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Kisaan Aandolan: किसान आंदोलन का तीसरा दिन आज, यहां पढ़ें 11 बड़े अपडेट्स

 (AP Photo/Altaf Qadri)
(AP Photo/Altaf Qadri)

Kisaan Aandolan: केंद्र द्वारा पास किए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलनरत हैं. शनिवार को उनके आंदोलन का तीसरा दिन था. यहां पढ़ें आज के किसान आंदोलन के बड़े 11 अपडेट्स

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 28, 2020, 2:41 PM IST
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नई दिल्ली/ चंडीगढ़. केंद्र सरकार द्वारा इस साल मानसून सत्र में पास किए गए तीन कृषि बिलों पर किसान आंदोलनरत हैं. शनिवार को किसान के आंदोलन का तीसरा दिन था. एक ओर जहां दिल्ली पुलिस ने किसानों को राष्ट्रीय राजधानी में एंट्री की परमिशन दे दी है तो वहीं आम आदमी पार्टी की सरकार ने बुराड़ी स्थित निरंकारी मैदान में उनके प्रदर्शन के लिए इंतजाम किए हैं. दूसरी ओर से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि किसान आंदोलन का रास्ता छोड़कर बातचीत के लिए आगे बढ़े.

आइए हम आपको बताते हैं कि किसानों के आंदोलन के तीसरे दिन क्या-क्या बड़े अपडेट हैं-
केंद्र द्वारा लागू तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत पंजाब के किसानों ने रात्रि विश्राम के बाद शनिवार को ‘दिल्ली चलो’ मार्च फिर से शुरू किया जबकि पहले ही हजारों किसान राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं तक पहुंच चुके हैं. हरियाणा पुलिस ने पंजाब से लगती सीमा और दिल्ली जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर से शुक्रवार शाम तक सभी अवरोधक हटा लिए थे.
सैकड़ों की संख्या में आंदोलनकारी, सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प और आंसूगैस के गोले एवं पानी की बौछार का सामना करने के बाद उत्तरी दिल्ली के एक मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए पहुंच चुके हैं जबकि हजारों की संख्या में किसान अब भी दिल्ली की सीमा पर मौजूद हैं और उन्होंने अभी यह फैसला नहीं लिया है कि वहीं प्रदर्शन करें या पुलिस द्वारा निर्धारित स्थल पर जाकर अपना विरोध दर्ज कराएं.
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली पहुंचने से रोके जाने के प्रयास को लेकर शनिवार को सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अहंकार’ ने जवान को किसान के खिलाफ खड़ा कर दिया है. पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने दावा किया कि दिल्ली आने वाले पूंजीपतियों के लिए लाल कालीन बिछाई जाती है, जबकि किसानों के आने पर रास्ते खोदे जा रहे हैं.
राहुल गांधी ने एक सुरक्षाकर्मी द्वारा किसान पर लाठी भांजने संबंधी एक तस्वीर साझा करते हुए ट्वीट किया, ‘बड़ी ही दुखद फ़ोटो है. हमारा नारा तो ‘जय जवान जय किसान’ का था लेकिन आज प्रधानमंत्री मोदी के अहंकार ने जवान को किसान के ख़िलाफ़ खड़ा कर दिया. यह बहुत ख़तरनाक है.’
प्रियंका गांधी ने ट्वीट के माध्यम से दावा किया, ‘भाजपा सरकार में देश की व्यवस्था को देखिए जब भाजपा के खरबपति मित्र दिल्ली आते हैं तो उनके लिए लाल कालीन डाली जाती है. मगर किसानों के लिए दिल्ली आने के रास्ते खोदे जा रहे हैं.’ उन्होंने सवाल किया, ‘दिल्ली किसानों के खिलाफ कानून बनाए वह ठीक, मगर सरकार को अपनी बात सुनाने किसान दिल्ली आए तो वह गलत?’
केंद्र द्वारा लागू कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसान शनिवार सुबह सिंघु बॉर्डर पर जमा हुए और बैठक की. इसमें उन्होंने प्रदर्शन के लिए उत्तर दिल्ली में स्थान निर्धारित करने के बावजूद सीमा पर ही विरोध-प्रदर्शन जारी रखने का फैसला किया.
किसानों से अपना आंदोलन समाप्त करने की अपील करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को कहा कि सरकार उनके साथ सभी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है. केन्द्र सरकार के नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के ‘दिल्ली चलो’ मार्च में शामिल हजारों किसान पानी की बौछार सामना और सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प करते शुक्रवार को दिली में प्रवेश करना शुरू कर दिया है.
इससे पहले तोमर ने कहा कि नए कृषि कानून, किसानों के जीवन में जबरदस्त सुधार लाएंगे. उन्होंने कहा कि विभिन्न किसान निकायों को तीन दिसंबर को चर्चा के लिए बुलाया गया है. तोमर ने प्रदर्शनकारी किसानों से अपनी हड़ताल समाप्त करने और बातचीत के लिए आगे आने की अपील की. मंत्री ने कहा, ‘सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है ....’
केंद्र द्वारा लागू तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली जाने पर अड़े हजारों किसान गत 24 घंटे से सिंघू बॉर्डर पर जमे हुए जिसकी वजह से करीब सात किलोमीटर लंबा जाम लग गया है. वहीं, सीमा पर जमे किसान दोपहर में बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे.
हरियाणा व दिल्ली पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर किसानों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोक रखा है. हालांकि,सरकार ने दिल्ली के बुराड़ी स्थित निरंकारी मैदान में प्रदर्शन की इजाजत दे दी है, लेकिन किसान वहां जाने को तैयार नहीं है और बॉर्डर पर जमे हुए है. किसानों के धरने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-44 पर से सिंघु राई बीसवां मील चौंक से बॉर्डर तक लगभग सात किलोमीटर लंबा भीषण जाम लगा है.
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली जाने की मांग को लेकर आगरा में धरना पर बैठीं नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर को शुक्रवार की शाम पांच बचे गंतव्य पर जाने की अनुमति दे दी गई.
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