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Kisan Andolan: सिंघु बॉर्डर पर दो किसान संगठनों में छिड़ी 'जंग', जानें मौजूदा हाल

सिंघू सीमा पर बैरिकेड्स लगाती पुलिस. (AP Photo/Manish Swarup)
सिंघू सीमा पर बैरिकेड्स लगाती पुलिस. (AP Photo/Manish Swarup)

Kisan Andolan: 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद किसानों में गुस्सा है. सिंघु सीमा पर दो किसान संगठन आमने-सामने आ गए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 28, 2021, 4:52 PM IST
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नई दिल्ली. कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के दो संगठनों के बीच की लड़ाई अब सबके सामने आ गई है. संयुक्त किसान मोर्चा और किसान संघर्ष समिति, सिंघु सीमा पर दो अलग-अलग मंचों से आंदोलन कर रहे हैं. हिंसक ट्रैक्टर परेड के अगले दिन बुधवार को दोनों संगठनों ने खुले स्वर में लक्खा सिधाना और दीप सिद्धू पर निशाना साधा. एसकेएम ने हिंसा के लिए सिद्धू और केएमएससी दोनों को दोषी ठहराया. भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा, 'सरकार ने हमारे आंदोलन में तोड़फोड़ करने के लिए उनसे हाथ मिलाया. सिद्धू ने राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया और हमारी और पूरे देश की भावनाओं को चोट पहुंचाई.'

किसान मजदूर संघर्ष समिति (KMSC) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सविंदर सिंह चौटाला ने कहा 'दीप सिद्धू ने कई किसानों को आउटर रिंग रोड से लाल किले तक पहुंचाया. उन्होंने लाल किले से झंडा फहराने वाले व्यक्ति का सम्मान किया. वह हर परेशानी की वजह बने.'





'किसान ने कहा- हम देश द्रोही और कायर कहलाएंगे'
सिंघु किसानों के विरोध स्थलों का सबसे प्रमुख स्थान है. अन्य विरोध प्रदर्शन की जगहों से पहले रैली यहां से रवाना हुई. पहली हिंसा यहां के किसानों द्वारा शुरू की गई थी. लाल किले पर पहुंचे ज्यादातर प्रदर्शनकारी सिंघु के थे. बुधवार को अधिकांश किसानों ने कहा कि उन्हें हिंसा का पछतावा है लेकिन वह अपना आंदोलन जारी रखेंगे. केवल वे ही वापस गए जो ट्रैक्टर रैली के लिए विशेष आए थे. चौटाला ने कहा हमने अपने गांवों के और किसानों से कहा है कि वह हमसे जुड़ें.'

दो महीने से सिंघु सीमा पर आंदोलन कर रहे कई किसानों ने रैली के बाद कुछ दिनों के लिए घर लौटने की योजना बनाई थी लेकिन अब इस प्लान को रद्द कर दिया गया है. एसकेएम के सदस्य धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि 'अगर हम बिना जीत के लौटे तो हमें देशद्रोही और कायर करार दे दिया जाएगा.'

'सिद्धू ने उकसाया'
बुधवार को, सिद्धू और सिधाना किसानों के निशाने पर थे. एसकेएम के मंच से 'दीप सिद्धू मुर्दाबाद, लखा सिधाना मुर्दाबाद' कहा गया. कुछ समूहों ने नारेबाजी करते हुए मार्च निकाला जिसमें उन्होंने सिद्धू को 'गद्दार' कहा. किसानों ने आरोप लगाया कि सोमवार शाम को दोनों ने SKM के मंच पर कब्जा कर लिया और किसानों को पूर्व निर्धारित मार्ग के बजाय आउटर रिंग रोड पर मार्च करने के लिए उकसाया. चश्मदीद धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि 'मंच से, सिद्धू ने भीड़ से पूछा कि वे क्या चाहते हैं. भीड़ ने कहा कि वे रिंग रोड जाना चाहते हैं. इसके बाद सिद्धू ने उन्हें आगे जाने के लिए उकसाया.'

जम्मू के एक किसान मनदीप सिंह ने कहा- 'दो महीने से हम यहां शांति से बैठे हैं, लेकिन हम निराश थे. हम दिल्ली जाना चाहते थे. लेकिन हमने हिंसा शुरू नहीं की. जब पुलिस ने हमें मारना शुरू किया, तो हमने जवाब दिया.'  किसानों ने कहा कि उन्होंने किसी शरारती तत्वों को मंच पर जाने से रोकने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी है. धर्मेंद्र सिंह ने कहा 'पहले दो सिक्योरिटी लेयर्स थीं. अब तीन हो गई हैं.'

SKM द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वराज इंडिया के संस्थापक योगेंद्र यादव ने सवाल किया कि KMSC को बैरिकेड के बाहर पुलिस द्वारा अलग जगह और मंच क्यों दिया गया? उनका आरोप है कि संगठन, सरकार से मिला हुआ है. दूसरी ओर पुलिस ने धरना स्थल पर नए बैरिकेड्स लगाए हैं. साथ ही सिंघु गांव की एंट्री वाले रास्ते पर रोक लगा दी है जिसका इस्तेमाल हरियाणा जाने के लिए होता था.
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