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किसान आंदोलन: लक्खा सिंह का दावा, बातचीत के दौरान भावुक हो गए कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर

गुरुवार को  किसान संगठन और सरकार की बीच नानकसर सम्प्रदाय के जुड़े बाबा लक्खा सिंह ने मध्यस्थता की पेशकश  करते हुए बातचीत की.  (फोटो- ANI)
गुरुवार को किसान संगठन और सरकार की बीच नानकसर सम्प्रदाय के जुड़े बाबा लक्खा सिंह ने मध्यस्थता की पेशकश करते हुए बातचीत की. (फोटो- ANI)

Farmers Agitation: सरकार और नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी किसान संगठन शुक्रवार को होने वाली आठवें दौर की अपनी वार्ता से एक दिन पहले गुरुवार को अपने-अपने रुख पर अड़े रहे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 8, 2021, 6:04 PM IST
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चंडीगढ़/नई दिल्ली. दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन (Farmers Agitation) लगातार जारी है. आज सरकार और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच आठवें दौर की बातचीत होगी. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Agriculture Minister Narendra Singh Tomar) ने कहा है कि सरकार तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने के अलावा किसी भी प्रस्ताव पर विचार करने को तैयार है. इससे पहले गुरुवार को किसान संगठन और सरकार की बीच नानकसर सम्प्रदाय से जुड़े बाबा लक्खा सिंह (Lakkha Singh) ने मध्यस्थता की पेशकश करते हुए बातचीत की. लक्खा सिंह ने तोमर से मुलाकात के बाद दावा किया कि कृषि मंत्री उनसे बातचीत के दौरान भावुक हो गए.

एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए बाबा लक्खा सिंह ने दावा किया कि केंद्रीय कृषि मंत्री उनसे बातचीत के दौरान रो पड़े. इसके अलावा उन्होंने कहा कि सरकार ने बड़े ध्यान से दो घंटे तक उनकी बात सुनी. लक्खा सिंह ने कहा, 'आंदोलन के चलते लोगों की जान जा रही है. बच्चे, किसान, बजुर्ग महिला और पुरुष सब सड़कों पर हैं. इन सबका दुख असहनीय है. इसलिए मुझे लगा कि इसका कैसे भी समाधान होना चाहिए. इसलिए मैं आज कृषि मंत्री से मिला. बातचीत अच्छी रही और हमने इसका समाधान निकालने की कोशिश की. देखिए अब बातचीत में क्या होता है.'






किसानों की ट्रैक्टर रैली
बता दें कि सरकार और नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी किसान संगठन शुक्रवार को होने वाली आठवें दौर की अपनी वार्ता से एक दिन पहले गुरुवार को अपने-अपने रुख पर अड़े रहे. प्रदर्शनकारी किसानों ने तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने की अपनी मांग को लेकर ट्रैक्टर रैलियां निकाली, जबकि केंद्र ने इस बात पर जोर दिया कि वह इन कानूनों वापस लेने के अलावा हर प्रस्ताव पर विचार के लिए तैयार है.

अफवाहों से बचें
दोनों पक्ष गतिरोध दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. इस बीच, ऐसी अफवाहें भी सुनने को मिल रही हैं कि कुछ राज्यों को केंद्रीय कृषि कानूनों के दायरे से बाहर निकलने की अनुमति दी जा रही है, लेकिन किसान संगठनों ने कहा कि उन्हें सरकार से इस प्रकार का कोई प्रस्ताव नहीं मिला है. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इस प्रकार का कोई प्रस्ताव दिए जाने की बात से इनकार किया है.

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आज दोपहर होगी बातचीत
आठवें दौर की बातचीत शुक्रवार दोपहर दो बजे विज्ञान भवन में होगी. इससे पहले चार जनवरी को हुई बैठक बेनतीजा रहने के बाद इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है. सरकार ने 30 दिसंबर को छठे दौर की वार्ता में किसानों की बिजली सब्सिडी और पराली जलाने संबंधी दो मांगों को मान लिया था. इससे पहले की किसी वार्ता में कोई सफलता नहीं मिली थी.
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