोग उनके समर्थन में सामने आए. निकेश ने कहा, "आने वाली पीढ़ियों को हमारे संघर्षों का फल मिलेगा."

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First published: September 6, 2019, 12:23 PM IST
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