COVID-19: जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन के बारे में ये बातें जान लीजिए

जॉनसन एंड जॉनसन की कोरोना वायरस रोधी वैक्सीन. (रॉयटर्स फाइल फोटो)

Johnson and Johnson Coronavirus Vaccine: यह वैक्सीन लोगों को अस्पताल में भर्ती करने और मौत के मामलों में कमी लाने में कारगर है. इस वैक्सीन के मिलने के कम से कम चार हफ्ते बाद जिसको भी कोरोना हुआ, उसे अस्पताल जाने की नौबत नहीं आएगी.

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नई दिल्ली. अमेरिकी दूतावास के प्रभारी डेनियल डी स्मिथ ने मंगलवार को कहा है कि अमेरिका, भारत में जॉनसन एंड जॉनसन (जे एंड जे) की कोविड 19 वैक्सीन के संयुक्त निर्माण और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) जैसे निर्माताओं के निर्माण को बढ़ावा देने का काम करना चाहती है.


स्मिथ ने यह भी कहा कि बाल्टीमोर में बन रही एस्ट्राज़ेनका की कोविड-19 वैक्सीन के प्रभाव को अभी तक हरी झंडी नहीं मिली है और फूड एंड ड्रग विभाग ने अभी तक साफ नहीं किया है कि इसके डोज़ इस्तेमाल या एक्सपोर्ट के लिए तैयार हैं या नहीं. जानते हैं किस तरह यह वैक्सीन, भारत की कोरोना से लड़ाई को बल दे सकती है –


किसे यह वैक्सीन मिल सकती है?
जे एंड जे वैक्सीन, 18 साल से ऊपर के सभी लोगों के लिए सुझाई जा रही है.



किसे यह वैक्सीन नहीं मिल सकती?
यदि आपको जे एंड जे वैक्सीन की किसी भी सामग्री (जैसे पॉलीसोर्बेट) से एलर्जी है -त्वरित या गंभीर किसी भी तरह की- तो आपको इस वैक्सीन को लेने से बचना चाहिए. गंभीर एलर्जी से मतलब है कि अगर व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती करना पड़े या एपाइनफ्राइन से उसका इलाज करना पड़े. वहीं त्वरित एलर्जी से मतलब है कि वैक्सीन लगने के चार घंटे के भीतर किसी को सूजन, घरघराहट जैसे लक्षण देखने को मिले.


इस वैक्सीन के साइट इफेक्ट क्या हो सकते हैं?
बांह में दर्द, लालपन या सूजन. थकावट, घबराहट, बुखार, ठंड लगना या सिरदर्द. यह असर वैक्सीन लगने के एक या दो दिन के भीतर दिखने लगते हैं. इससे काम प्रभावित होता है लेकिन कुछ दिन में ये लक्षण दूर हो जाते हैं.


क्या यह वैक्सीन लगने के बाद चक्कर भी आता है?
घबराहट की वजह से चक्कर, लो बीपी, सुन्न हो जाने जैसी प्रतिक्रिया हो सकती है. हालांकि ऐसा ज्यादातर नहीं होता है लेकिन इसे पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता. Vaccine Adverse Event Reporting System (VAERS) की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च और अप्रैल 2021 को अमेरिका में लगी जे एंड जे की वैक्सीन के 80 लाख डोज़ में 653 चक्कर आने के मामले आए. इसका मतलब जे एंड जे वैक्सीन के हर एक लाख डोज़ में करीब 8 केस चक्कर आने के मिले.


क्लिनिकल ट्रायल के नतीजे क्या कहते हैं?
क्लिनिकल ट्रायल में वैक्सीन लगने के सात दिन के भीतर साइड इफेक्ट हल्के से मध्यम स्तर पर दिखाई दिए. यह साइट इफेक्ट 60 साल से ज्यादा की उम्र की तुलना में 18-59 की उम्र के लोगों के बीच ज्यादा आम थे.




यह वैक्सीन कितनी कारगर रही?
क्लिनिकल ट्रायल में जे एंड जे की वैक्सीन, उन लोगों पर कोविड-19 बीमारी के खिलाफ 66.3 फीसदी कारगर रही जिनमें वैक्सीन मिलने के दो हफ्ते बाद संक्रमण के कोई सबूत नहीं मिले. इस वैक्सीन मिलने के दो हफ्ते बाद व्यक्ति सबसे ज्यादा सुरक्षित है. यह वैक्सीन लोगों को अस्पताल में भर्ती करने और मौत के मामलों में कमी लाने में कारगर है. इस वैक्सीन के मिलने के कम से कम चार हफ्ते बाद जिसको भी कोरोना हुआ, उसे अस्पताल जाने की नौबत नहीं आएगी. शुरुआती सबूत बताते हैं कि यह वैक्सीन लक्षणहीन संक्रमण से बचाव कर सकती है.