भाजपा का जो हाल बंगाल में हुआ वहीं उत्तर प्रदेश में होगा, किसान मोर्चा ने तैयार की रणनीति: राकेश टिकैत

कृषि कानूनों के खिलाफ जारी आंदोलन में किसानों को संबोधित करते भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत. (पीटीआई फाइल फोटो)

कृषि कानूनों के खिलाफ जारी आंदोलन में किसानों को संबोधित करते भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत. (पीटीआई फाइल फोटो)

Farm Laws Kisan Aandolan: राकेश टिकैत ने कहा, 'जो भी पार्टी अपने घोषणा पत्र में तीनों नए कृषि कानूनों को सही ठहराएगी, किसान उसका सूपड़ा साफ करने का काम करेंगे.'

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जींद (हरियाणा). किसान मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि भाजपा का जो हाल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हुआ वहीं हाल आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव में भी होगा. उन्होंने जींद के उझाना गांव में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जो भी पार्टी अपने घोषणा पत्र में तीनों नए कृषि कानूनों को सही ठहराएगी, किसान उसका सूपड़ा साफ करने का काम करेंगे.


टिकैत ने कहा उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव से भी बुरा हाल भाजपा का विधानसभा चुनाव में होगा और इसके लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने रणनीति तैयार कर ली है. उन्होंने कहा कि जहां तक आंदोलन की सफलता की बात रही तो किसान सफल होने तक आंदोलन करेंगे, लेकिन हमें विश्वास है कि 2024 के बाद किसान आंदोलन नहीं करेंगे, क्योंकि तब तक तीनों कृषि कानून रद्द हो जाएंगे और कृषि उपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य ( एमएसपी) की गारंटी पर कानून बन जाएगा.


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गौरतलब है कि उझाना गांव में पिछले छह दिनों से एक किसान आग का घेरा बनाकर किसानों की मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहा था जिसे मनाने संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य उझाना गांव में पहुंचे थे. टिकैत ने बद्दोवाल टोल प्लाजा पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें चुनाव के दौरान अपनी ताकत दिखानी होगी क्योंकि उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड सहित कई राज्यों में चुनाव होने वाले हैं.


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उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार चुनाव की तैयारी करेगी, दूसरी तरफ हम सरकार को सबक सिखाने की तैयारी करेंगे. तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने और फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी देने की मांग के साथ पंजाब, हरियाणा और देश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों किसान कई दिनों से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं. केंद्र सरकार और किसान यूनियनों के बीच 10 से अधिक दौर की बातचीत गतिरोध खत्म करने में विफल रही है.

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