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Kisan Andolan News: बुआई का सीजन खत्म, अब यूपी और उत्तराखंड के किसानों का भी दिल्ली कूच

यूपी और उत्तराखंड के किसान भी अब गाजीपुर बॉर्डर पहुंचने लगे हैं.
यूपी और उत्तराखंड के किसान भी अब गाजीपुर बॉर्डर पहुंचने लगे हैं.

Kisan Andolan: केंद्र सरकार (Central Government) की तीन कृषि कानून (Agricultural Law) का विरोध कर रहे किसानों (Farmers) का कहना है कि पिछले पांच दिनों में 1000 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां यहां पहुंचने के बाद हमारा आंदोलन 10 गुना बढ़ गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 28, 2020, 9:58 AM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन कृषि कानून (Agricultural Law) का विरोध कर रहे पंजाब और हरियाणा के किसानों को अब यूपी (Uttar Pradesh) और उत्तराखंड (Uttarakhand) के किसानों का भी साथ मिलने लगा है. पिछले एक महीने से ज्यादा समय से दिल्ली के बॉर्डर (Delhi Border) पर डटे किसानों का साथ देने के लिए अन्य राज्यों के किसान भी गाजीपुर बॉर्डर (Ghazipur Border) पहुंचने लगे हैं. बता दें कि गेहूं और मटर की बुआई करने के बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के हजारों किसान अब अपना गृहनगर छोड़कर गाजीपुर सीमा पर विरोध प्रदर्शन के लिए जमा होने लगे हैं.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि पिछले पांच दिनों में 1000 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां यहां पहुंचने के बाद हमारा आंदोलन 10 गुना बढ़ गया है. दिल्ली की सीमा पर किसानों के जमावड़े का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बॉर्डर के अंत तक किसानों के टेंट लगे हुए हैं. यूपी पुलिस के एक सिपाही के मुताबिक पिछले 10 दिनों में प्रदर्शनकारियों की संख्या लगभग 5,000 से 20,000 हो गई है.

गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने पहुंच रहे यूपी और उत्तराखंड के किसानों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. उत्तराखंड के रुद्रपुर के सिमरनजीत सिंह (30) के मुताबिक पुलिस के रोकने के बाद उन्हें कई बार अपना रास्ता बदलना पड़ा. उन्होंने बताया, हमारी टोली ने 25 दिसंबर को सुबह 6 बजे रुद्रपुर छोड़ दिया था. हम रामपुर के रास्ते आने वाले थे, लेकिन हमें पता था कि हमें भी वहीं रोक दिया जाएगा. इसलिए हम बिलासपुर, पटवाई और शाहाबाद से गुजरे और आधी रात के आसपास यहां पहुंचे. सिंह ने कहा कि उनका और उनके जिले के अन्य लोगों का फसल काटने तक कोई इरादा नहीं है, वह बताते है कि 30,000 से अधिक किसानों के 30-31 दिसंबर तक गाजीपुर पहुंचने की उम्मीद है.
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उत्तर प्रदेश के बिलासपुर के रहने वाले प्यारे सिंह (55) ने कहा कि 60-70 किसानों को मुरादाबाद के पास रोका गया और 22 दिसंबर को वापस भेज दिया गया. उन्होंने बताया, हमने 25 दिसंबर को बुलंदशहर के रास्ते एक नया रास्ता चुना और उसी रात यहां पहुंच गए. उन्होंने बताया कि रास्ते में केवल पगड़ी पहनने लोगों को ही रोका जा रहा है.

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किसानों की मदद के लिए बढ़ रहे हाथ
जैसे-जैसे किसानों का विरोध प्रदर्शन बड़ा हो रहा है वैसे वैसे आंदोलन का समर्थन करने वाले मददगारों की संख्या भी बढ़ रही है. रविवार को यूपी के पीलीभीत के गुरसेवक सिंह (23) ने शैम्पू, साबुन, सर्दियों के कपड़े और गर्म कंबल वितरित किए. इस तरह मेडिकल स्टूडेंट बनीं सेवादार ने कहा, मैं सिंघू और टिकरी में सेवा कर रही थी, मैंने महसूस किया कि यहां लोगों को हमारी काफी जरूरत है. उन्होंने कहा कि हर दिन 700 से अधिक किसान कंबल मांगते हैं. ठंड को दूर करने के लिए, कई गुरुद्वारा समितियों द्वारा देसी गीजर भी वितरित किए जा रहे हैं.
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