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2024 की चुनावी जंग में ममता के हथियार होंगे फुटबॉल और खेला होबे, जानें क्या है प्लान

2024 की चुनावी जंग में ममता के हथियार होंगे फुटबॉल और खेला होबे, जानें क्या है प्लान

ममता बनर्जी की योजना अब खेला होबे और फुटबॉल की लोकप्रियता का इस्तेमाल कर 2024 में गोल ठोंकने की है. फाइल फोटो

ममता बनर्जी की योजना अब खेला होबे और फुटबॉल की लोकप्रियता का इस्तेमाल कर 2024 में गोल ठोंकने की है. फाइल फोटो

Mamata Banerjee फुटबॉल और खेला होबे को 2024 के चुनाव में हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकती हैं, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के चुनाव प्रचार में चाय पर चर्चा के साथ किया था.

    नई दिल्ली. बंगालियों को फुटबॉल पसंद है और कोलकाता से लेकर बंगाल (West Bengal) के किसी भी हिस्से में चले जाइए आपको बंगाली मानुष मोहन बागान या ईस्ट बंगाल फुटबॉल क्लब के फैन मिलेंगे. और वोट की राजनीति में बंगाल के राजनेताओं ने बंगालियों का दिल जीतने के लिए फुटबॉल की लोकप्रियता को भुनाने में कभी संकोच नहीं किया. सीपीआई (एम) ने स्थानीय फुटबॉल क्लबों और कई ‘पारा’ पर नियंत्रण हासिल किया और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 2021 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इसे अंजाम दिया. ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने इंडियन सुपर लीग में ईस्ट बंगाल क्लब को मदद करने के लिए आर्थिक फंड सहित कई बड़े ऐलान किए हैं. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी इस ‘खेल’ में हाथ आजमाया और बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने आर्थिक तंगी का सामना कर रहे इन क्लब्स के लिए फंड का वादा किया.

    इसी क्रम में टीएमसी ने अप्रैल-मई में हुए विधानसभा चुनावों के लिए अपना स्लोगन ‘खेला होबे’ रखा. तृणमूल कांग्रेस अब इसी नारे का उपयोग संसद में करने के साथ 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए भी इस्तेमाल कर रही है. यही खेला होबे के साथ फुटबॉल की एंट्री होती है. विधानसभा चुनाव के दौरान नंदीग्राम में जब ममता बनर्जी चोटिल हुईं तो टीएमसी के सांसदों और विधायकों ने तुरंत फुटबॉल के ऊपर ममता के चोटिल पैर के साथ पोस्ट जारी किया और नारा दिया खेला होबे… वहीं खेला होबे गाना लिखने वाले टीएमसी नेता देबांग्शु भट्टाचार्य का कहना है कि बंगाल ने दिखा दिया कि खेला हुआ. ये खेला अब 2024 में भी होगा. बीजेपी की विभाजनकारी नीतियों को फुटबॉल टक्कर देगी.

    ममता बनर्जी की योजना अब खेला होबे और फुटबॉल की लोकप्रियता का इस्तेमाल कर 2024 में गोल ठोकने की है. कोलकाता में एक कार्यक्रम में फुटबॉल बांटने के बाद ममता बनर्जी ने कहा, “मुझे पता है कि गेंद के साथ खेलते कैसे हैं.” ममता का ये संदेश बंगाल में गुटों में बंटी बीजेपी के लिए था.

    हालांकि ममता बनर्जी के सामने चुनौती कम नहीं हैं. पहला तो ये कि उन्हें विपक्षी पार्टियों को राजी करना होगा कि वह खेला करेंगी और जीतेंगी. हो सकता है कि सब लोग राजी ना हों, क्योंकि बंगाल का रण जीतकर ममता ने अपना कद तो बड़ा कर लिया है, लेकिन एक महिला के लिए जिसका ताल्लुक हिंदी पट्टी से नहीं है और जिसे यहां के राजनीतिक दांवपेच में खेलने का अनुभव नहीं है, उसके लिए खेल आसान नहीं होगा. यही वजह है कि दिल्ली में विपक्ष के नेताओं के साथ बातचीत और मेल मुलाकात के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए ममता ने कहा, ‘हर कोई नेता नहीं बन सकता और मैं बंगाल में खुश हूं. मैं चाहती हूं कि सभी लोग साथ आएं और मिलकर काम करें.’

    लेकिन, ममता बनर्जी एक कुटिल राजनेता हैं और वो खुद को खेल से अलग नहीं कर सकती हैं. ममता दूसरे विपक्षी दलों को यह बात भूलने नहीं देंगी कि उन्होंने बंगाल की जंग में बीजेपी को करारी मात दी है और वो एक बार फिर से ये करिश्मा दोहरा सकती हैं. इसलिए कोलकाता के कार्यक्रम में ममता ने कहा कि खेला होबे का नारा संसद में गूंज रहा है और सरकार कांप रही है.

    बीजेपी के लिए ममता का संदेश है कि वह 2024 में बंगाल की कहानी दोहरा सकती हैं और उन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता. यही वजह है कि उन्होंने दिल्ली का तीन दिवसीय दौरा किया है और कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के साथ मेल-मुलाकात की है. ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात में पेगासस जासूसी का मुद्दा भी उठाया और अब उनकी निगाह त्रिपुरा पर है, जोकि टीएमसी के मिशन नॉर्थ ईस्ट का अहम हिस्सा है. त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव 2023 में होने हैं, लेकिन ममता बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी को प्रभार सौंपते हुए खेल पहले ही शुरू कर दिया है. अभिषेक बनर्जी के लिए एक नेता के तौर पर बंगाल के बाहर यह पहला लिटमस टेस्ट है.

    वापस फुटबॉल पर लौटते हैं. सूत्रों का कहना है कि ममता बनर्जी फुटबॉल और खेला होबे को 2024 के चुनाव में हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकती हैं, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के चुनाव प्रचार में चाय पर चर्चा के साथ किया था. मोदी पर किए गए एक तंज ने बीजेपी को एक जिताऊ नारे के साथ एक ऐसी छवि दी, जिसका मतलब था कि एक व्यक्ति जो वंशवादी नहीं है, एलीट नहीं है, बल्कि एक विनम्र चायवाला है.

    सूत्रों का कहना है कि ममता की योजना फुटबॉल के बहाने पूरे देश का दौरा करने की है, ताकि पूरे विपक्ष को एकजुट किया जा सके. इसके तहत फुटबॉल का वितरण किया जाएगा और एक दूसरे को पास किया जाएगा, ताकि संदेश स्पष्ट रहे. 16 अगस्त को ममता बनर्जी 1980 के दशक में एक डर्बी मैच के दौरान मारे गए फुटबॉल खिलाड़ियों की याद में खेला दिवस मनाएंगी. इसी दिन से विपक्षी एकता के लिए ममता बनर्जी के नए प्रयासों की शुरुआत होगी.

    टीएमसी के कार्यकर्ताओं को खेलो होबे स्लोगन को पॉपुलर बनाने और पूरे देश में फैलाने के लिए कहा गया है. खासतौर से उन राज्यों में जहां बीजेपी मजबूत है. टीएमसी की योजना राज्य विधानसभा चुनाव के दौरान फुटबॉल बांटने की है, ताकि लोगों को खेला होबे का संदेश दिया जा सके कि यह संभव है. लेकिन, विपक्ष के लिए यह आसान नहीं होगा. पहला इम्तिहान तो उत्तर प्रदेश है और अगर उत्तर प्रदेश में विपक्ष ने बीजेपी के खिलाफ गोल मार दिया तो खेला चालू आहे…

    Tags: 2024 Loksabha Election, BJP, CPIM, Football, Khela Hobe, Mamata banerjee, Narendra modi, TMC

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