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Farmer Protest: कमेटी को लेकर उठ रहे सवालों पर SC सख्त, कहा- इन्हें नहीं दी कोई पावर

नए कृषि सुधार कानूनों की वापसी को लेकर किसान 56 दिन से आंदोलन कर रहे हैं.
नए कृषि सुधार कानूनों की वापसी को लेकर किसान 56 दिन से आंदोलन कर रहे हैं.

Kisan Andolan against Farms Law: प्रधान न्यायाधीश (CJI) एसए बोबडे ने सख्त लहजे में कहा कि अगर किसान कमेटी के सामने नहीं जाना चाहते, तो बेशक मत जाएं. मगर ऐसे किसी की भी छवि खराब न करें. इस तरह की ब्रांडिंग नहीं होनी चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2021, 7:20 PM IST
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नई दिल्ली. नए कृषि सुधार कानूनों की वापसी को लेकर किसान 56 दिन से आंदोलन (Kisan Andolan against Farms Law) कर रहे हैं. 26 जनवरी को किसानों की होने वाली ट्रैक्टर रैली को लेकर दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई हुई. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की बनाई गई एक्सपर्ट कमेटी पर भी सवाल उठाए गए. ऐसे में प्रधान न्यायाधीश (CJI) एसए बोबडे ने सख्त लहजे में कहा कि अगर किसान कमेटी के सामने नहीं जाना चाहते, तो बेशक मत जाएं. मगर ऐसे किसी भी छवि न खराब करें. इस तरह की ब्रांडिंग नहीं होनी चाहिए. सीजेआई ने एक बार फिर साफ किया कि कमेटी को कोई फैसला लेने की शक्ति नहीं दी गई है. इसे सिर्फ हमें राय देने के लिए बनाया गया है.

दरअसल, एक किसान यूनियन ने कोर्ट में बहस कर कमेटी के सदस्यों के बारे में पक्ष जानना चाहा, तो CJI ने कहा कि दुष्यंत दवे के मुवक्किल ने कमेटी के बनने से पहले ही कमेटी के सामने न जाने का फैसला किया था. आप कौन हैं? SG ने दवे से पूछने को कहा -दवे किस यूनियन की तरफ से पेश हो रहे हैं. वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि दवे तो 8 किसान यूनियनों की तरफ से पेश हो रहे हैं. दवे ने कहा कि किसान महापंचायत प्रदर्शनकारी यूनियनों में से नहीं है. प्रशांत भूषण ने कहा कि यूनियनों का कहना है कि हम कमेटी के समक्ष पेश नहीं होंगे.





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CJI ने कहा कि कमेटी को हमने फैसला करने का अधिकार नहीं दिया है. उसे सिर्फ किसानों की समस्याएं सुनने और हमें रिपोर्ट देने के लिए बनाया गया है. आप बिना सोचे समझे बयान देते हैं. किसी ने कुछ कहा तो वह अयोग्य हो गया? मान ने कानूनों को संशोधित करने के लिए कहा था. आप कह रहे हैं कि वे कानूनों के समर्थन में हैं.

ऐसे नहीं कर सकते ब्रांडिंग- CJI
सीजेआई ने सख्त लहजे में कहा- 'आप इस तरह के लोगों को ब्रांड नहीं कर सकते. लोगों की राय होनी चाहिए. यहां तक कि सबसे अच्छे न्यायाधीशों की भी कुछ राय होती है, जबकि वो दूसरी तरफ निर्णय भी देते हैं.'

इसके बाद किसान महापंचायत की तरफ से बहस शुरू हुई. भूपिंदर मान के कमेटी से हटने के बारे में बताया और कमेटी पर सवाल उठाया. CJI ने कहा कि अगर व्यक्ति किसी मामले में अपनी एक राय रखता है तो इसका मतलब क्या? कभी कभी जज भी राय रखते हैं, लेकिन सुनवाई के दौरान वो अपनी राय बदलकर फैसला देते हैं. कमेटी के पास कोई अधिकार नहीं है तो आप कमेटी पर पूर्वाग्रह का आरोप नहीं लगा सकते. CJI ने कहा कि अगर आप कमेटी के समक्ष पेश नहीं होना चाहते तो हम आपको बाध्य नहीं करेंगे.


मेंबर पर आरोप बर्दाश्त नहीं करेंगे

CJI ने कहा, 'पब्लिक ओपिनियन को लेकर अगर आप किसी की छवि को खराब करेंगे तो कोर्ट सहन नहीं करेगा. कमेटी के सदस्यों को लेकर इस तरफ चर्चा की जा रही है. हम केवल मामले की संवैधानिकता तय करेंगे.' सीजेआई ने कहा कि आप बहुमत की राय के अनुसार लोगों को बदनाम करते हैं. अखबारों में जिस तरह की राय दिखाई दे रही है, हमें खेद है.

CJI ने कहा कि कोर्ट ने किसी की नियुक्ति की है और उसको लेकर भी इस तरह की चर्चा है. फिर भी हम आपकी अर्जी पर नोटिस जारी करते है. AG को कहा कि आओ जवाब दाखिल करें. सुप्रीम कोर्ट समिति के सदस्यों को बदलने की अर्जी पर अदालत ने नोटिस जारी किया है.


इस पर सरकार के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि आप अपने आदेश में ये साफ कीजिये कि ये कमेटी कोर्ट ने अपने लिए बनाई है. अगर कमेटी के समक्ष कोई पेश भी नही होता तो भी कमेटी अपनी रिपोर्ट कोर्ट में देगी. इस पर CJI ने सख्त लहजे में कहा- 'हम कितनी बार यह साफ करें? कमेटी को कोई फैसला लेने की शक्ति भी नहीं दी गई है.'

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CJI ने कहा कि हम इस पर कुछ नहीं कहेंगे. प्रजातंत्र में एक तरफ से निरस्त करने के अलावा एक अदालत द्वारा रद्द किया जाता है और न्यायालय द्वारा इसे होल्ड कर लिया गया है, इसलिए अभी कुछ भी लागू नहीं है. भूषण ने कहा कि मान लीजिए की कोर्ट मामले की सुनवाई करते हुए बाद में कहता है कि कानून सही है और अपना आदेश वापस लेता है तो फिर क्या होगा?
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