अपना शहर चुनें

States

Kisan Andolan: किसान और सरकार के बीच 10वीं बैठक से पहले RSS के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी बोले- कोई बीच का रास्ता खोजें

भैया जी जोशी की फाइल फोटो
भैया जी जोशी की फाइल फोटो

Farmers Protest: तीन कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ किसान करीब 55 दिनों से आंदोलित हैं. सरकार और किसानों के बीच 9 दौर की वार्ता हो चुकी हैं. आज 10वें दौर की वार्ता होनी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2021, 7:59 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. केंद्र द्वारा पास किए गए तीन कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ किसान करीब 55 दिनों से आंदोलित (Farmers Protest) हैं. सरकार और किसानों के बीच 9 दौर की वार्ता हो चुकी हैं. बुधवार को 10वें दौर की वार्ता होनी है. किसानों की मांग है कि तीनों कानून वापस लिये जायें, वहीं सरकार का कहना है कि किसान उनके समक्ष इसके अलावा कोई विकल्प पेश करें.

इस बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह यानी महासचिव सुरेश जोशी (भैया जी Suresh Bhaiya Jee Joshi) ने कहा है कि दोनों पक्षों को एक जमीन पर आना होगा. सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के मातृसंगठन के महत्वपूर्ण शख्स की ओर से आई टिप्पणी का महत्व उस वक्त बढ़ जाता है जब सरकार इस आंदोलन से निकलने का रास्ता खोज रही है.

आंदोलन चलते हैं और वे समाप्त भी होते हैं- जोशी
जोशी ने कहा कि 'लोकतंत्र दोनों पक्षों को एक अवसर प्रदान करता है. मैं दोनों पक्षों को उनकी जगह सही मानता हूं. आंदोलनकारियों को इस बात पर विचार करना चाहिए कि संवाद के माध्यम से जो कुछ भी उन्हें मिल सकता है, उन्हें स्वीकार करना चाहिए. सरकार को सोचना चाहिए कि वह और क्या दे सकती है. आंदोलन चलते हैं और वे समाप्त भी होते हैं.'




अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस को दिये एक इंटरव्यू में जोशी ने कहा कि 'इसलिए वह जगह खोजना जरूरी है जहां दोनों पक्ष सहमत हो सकते हैं और आंदोलन खत्म हो. लंबे समय तक चलने वाला कोई भी आंदोलन फायदेमंद नहीं है. किसी को भी आंदोलन करने से कोई समस्या नहीं होनी चाहिए, लेकिन बीच का रास्ता होना चाहिए. एक आंदोलन न केवल इससे जुड़े लोगों को प्रभावित करता है, बल्कि समाज को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है. किसी भी आंदोलन को बहुत लंबे समय तक चलाना समाज के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है. इसलिए एक बीच का रास्ता खोजकर दोनों पक्षों को उस सहमत होना चाहिए.'

उन्होंने कहा 'जब भी कोई चर्चा होती है तो यह तर्क नहीं दिया जा सकता है कि किसी की मांगों का कोई बीच का रास्ता नहीं है. सरकार बार-बार कह रही है कि हम चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन (प्रदर्शनकारी) कह रहे हैं कि कोई भी चर्चा कानूनों के निरस्त करने के बाद ही होगी. ऐसे में चर्चा कैसे होगी.'

भैयाजी जोशी ने कहा कि 'मेरा मानना है कि किसानों को उन मुद्दों पर सरकार के साथ चर्चा करनी चाहिए जिसे लेकर वह आंदोलित हैं . दोनों पक्षों से सकारात्मक पहल होनी चाहिए. अगर आंदोलनकारी भी सकारात्मक रुख अपनाते हैं तो यह अच्छा होगा.'
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज