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सिर्फ शुभचिंतकों के दान से हो रहा है संघ के दिल्ली मुख्यालय, केशव कुंज का पुनर्निर्माण

अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: January 16, 2020, 2:39 PM IST
सिर्फ शुभचिंतकों के दान से हो रहा है संघ के दिल्ली मुख्यालय, केशव कुंज का पुनर्निर्माण
केशव कुंज का पुनर्निर्माण

नागपुर के बाद सामाजिक कार्यों के लिए सक्रियता को देखते हुए दिल्ली का केशव कुंज सबसे महत्वपूर्ण रहा है. इसी कारण अपने प्रचारकों, सामाजिक कार्य में लगे लोगों और शुभचिंतकों से अपील की गयी है कि वो इस नवरचना प्रकल्प के लिए उदार हृदय से दान और सहयोग करें.

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  • Last Updated: January 16, 2020, 2:39 PM IST
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नई दिल्ली. कैसा होगा केशव कुंज का नया स्वरूप? दो साल से निर्माण कार्य चल रहा है. इसे पूरा होने में अभी और कितना वक्त लगेगा इस रहस्य से परदा नहीं उठा है. पर इतना तो साफ है कि बदलते वक्त के साथ बदलते संघ की जरुरतों पर खरा उतरेगा. आरएसएस के पहले सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के नाम से बना केशव कुंज साल 1946 से ही संघ के प्रचारकों और सामाजिक कार्य कर रहे कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्थल रहा है. नागपुर के बाद सामाजिक कार्यों के लिए सक्रियता को देखते हुए दिल्ली का ये भवन सबसे महत्वपूर्ण रहा है. इसी कारण अपने प्रचारकों, सामाजिक कार्य में लगे लोगों और शुभचिंतकों से अपील की गयी है कि वो इस नवरचना प्रकल्प के लिए उदार हृदय से दान और सहयोग करें.

इन तरीकोंं से किया जा सकता है डोनेशन
इसके लिए केशव स्मारक समिति के नाम से ऑनलाईन डोनेशन दे सकते हैं या फिर श्री केशव स्मारक समिति (बिल्डिंग निर्माण) के नाम पर चेक जमा किया जा सकता है. खास बात ये कि इसमें सहयोग के लिए दी गयी राशि आयकर की धारा संख्या 80जी और 12ए में टैक्स फ्री होगी. खास बात ये है कि इस निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की सरकारी मदद नहीं ली जा रही है. सूत्र के मुताबिक लाखों की संख्या में संघ के शुभचिंतकों के योगदान से समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणा देने वाले इस केन्द्र का निर्माण होगा.

ऐसे शुरू हुआ निर्माण कार्य

दिल्ली के झंडेवाला इलाके में प्रसिद्ध माता मंदिर बनवाने वाले सेठ बद्री भगत ने 1946 में मंदिर के पास 4 एकड़ का ये परिसर संघ के दूसरे सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर को दान में दिया था. 1960 की शुरुआत में संघ संस्थापक हेडगेवार की स्मृति में केशव कुंज में निर्माण का थोड़ा काम हुआ, उसके बाद शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरे समाज सेवा के काम चलते रहे. इन कार्यों के बढ़ते विस्तार के कारण संघ नेतृत्व के लिए जरुरी हो गया था कि मौजुदा जरुरतों और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए केशवकुंज को नए सिरे से बनाया जाए. इसलिए पूराने भवन को जमींदोज करने के बाद एक आधुनिक भवन का निर्माण शुरू हुआ.

ये सुविधाएं होंंगी नए भवन में
केवकुंड नवरचना प्रकल्प का आर्किटेक्चर पारंपरिक भारतीय स्थापत्य के आधार पर है. प्राचीन भारतीय प्रवेश द्वारों की तरह भवन के निचले भाग में स्तंभों का निर्माण किया जाएगा और साथ ही झरोखों और छज्जों का प्रयोग भी किया जाएगा. निर्माण से जुड़े लोग बताते हैं, प्रचीन भारतीय परंपरा की तर्ज पर बन रहे इस भवन में ऱोशनी और हवा के लिए खासी वयवस्था रहेगी. यानि आधुनिक और प्राचीन भारतीय परंपरागत स्थापत्य कला का मिलाजुला रुप होगा. इसमें लाइब्रेरी, अध्ययन कक्षों के साथ साथ बौद्धिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के स्थान और एक विशाल सभागार भी होगा. जल संरक्षण और सौर उर्जा का विशेष ध्यान रख कर इस भवन को पर्यावरण के अनुरुप बनाने की कोशिश की गयी है. यानि देश विदेश से आने वाले लोग यहां आकर प्रेरणा ले सकें.नई इमारत की ऐसी है बनावट
सूत्र बताते हैं कि केशव कुंज का जो नवरचना प्रकल्प है उसमें नई इमारत में बेसमेंट और भूतल के अलावा 12 मंजिलें और होंगी. इसकी उंचाई टेरेस टॉप तक 56.7 मीटर होगी. पूरे क्षेत्र में निर्माण सिर्फ 15 फीसदी इलाके में होगा और बाकी भूखंड का 85 फीसदी खुला क्षेत्र होगा. खास बात ये है, इमारत के सामने 15 मीटर इलाका खुला होगा और बाकी सभी ओर 12 मीटर खुला स्थान होगा. पूराने केशव कुंज में 10 गाडियां गई नहीं की पूरा रास्ता जाम हो जाता था. अब नए निर्माण में इसका भी ध्यान रखा गया है. बैसमेंट में मेकैनिकल कार पार्किंग दो स्तरों तक होगी जिसमें कुल 492 कारें पार्क हो जाएंगी और ग्राउंड फ्लोर यानि भूतल पर 10 गाडियां पार्क हो सकेंगी यानि कुल मिलाकर केशव कुंज में अब 502 गाडिय़ां पार्क हो सकेगी.

पूरे काम का संचालन श्री केशव स्मारक समिति कर रही है जिसमें सहसरकारवाह सुरेश सोनी के साथ साथ संघ के वरिष्ठ प्रचारक राजेन्द्र गुप्ता और कुलभूषण आहुजा भी शामिल हैं.

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First published: January 16, 2020, 2:35 PM IST
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