जानिए, क्या है क्राइम कंट्रोल कैलेंडर, जिसे फॉलो करती है 4 राज्यों की पुलिस!

जानिए, क्या है क्राइम कंट्रोल कैलेंडर, जिसे फॉलो करती है 4 राज्यों की पुलिस!
तीन तरह के अपराध की जानकारी देता है यह कैलेंडर

चार राज्यों की पुलिस के छोटे से लेकर बड़े अधिकारी तक एसपी शर्मा के क्राइम कैलेंडर कैलेंडर को फॉलो करते हैं. इसके आधार पर अपने-अपने इलाके के पुलिस स्टेशन को एडवाइजरी भी जारी करते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 7, 2020, 4:09 PM IST
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नई दिल्ली. रात के वक्त होने वाले क्राइम (Crime) को रोकने के लिए 4 राज्यों की पुलिस पहले से ही अलर्ट रहती है. वक्त से पहले ही घटना को रोकने के लिए पुलिस (Police) गश्त बढ़ा देती है. पूरे साल की जानकारी पुलिस को पहले से ही हो जाती है. इसकी वजह है पुलिस को मिलने वाला क्राइम कैलेंडर (Crime Calendar). इस कैलेंडर में उन तारीखों पर निशान लगा होता है जब रात के वक्त क्राइम होने की सबसे ज्यादा आशंका होती है. इस कैलेंडर को भरतपुर, राजस्थान (Rajasthan) में जनरल स्टोर चलाने वाले एसपी शर्मा ने तैयार किया है.

चार राज्यों की पुलिस के छोटे से लेकर बड़े अधिकारी तक एसपी शर्मा के कैलेंडर को फॉलो करते हैं. इतना ही नहीं बड़े अधिकारी इस कैलेंडर के आधार पर अपने-अपने इलाके के पुलिस स्टेशन (Police Station) को एडवाइजरी भी जारी करते हैं.

ऐसे तैयार होता है अंधेरी रात अपराध पंचांग



अंधेरी रात अपराध पंचांग (कैलेंडर) तैयार करने वाले एसपी शर्मा बताते हैं, अंग्रेजों के जमाने से देश में खासतौर से उत्तर भारत में क्राइम करने वालीं 24 जातियां हैं. क्राइम करने का हर जाति का अपना एक तरीका है. जैसे यूपी में बावरिया जाति नंबर एक पर है. इसमे भी कई उपजाति हैं. बावरिया जाति के अपराधी एक महीने में 8 या 10 दिन अपराध करते हैं. यह वो दिन होते हैं जिनकी रातें गहरी अंधेरी होती हैं. जैसे अमावस्या और उससे 3-4 दिन पहले और बाद की रातें.
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क्राइम कंट्रोल कैलेंडर


इसके पीछे तर्क यह है कि इस रात में सांवले और काले रंग का इंसान आसानी से दिखाई नहीं देता है. जो गोरे रंग का होता है तो वो चेहरे और शरीर पर जला हुआ इंजन ऑयल लगाकर अपराध करने जाता है. हालांकि, थोड़ा-थोड़ा तेल सभी लगाते हैं, जिससे कि पकड़ने की कोशिश नाकाम हो जाए.

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मंगल और शनिवार को होती हैं खतरनाक वारदात

कैलेंडर तैयार करने वाले शर्मा पुलिस विभाग में अपराध रोकने में मददगार के रूप में जाने जाते हैं. उनका कहना है कि बावरिया में ही कुछ ऐसी जाति भी हैं जो रात में तो अपराध करती ही हैं, लेकिन खासतौर से मंगलवार और शनिवार की रात ज्यादा खतरनाक वारदात को अंजाम देते हैं. सोमवार की रात 12 बजे के बाद शुरु होने वाले मंगलवार और शुक्रवार की रात 12 बजे के बाद शुरु हुए शनिवार को यह खतरनाक वारदातों को अंजाम देते हैं. मंगलवार और शनिवार को खासतौर से इनके देवी-देवता की पूजा होती है. पूजा करने के बाद यह अपराध को अंजाम देते हैं.

तीन तरह के अपराध की जानकारी देता है कैलेंडर

इस कैलेंडर की बात करें तो हर एक तारीख पर एक खास रंग के गोले से निशान लगाया जाता है. यह निशान ऑरेंज, ग्रीन और रेड कलर के होते हैं. उनका कहना है कि ऑरेंज कलर का मतलब धीमी रफ्तार, ग्रीन तेज रफ्तार और रेड कलर का मतलब होता है खतरनाक अपराध.

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रेड कलर वाली तारीखें अमावस्या वाले दिन, उससे पहले और बाद की होती हैं. मंगलवार और शनिवार की तारीखें भी होती हैं. दूसरी तारीखें अन्य जातियों के तौर-तरीकों के हिसाब से तय की जाती हैं. उनकी मानें तो यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा पुलिस उनके कैलेंडर को फॉलो करती है. दूसरे राज्यों की पुलिस भी कैलेंडर मांगती है तो वो मोबाइल से उसे भेज देते हैं.

आगरा में तैनात इंस्‍पेक्टैर शैलेश सिंह का कहना है कि संभावित तारीख पता लगने के बाद उस रात में गश्त बढ़ा दी जाती है. खानाबदोश जातियों पर खास निगाह रखी जाती है. बाजार और सोसाइटियों में तैनात चौकीदार भी अलर्ट कर दिए जाते हैं, जिससे रात का क्राइम रोकने में काफी हद तक मदद मिलती है.
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