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Kisan Andolan: सांसदों ने स्‍पीकर को लिखा खत, कहा- गाजीपुर बॉर्डर पर भारत-पाक सीमा जैसे हालात


सांसदों ने स्‍पीकर ओम बिरला को खत लिखकर किसान आंदोलन के हालात की जानकारी दी.

सांसदों ने स्‍पीकर ओम बिरला को खत लिखकर किसान आंदोलन के हालात की जानकारी दी.

Kisan Andolan:सांसदों की ओर से बताया गया है कि शिरोमणी अकाली दल, एनसीपी और तृणमूल कांग्रेस समेत कई पार्टियों के 15 सांसद गाजीपुर बॉर्डर (Ghazipur border) पर किसानों से बातचीत करने के लिए गए थे लेकिन उन्‍हें किसानों से मिलने ही नहीं दिया गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 5, 2021, 8:35 AM IST
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नई दिल्‍ली. कृषि कानून (Agricultural law) के विरोध में पिछले कई महीनों से दिल्‍ली के बॉर्डर पर आंदोलन (Kisan Andolan) कर रहे किसानों के संबंध में 10 विपक्षीय पार्टी के सांसदों ने लोकसभा अध्‍यक्ष ओम बिरला (Om Birla) को खत लिखा है. सांसदों ने अपने खत के माध्‍यम से लोकसभा स्‍पीकर को बताया है कि गाजीपुर बॉर्डर (Ghazipur Border) पर भारत-पाकिस्तान सीमा जैसे हालात पैदा हो गए हैं. किसानों की स्थिति जेल के कैदियों जैसी हो गई है. सांसदों की ओर से बताया गया है कि शिरोमणी अकाली दल, एनसीपी और तृणमूल कांग्रेस समेत कई पार्टियों के 15 सांसद गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों से बातचीत करने के लिए गए थे लेकिन उन्‍हें किसानों से मिलने ही नहीं दिया गया.

गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों से मिलने पहुंचीं शिरोमणी अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल के मुताबिक उन्‍हें और उनके साथ अन्‍य पार्टियों के सांसदों को प्रदर्शन स्थल जाने की इजाजत नहीं दी गई. बता दें कि हरसिमरत कौर बादल के साथ राकांपा की सुप्रिया सुले, द्रमुक की कोनिमोई और तिरूची शिवा, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय भी किसानों से मिलने गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे थे. उनके साथ नेशनल कॉन्फ्रेंस, आरएसपी और आईयूएमएल के सांसद भी थे.

सांसदों को किसानों से मिलने से रोके जाने के बाद पनपे विवाद के बाद गाजियाबाद पुलिस के अधिकारियों ने कहा है कि उन्होंने गाजीपुर में प्रदर्शन स्थल जाने से प्रतिनिधिमंडल को नहीं रोका. पुलिस महकमे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, सभी राजनीतिक दलों के नेता वहां आ रहे हैं और हम किसी को रोक नहीं रहे. उन्हें दूसरी तरफ (दिल्ली) रोका गया होगा. बता दें कि संसद में चर्चा के दौरान एक बार फिर विपक्षी दलों ने सरकार से तीना कृषि कानून वापस लेने की मांग की है. विपक्षी दलों ने सरकार से कहा है क‍ि वह प्रदर्शनकारी किसानों के साथ दुश्मनों जैसा बर्ताव करना बंद करे.
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किसान ने अगर शांति का रास्‍ता बदला तो बड़ा संकट पैदा हो जाएगा : पवार
किसान आंदोलन पर केंद्र सरकार के असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए राकांपा प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि अगर किसानों ने प्रदर्शन का शांतिपूर्ण रास्ता छोड़ दिया, तो देश में बड़ा संकट पैदा हो जाएगा और भाजपा सरकार इसके लिए जिम्मेदार होगी. बहुस्तरीय बैरिकैड और कंटीले तार लगाने तथा सड़कों पर कीलें ठोंके जाने को लेकर उन्होंने सरकार की आलोचना की और दावा किया कि ऐसा तो अंग्रेजों के शासन के दौरान भी नहीं हुआ था. पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के मुद्दे को सुलझाने के प्रति इच्छुक ही नहीं है. पवार ने कहा, वे समस्या को सुलझाना ही नहीं चाहते हैं. मैं चिंतित हूं कि आज जो किसान शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, अगर वे दूसरे रास्ते पर जाते हैं, तो यह एक बड़ा संकट बन जाएगा और भाजपा सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी.
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