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प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा: मांगें माने जाने तक नए साल का जश्न नहीं मनाएंगे

प्रदर्शनकारी किसान तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दिए जाने की मांग कर रहे हैं(सांकेतिक तस्वीर)
प्रदर्शनकारी किसान तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दिए जाने की मांग कर रहे हैं(सांकेतिक तस्वीर)

Kisan Andolan: केंद्र द्वारा मानसून सत्र में पास किए गए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से हजारों किसान राष्ट्रीय राजधानी की अलग-अलग सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शन में ज्यादातर किसान पंजाब और हरियाणा के हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 31, 2020, 9:32 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली (Delhi) के निकट सिंघु बॉर्डर (Singhu Border) पर एक महीने से अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा है कि केंद्रीय कृषि कानूनों (Farm Laws) को लेकर उनकी मांगें केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा स्वीकार किए जाने तक वे नए साल का जश्न (New Year Celebration) नहीं मनाएंगे. पंजाब (Punjab) के रोपड़ से आए किसान हरजिंदर सिंह ने कहा, ‘‘सरकार जब तक हमारी मांगें नहीं मान लेती, तब तक हमारे के लिए कोई नया साल नहीं है.’’

किसानों का कहना था कि बुधवार को हुई बातचीत में सरकार ने बिजली बिल (Electricity Bill) में बढ़ोतरी और पराली जलाने पर जुर्माना लगाने से जुड़ी चिंताओं का निदान करने का भरोसा दिया, लेकिन यह जश्न मनाने के लिए काफी नहीं है. उल्लेखनीय है कि प्रदर्शनकारी किसान तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी दिए जाने की मांग कर रहे हैं.

किसानों ने कहा- सरकार को सुननी होंगी हमारी मांगें
पंजाब के होशियापुर से पहुंचे हरमेश सिंह ने कहा, ‘‘सरकार जिन दो मांगों पर सहमत हुई है वो अभी कानून नहीं हैं. अभी इनका असर नहीं होना था. हम सरकार के पास स्पष्ट मांगों के साथ गए हैं. वे अपने हिसाब से चीजें तय नहीं कर सकते. उन्हें हमारी सारी मांगों को सुनना होगा.’’
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सिंघु बॉर्डर पर मौजूदा ज्यादातर किसान लंबे समय से अपने परिवारों से दूर हैं और नए साल के मौके पर भी दूर रहेंगे, लेकिन उन्हें इससे कोई शिकायत नहीं है.

हरजिंदर ने कहा, ‘‘हमें अपने परिवार की याद आ रही है, लेकिन ये किसान भी हमारा परिवार हैं. ये सभी हमारे भाई हैं.’’

जालंधर के निवासी गुरप्रीत हैयर और भटिंडा के रहने वाले प्रताप सिंह ने फैसला किया है कि वह हर साल की तरह इस बार भी नववर्ष के अवसर पर ‘सेवा’ करेंगे, लेकिन इस बार वे किसान के बीच करेंगे.

नोएडा में भी जारी रहा प्रदर्शन
वहीं केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए कृषि कानूनों के विरोध में नोएडा में विभिन्न स्थानों पर किसानों का धरना प्रदर्शन गुरुवार को भी जारी रहा. नोएडा के चिल्ला रेगुलेटर बॉर्डर पर बृहस्पतिवार को भी 11 किसानों ने सांकेतिक भूख हड़ताल की. वहीं दलित प्रेरणा स्थल पर धरने पर बैठे किसानों ने आगामी रूपरेखा बनाई.

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चिल्ला रेगुलेटर बॉर्डर पर चल रहे धरने को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन (भानू) के प्रदेश अध्यक्ष योगेश प्रताप ने कहा, ‘‘किसानों का मनोबल टूटने वाला नहीं है. किसान किसी भी कीमत पर कृषि विधेयकों को मंजूर नहीं करेंगे और इन्हें वापस करा कर ही दम लेंगे.’’

वहीं दलित प्रेरणा स्थल पर धरने पर बैठे भारतीय किसान यूनियन (लोक शक्ति) के पदाधिकारियों ने भी एक स्वर में कहा कि मांगें पूरी होने तक धरना जारी रहेगा.
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