कोविशील्ड vs कोवैक्सीन: सब कुछ जो इन वैक्सीन के बारे में आप जानना चाहते हैं

प्रतीकात्मक तस्वीर

Vaccine Update: भारत में तीन वैक्सीन पर विचार किया जा रहा था. जिसमें कोवैक्सीन (Covaxin) और कोविशील्ड (Covishield) के अलावा अमेरिकी कंपनी फाइजर (Pfizer) का नाम भी शामिल है. फिलहाल दो वैक्सीन को अनुमति दी गई है.

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    नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Corona Virus) के खिलाफ जंग में भारत ने रविवार को बड़ी सांकेतिक सफलता दर्ज की है. देश में दो वैक्सीन उम्मीदवारों कोवैक्सीन और कोविशील्ड को आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मिल गई है. इससे पहले दोनों वैक्सीन को एक्सपर्ट्स कमेटी की तरफ से अप्रूवल मिल गया था. वहीं, देश में भी बड़े वैक्सीन प्रोग्राम की तैयारियां जारी हैं. शनिवार को देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वैक्सीन का ड्राई रन किया गया.

    भारत में तीन वैक्सीन पर विचार किया जा रहा था. जिसमें कोवैक्सीन और कोविशील्ड के अलावा अमेरिकी कंपनी फाइजर का नाम भी शामिल है. फिलहाल दो वैक्सीन को अनुमति दी गई है. कौनसी वैक्सीन लगाई जाएगी, ये सूरत साफ हो चुकी है, लेकिन अभी भी कीमत और खासियत को लेकर कई सवाल बने हुए हैं. आइए इन दोनों वैक्सीन के बारे में जानते हैं.

    कोविशील्ड
    पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India) में कोविशील्ड का निर्माण हो रहा है. वहीं, इस वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और फार्मा कंपनी एस्ट्राजैनेका ने मिलकर तैयार किया है. सीरम इंस्टीट्यूट विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता है. खास बात है कि दुनिया के कई बड़े देशों ने इस वैक्सीन पर भरोसा जताया है.

    कोविशील्ड में चिंपांजी के वायरल वेक्टर का इस्तेमाल किया गया है. यह वेक्टर एडीनोवायरस का कमजोर वर्जन है. खास बात है कि एडीनोवायरस की वजह से चिंपांजियों को सर्दी जुखाम होता है और इसमें SARS-CoV-2 के स्पाइक प्रोटीन का का जैनेटिक मटेरियल है. वैक्सीन लगाए जाने के बाद सतही स्पाइक प्रोटीन तैयार होगा और शरीर में दोबारा SARS-CoV-2 संक्रमण फैलाएगा, तो यह इम्यून सिस्टम को इससे लड़ने के लिए अलर्ट करेगा.

    डीसीजीआई ने कहा था कि सीरम की तरफ से पेश किए गए फेज-1 क्लीनिकल ट्रायल के डेटा में इसकी प्रभावकारिता 70.42 फीसदी दिखाई गई थी. पहले ट्रायल में 23 हजार 745 प्रतिभागी शामिल हुए थे. वहीं, फेज-2,3 के ट्रायल में भारत में 1600 प्रतिभागी शामिल हुए. ड्रग कंट्रोलर ने बताया कि दोनों फेज के नतीजे फेज-1 के नतीजों के बराबर थे.

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    कोवैक्सीन
    यह भारत की पहली स्वदेशी वैक्सीन है, जिसे भारत बायोटेक ने आईसीएमआर और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के साथ मिलकर तैयार किया है. इस वैक्सीन को खास तरीके से तैयार किया गया है. खास बात है कि यह वैक्सीन पैथोजन को अपनी और नकल नहीं बनाने देगी. कोवैक्सीन एक निष्क्रिय वैक्सी है. दरअसल, यह ऐसी वैक्सीन होती है, जिसे बीमारी का कारण बने जिंदा माइक्रोऑर्गेनिज्म को मारकर बनाया जाता है. यह वैक्सीन पैथोजन को नकल नहीं बनाने देगी, लेकिन शरीर में बनाए रखेगी, ताकि इम्यून सिस्टम इसे पहचान सके.

    कोवैक्सीन का फिलहाल तीसरे फेज का ट्रायल किया जा रहा है. कंपनी ने 800 लोगों पर पहले चरण का ट्रायल किया था. ड्रग कंट्रोलर को यह वैक्सीन सुरक्षित और असरदार लगी है. इंसानों के अलावा भारत बायोटेक ने वैक्सीन का कई बार जानवरों पर भी ट्रायल किया है.

    कीमतों पर संशय बरकार
    फिलहाल दोनों वैक्सीन की कीमतों को लेकर कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई है. सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला कहते हैं कि उनकी वैक्सीन की कीमत 400 रुपए तक होगी. वहीं, भारत बायोटेक के टीके की कीमत 100 रुपए से कम रहेगी. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्ष वर्धन ने साफ किया है कि फ्रंटलाइन कर्मियों को वैक्सीन मुफ्त ही लगेगी.

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