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किसान आंदोलन: सरकार से बातचीत के पहले राकेश टिकैत बोले- सुप्रीम कोर्ट कहे तो नहीं करेंगे रैली

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत (Naresh Tikait)
भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत (Naresh Tikait)

Kisan Anodlan: किसान संगठनों का एक छोटा समूह गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर मार्च निकालने की योजना बना रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 15, 2021, 3:34 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र द्वारा मानसून सत्र में पास किए गए विवादित तीन कृषि कानूनों (Kisan Andolan) के विरोध में दिल्ली की सीमाओं को घेरकर प्रदर्शन कर रहे किसानों की योजना है कि वह आगामी गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली निकालेंगे. हालांकि अब किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट कहे तो वह ऐसा नहीं करेंगे. टिकैत ने दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में सरकार से साथ नौवीं दौर की वार्ता से पहले यह बयान दिया. उन्होंने ट्रैक्टर रैली से जुड़े एक सवाल पर कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट कहे तो ट्रैक्टर रैली नहीं निकाली जाएगी.

इससे पहले टिकैत ने संवाददाताओं से कहा, 'सरकार को गतिरोध दूर करने के लिए कानूनों को वापस लेना चाहिए और इसके साथ ही एमएसपी गारंटी पर कानून बनाना चाहिए.' गौरतलब है कि किसानों और सरकार के बीच शुक्रवार को नौवीं दौर की बैठक 2 बजे होनी है.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अगले आदेश तक नए कृषि कानूनों के लागू करने पर रोक लगा दी और दिल्ली के बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों की यूनियनों और केंद्र सरकार के बीच गतिरोध को हल करने के लिए चार सदस्यीय समिति गठित करने का फैसला किया.




'सरकार की हमारी समस्या सुलझाने की कोई अच्छी मंशा नहीं'
दूसरी ओर सरकार और किसानों की वार्ता पर भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहां) के नेता जोगिंदर सिंह उग्राहां ने कहा, ‘हम सरकार के साथ बातचीत करेंगे. हमें शुक्रवार की बैठक से ज्यादा उम्मीद नहीं है, क्योंकि सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पैनल का हवाला देगी. सरकार की हमारी समस्या सुलझाने की कोई अच्छी मंशा नहीं है.’

जोगिंदर सिंह ने कहा कि किसान संघों को कोई समिति नहीं चाहिए. उन्होंने कहा, ‘हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए और हमारे फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दी जाए.’

एक अन्य किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि सरकार को पता है कि अदालत कानूनों को रद्द नहीं कर सकती है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को 28 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ बंद करना चाहिए.

न्यायालय ने प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली के खिलाफ दायर याचिका पर नोटिस जारी किया
वहीं सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को केंद्र की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया, जिसमें गणतंत्र दिवस समारोहों को बाधित करने के लिए 26 जनवरी के दिन प्रस्तावित ट्रैक्टर या ट्रॉली मार्च या किसी अन्य तरह के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई है.

दिल्ली पुलिस के मार्फत दायर याचिका में केंद्र ने कहा है कि गणतंत्र दिवस समारोहों को बाधित करने के लिए प्रस्तावित किसी भी मार्च या प्रदर्शन से ‘‘देश को शर्मिंदगी’ उठानी पड़ेगी.

इसने कहा कि प्रदर्शन करने के अधिकार में कभी भी ‘वैश्विक स्तर पर देश को शर्मिंदा करना’ शामिल नहीं है और शीर्ष अदालत से आग्रह किया कि किसी को भी किसी तरह के प्रदर्शन मार्च से रोका जाए चाहे वह ट्रैक्टर मार्च हो, ट्रॉली मार्च हो, वाहन मार्च हो या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में घुसने के लिए कोई अन्य तरीका हो.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने आवेदन पर नोटिस जारी किया और कहा कि इसे किसान संगठनों के पास भेजा जाए, जो नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं. पीठ ने कहा कि नोटिस जारी किया जाए. पीठ में जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी. रामासुब्रमणियन भी शामिल थे.
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