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Kisan Andolan: पंचायत चुनाव से पहले जाट वोटरों को मनाने में बीजेपी के छूट रहे पसीने- रिपोर्ट

इस बार के पंचायत चुनावों में कृषि कानून को लेकर गुस्‍सा साफ दिखाई दे रहा है.
इस बार के पंचायत चुनावों में कृषि कानून को लेकर गुस्‍सा साफ दिखाई दे रहा है.

बीजेपी (BJP) के कई नेताओं ने कृषि कानून (Agricultural Law) को लेकर किसानों की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की. हालांकि किसानों के विरोध प्रदर्शन ने साफ कर दिया कि बीजेपी के इस बार पंचायत चुनाव (Panchayat elections) की राह आसान नहीं होगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 22, 2021, 9:53 AM IST
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नई दिल्‍ली. भारतीय किसान यूनियन (Bharatiya Kisan Union) के नेता नरेश टिकैत द्वारा उत्तर प्रदेश में भाजपा (BJP) के सामाजिक बहिष्कार का सुझाव दिए जाने के कुछ दिनों बाद ही बीजेपी के एक सांसद, विधायक और पार्टी के कई नेताओं ने शामली के लिसाड़ गांव का दौरा किया. इस दौरान बीजेपी के इन नेताओं ने कृषि कानून (Agricultural Law) को लेकर किसानों की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की. हालांकि किसानों के विरोध प्रदर्शन ने साफ कर दिया कि बीजेपी के इस बार पंचायत चुनाव (Panchayat elections) की राह आसान नहीं होगी.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि कानून को लेकर किसानों के बीच भाजपा को लेकर गुस्सा बढ़ता जा रहा है. इसका एक नजारा उस समय देखने को मिला जब मुजफ्फरनगर के सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री संजीव बाल्यान और बुलढाणा के विधायक उमेश मलिक अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैसवाल गांव पहुंचे. इस दौराना किसानों ने बाल्यान मुर्दाबाद और 'किसान एकता ज़िंदाबाद' के नारे लगाए. गांवों के बार लगे साइन बोर्ड बता रहे हैं कि किसानों के अंदर कृषि कानून और बीजेपी के प्रति कितना आक्रोश है. गांव के बाहर लगे साइन बोर्ड पर लिखा है, भारतीय किसान यूनियन जिंदाबाद, बीजेपी वालों का इस गांव में आना सख्‍त मना है.

भाजपा जिला पंचायत चुनाव में एक बार फिर जाट मतदाताओं को रिझाने की कोशिश कर रही है. इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि पिछली बार के चुनाव में बीजेपी ने 26 में से 25 सीटें हासिल की थीं, जिसमें से 18 उम्‍मीदवार जाट समुदाय से आते हैं. बीजेपी को पता है कि किसी भी चुनाव को जीतने में जाट समुदाय अहम रोल अपनाते हैं इसलिए वह इन्‍हें अपने खिलाफ नहीं करना चाहती है.
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लिसाड, जहां पर रविवार को भाजपा नेताओं ने दौरा किया था वह खाप पंचायत नेता बाबा हरिकिशन का पैतृक गांव है. इस इलाके में हरिकिशन को मानने वाले काफी संख्‍या में लोग मौजूद हैं. हरिकृष्ण ने कहा कि हमने बाल्यान और भूपेंद्र चौधरी (यूपी पंचायती राज मंत्री) को स्पष्ट रूप से कह दिया है कि केंद्र को कृषि कानून निरस्त करना चाहिए. हमने उन्हें यह भी बताया कि पिछले सीजन में भी गन्ना किसानों को उनके बकाए का भुगतान नहीं किया गया था. हालांकि बाल्‍यान ने कहा कि गांव में उनका किसी भी तरह का बहिष्‍कार नहीं किया गया है. उन्‍होंने कहा, हमने लोगों को आश्वासन दिया है कि हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी शिकायतों पहुंचाने की हर संभव कोशिश करेंगे.

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बता दें कि पश्चिम यूपी में कृषि कानून के विरोध में लगातार महापंचायत हो रही है. 29 जनवरी को मुजफ्फरनगर से शुरू इन महापंचायत में काफी संख्‍या में लोग पहुंच रहे हैं. इन महापंचायत में से एक दर्जन सभाओं को राष्ट्रीय जनता दल (आरएलडी) के नेता जयंत चौधरी ने कांग्रेस नेता प्रियंका के साथ संबोधित किया है. बताया जा रहा है कि 28 फरवरी को मेरठ में होने वाली महापंचायत में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी पहुंचने वाले हैं.
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