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Kisan Andolan: कृषि कानूनों के खिलाफ 19वीं सदी के गीत का हुआ पंजाबी अनुवाद, राहुल गांधी ने किया ट्वीट

 (PTI Photo/Vijay Verma)
(PTI Photo/Vijay Verma)

'बेला चाओ' गीत 19वीं सदी के अंत में तब अस्तित्व में आया था जब उत्तरी इटली में महिला किसानों ने कामकाज की खराब स्थितियों के विरोध में इसे अपना हथियार बनाया था. अब किसान आंदोलन में भी इसका इस्तेमाल हो रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 26, 2020, 10:43 AM IST
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नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन (Kisan Andolan) को एक महीने से ज्यादा का वक्त हो गया है. अब तक सरकार और किसानों के बीच पांच दौर की वार्ता भी हो चुकी है लेकिन कोई समाधान नहीं निकला है. फिलहाल सरकार ने छठें दौर की वार्ता के लिए किसानों से पत्राचार किया था जिस पर शनिवार को फैसला हो सकता है.

कांग्रेस ने किसान आंदोलन को पूरा समर्थन दिया हुआ है. शनिवार को पार्टी के नेता राहुल गांधी (Congress) ने आंदोलनकारियों द्वारा बनाया गया एक गाना ट्वीट किया. गाने का वीडियो ट्वीट कर राहुल ने लिखा- 'मिट्टी का कण-कण गूंज रहा है, सरकार को सुनना पड़ेगा.'

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने जो वीडियो ट्वीट किया है उसमें किसानों के आंदोलन की अलग-अलग झलकियां दिखाने के साथ ही सरकार से कहा गया है कि वह तीनों कृषि कानून वापस लें. गौरतलब है कि दुनियाभर में विरोध करने के लिए पहचाने जाने वाले गीत ‘बेला चाओ’ को 27 वर्षीय पूजन साहिल ने केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए पंजाबी भाषा में जारी किया है.





किसान प्रदर्शन: अब पंजाबी भाषा में आया गीत ‘बेला चाओ’
वीडियो प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर जारी किए गए इस गीत के वीडियो को एक सप्ताह से कम समय में 2.7 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं और कई सोशल मीडिया मंचों पर भी यह वायरल हो गया है.

दिल्ली के एक स्कूल में गणित पढ़ाने वाले साहिल ने कहा कि ‘भय, दुर्व्यवहार और निराशा’ सामाजिक रूप से जागरूक किसी संगीतकार के लिए सही नहीं हैं. अगर उनके शब्द पिछले एक महीने से प्रदर्शन कर रहे हजारों किसानों को ताकत दें तो इससे सुकूल मिलता है.

साहिल नेकहा, ‘मैंने अपने गीत के लिए कुछ मापदंड तय किए थे. जैसे ही मुझे यूट्यूब पर ‘कमेंट’ में गालियां पड़ने लगीं तो मुझे समझ आ गया कि यह थोड़ा मशहूर हो गया है....’ ‘बेला चाओ’ गीत को संशोधित नागरिकता कानून विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हिंदी भाषा में भी जारी किया गया था.

यह गीत 19वीं सदी के अंत में तब अस्तित्व में आया था जब उत्तरी इटली में महिला किसानों ने कामकाज की खराब स्थितियों के विरोध में इसे अपना हथियार बनाया था.
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