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Kisan Bharat Bandh: कृषि कानून वापस लेने से इनकार, किसानों को आज लिखित प्रस्ताव देगी सरकार

सरकार वापस नहीं लेगी कृषि कानून, कल होने वाली छठे दौर की बैठक स्‍थगित (फोटो साभार-ANI)
सरकार वापस नहीं लेगी कृषि कानून, कल होने वाली छठे दौर की बैठक स्‍थगित (फोटो साभार-ANI)

Kisan Bharat Bandh Highlights: अमित शाह के साथ हुई बैठक के बाद हन्नान मुल्ला ने कहा, 'हम बुधवार को सरकार के साथ होने वाली वार्ता में शामिल नहीं होंगे. सरकार कृषि कानूनों को रद्द करने को तैयार नहीं है.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 9, 2020, 6:49 AM IST
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नई दिल्‍ली. कृषि कानूनों (Farm Laws) पर मंगलवार देर शाह गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) और 13 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक हुई. हालांकि ये बातचीत भी बेनतीजा रही. बैठक के बाद अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव एवं माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य हनन मुल्ला ने कहा कि सरकार जो संशोधन करना चाहती है वह उसे लिखित में देगी और हम तीनों कानूनों को निरस्त करना चाहते हैं. बीच का कोई रास्ता नहीं है. हन्नान मुल्ला ने कहा, 'शाह के साथ बैठक में मौजूद सभी 13 यूनियनों ने कानूनों को रद्द करने की मांग की, अन्य के साथ चर्चा करके हम अगले दौर की वार्ताओं के संबंध में निर्णय करेंगे.' अमित शाह के साथ हुई बैठक के बाद हनन मुल्ला ने कहा, 'हम बुधवार को सरकार के साथ होने वाली वार्ता में शामिल नहीं होंगे. सरकार कृषि कानूनों को रद्द करने को तैयार नहीं है.'

किसान नेताओं और सरकार के बीच आज छठे दौर की बातचीत प्रस्तावित
नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के नेताओं के साथ सरकार की छठे दौर की वार्ता बुधवार को होना प्रस्तावित है. इससे एक दिन पहले आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गतिरोध को तोड़ने के लिए चुनिंदा किसान नेताओं से बात की. कल तीन केंद्रीय मंत्री- कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, खाद्य मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री सोमप्रकाश प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही भारतीय किसान यूनियन सहित 40 किसान संगठनों के नेताओं से एक बार फिर बातचीत प्रस्‍तावित है. हालांकि किसान नेता हनन मुल्ला ने कहा कि किसानों और सरकार के बीच आज कोई बैठक नहीं होगी. किसानों के आज के 'भारत बंद' को ट्रेड यूनियनों, अन्य संगठनों और कांग्रेस सहित 24 विपक्षी दलों का समर्थन मिला.

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सरकार और किसानों के बीच हुई पांच दौर की वार्ता में कोई सफलता नहीं मिली है, ऐसे में छठे दौर की वार्ता को लेकर काफी उम्मीदें थीं. सरकार कानूनों में संशोधन की इच्छा जता चुकी है और कई तरह के आश्वासन भी दे चुकी है, लेकिन किसान संगठन नए कृषि कानूनों को पूरी तरह वापस लिए जाने की मांग पर अड़े हैं.

इस बीच, सात दिसंबर को हरियाणा से 20 प्रगतिशील किसानों के एक समूह ने सरकार को एक ज्ञापन देकर मांग की थी कि सरकार प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों के सुझाव के अनुरूप संशोधनों पर विचार करे, लेकिन कानूनों को निरस्त न करे. केंद्र ने आश्वासन दिया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य और मंडी प्रणाली जारी रहेगी.
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