जानें कैसा था इंदिरा गांधी का हिंदुत्व, किस तरह धार्मिक स्थलों पर जाती थीं

जानें कैसा था इंदिरा गांधी का हिंदुत्व, किस तरह धार्मिक स्थलों पर जाती थीं
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तिरुपति बाला भगवान के दर्शन करते हुए

राम मंदिर निर्माण (Ram Mandir ) की प्रक्रिया की शुरुआत के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime minister Narendra Modi) के अय़ोध्या (Ayodhya) जाने के साथ ही देश के पूर्ववर्ती प्रधानमंत्रियों की धार्मिकता की भी चर्चा चल पड़ी है. इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) भी ऐसी नेताओं में थीं, जो पीएम आवास में एक पूजा कक्ष रखती थीं और देशभर में संतों से मिलती थीं, धार्मिक स्थलों पर जाती थीं

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 5, 2020, 12:38 PM IST
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अयोध्या (Ayodhya) राम मंदिर निर्माण (Ram Mandir) की प्रक्रिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के अयोध्या पहुंचने के साथ ही पूर्ववर्ती प्रधानमंत्रियों की धार्मिकता की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. ऐसे में पूर्व  प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) खासतौर पर याद आती हैं, जो देश में अगर कहीं की यात्रा पर जाती थीं तो उसमें एक मंदिर दर्शन भी आमतौर पर यात्रा कार्यक्रम में शामिल रहता था.

इंदिरा का हिंदुत्व-संस्कार और धर्म
इंदिरा प्रियदर्शिनी जिस घर में पैदा हुईं, वो हिंदुओं का घर था. हालांकि उनके पिता जवाहरलाल नेहरू नास्तिक थे. धर्म की बजाए वो वैज्ञानिक दृष्टि पर जोर देते थे. उनकी मां कमला कश्मीरी पंडितों के कौल परिवार से थीं. मां पूरी तरह हिंदू रीतिरिवाजों का पालन करने वाली महिला थीं. इंदिरा ने खुद एक पारसी फिरोज गांधी से शादी की लेकिन हमेशा मन और कर्म से हिंदू रीतिरिवाजों का पालन करती रहीं. हालांकि एक प्रधानमंत्री के तौर पर वह हमेशा सेकूलर भारत की पक्षधर रहीं.

पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के आवास में एक कमरा उनका धार्मिक कक्ष था, जहां नियमित तौर पर उनकी पूजा-अर्चना होती थी




 प्रधानमंत्री आवास में पूजा कक्ष
20 सालों तक इंदिरा गांधी के डॉक्टर रहे केपी माथुर ने अपनी किताब "द अनसीन इंदिरा गांधी " में लिखा, उन्होंने अपने आधिकारिक प्रधानमंत्री निवास में एक छोटा सा कमरा पूजा के लिए बना रखा था.

इस पूजा कक्ष में सभी धर्मों के देवताओं की तस्वीरें थीं. इसमें राम, कृष्ण, क्राइस्ट, बुद्ध, रामकृष्ण परमहंस, अरविंद आश्रम की मां की तस्वीरें शामिल थीं.

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वो अपने इस पूजा कक्ष में नियमित तौर पर मैट्स पर बैठकर पूजा अर्चना करती थीं. उनके पूजा कक्ष में आरती के लिए पीतल की थाली थी. जिससे वो आरती करती थीं. अक्सर वो हवन कराती थीं.इस श्रृद्धाभाव से शिरकत करती थीं. हिंदू त्योहार भी वो उत्साह से मनाती थीं. किताब में माथुर ने लिखा है, बसंत पंचमी के दिन प्रधानमंत्री आवास के माली को केवल पीले फूल लाने के निर्देश थे.

वो दौरे में धार्मिक स्थानों पर भी जाती थीं
इंदिरा गांधी के बारे में कहा जाता है कि वो अगर देश में किसी स्थान के दौरे पर होती थीं तो उस शहर या स्थान के धार्मिक स्थानों पर जरूर जाती थीं.

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वो तकरीबन देश के सभी प्रसिद्ध मंदिरों में गईं. इसमें तिरुपति से लेकर वैष्णो देवी आदि शामिल रहे. वो कोशिश करती थीं कि देश में अगर ऐसी जगह दौरे पर हैं, जहां प्रसिद्ध मंदिर या धार्मिक स्थल हैं, वो वो वहां जाने की कोशिश करती थीं. हालांकि वो कई ऐसे मंदिरों में जरूर नहीं जा पाईं, जहां गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित था.

हत्या से ठीक पहले वो भुवनेश्वर के जगन्नाथ मंदिर गईं थीं. लेकिन पुजारियों ने उन्हें मंदिर में अंदर नहीं आने दिया, क्योंकि उनके अनुसार वो गैर हिंदू थीं.

रूद्राक्ष माला पहनती थीं
वो आनंदमयी मां को मानती थीं. हरिद्वार में उनके पास उन्होंने कई बार समय बिताया. आनंदमयी मां का दिये रूद्राक्ष की माला वो हमेशा पहनती थीं.


वर्ष 1977 में वो जब आम चुनावों में हारीं तो देवरहा बाबा के पास उनका आर्शीवाद लेने गईं.



कांग्रेस के "हाथ" को संतों के आर्शीवाद से जोड़ा गया

माना जाता है कि जब वो मथुरा में देवरहा बाबा के दर्शन के लिए गईं तो हाथ उठाकर उन्हें आशीर्वाद दिया. जब वो कांची कामकोटी के स्वामी चंद्रशेखर सरस्वती के पास गईं थीं तो उन्होंने दाहिना हाथ उठाया था. इन दोनों संतों से मिलकर उन्होंने ये संदेश ग्रहण किया कि कांग्रेस का चुनाव चिन्ह हाथ को बनाना चाहिए.

इंदिरा जी देश के सभी प्रसिद्ध संतों के पास भी जाकर उनसे आशीर्वाद लेना नहीं भूलती थीं. भाग्य पर उनका अगाध विश्वास था.  वो आध्यात्म पर भी भरोसा करती थीं.

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कैसा था उनका हिंदूत्व और सियासत
इंदिरा बेशक हिंदू धर्म स्थलों पर नियमित तौर पर जाती थीं. धार्मिक नेताओं और संतों से भी नियमित तौर पर मुलाकात करती थीं, लेकिन सियासत में धार्मिक कार्ड खेलने की विरोध थीं.


इंदिरा गांधी हरिद्वार में आनंदमयी के आश्रम में. वो रूद्राक्ष की जो माला पहनती थीं, वो उन्हीं की दी हुई थी



उनका कहना था, धर्म का हमारे समाज और संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग जरूर है और अहम रोल भी निभाता आया है, लेकिन राजनीति में इसकी कोई जगह नहीं है. सभी धर्म बराबर हैं.

सभी धर्मों के धार्मिक स्थानों पर जाती थीं
ऐसा नहीं है कि इंदिरा की आस्था के केंद्र में केवल हिंदू धर्म और इसके धार्मिक स्थान थे बल्कि वो दूसरे धर्मों के पवित्र स्थानों की भी यात्रा करती थीं. हज यात्रियों के लिए सब्सिडी की व्यवस्था उन्हीं के प्रधानमंत्री रहते हुई थी.
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