जब राजीव हत्याकांड में दोषी नलिनी श्रीहरन से मिलकर रो पड़ी थी प्रियंका गांधी

फरवरी में नलिनी ने मद्रास हाईकोर्ट में अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 435(1)(ए) को चुनौती दी थी. इस धारा अंतर्गत जिसक मामले में केंद्रीय एजेंसियां जांच कर रहीं हों ऐसे मामलों में राज्यों को केंद्र सरकार की सलाह लेनी होती है.

News18Hindi
Updated: September 8, 2018, 12:38 PM IST
जब राजीव हत्याकांड में दोषी नलिनी श्रीहरन से मिलकर रो पड़ी थी प्रियंका गांधी
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की दोषी नलिनी श्रीहरन की फाइल फोटो
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Updated: September 8, 2018, 12:38 PM IST
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की दोषी नलिनी श्रीहरन एक बार फिर सुर्खियों में है. शुक्रवार को नलिनी ने कांग्रेस अध्यक्ष और राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी का आभार व्यक्त किया. दरअसल राहुल गांधी ने कहा है कि वह नलिनी को रिहा करने पर कोई आपत्ति नहीं जताएंगे.

बीते 27 साल से जेल में बंद नलिनी राजीव गांधी हत्याकांड की साजिश में शामिल होने की दोषी थी. तमिलनाडू के श्रीपेरुमबदूर में 21 मई सन 1991 को बम धमाके में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी. जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि नलिनी, राजीव की हत्या करने वाले पांच लोगों के समूह की सदस्य थी.

नलिनी को अदालत की ओर से फांसी की सजा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में इसे आजीवन कारावास में बदल दिया गया. अब तक कई दफा अपनी रिहाई की मांग कर चुकी नलिनी ने राष्ट्रीय महिला आयोग का दरवाजा भी खटखटाया था, लेकिन उसकी मांग को खारिज कर दिया गया.

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तमिलनाडु सरकार पहले ही यह कह चुकी है कि वह राजीव गांधी हत्याकांड के सभी सात दोषियों को रिहा करने को तैयार है. उधर सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य सरकार को याचिका पर विचार करने को कहा था.

बता दें कि नलिनी ने जेल में रहने के दौरान एक किताब लिखी है. राजीव असैसिनेशन: हिडन ट्रूथ्स एंड प्रियंका-नलिनी मीटिंग' में नलिनी ने लिखा है कि प्रियंका जब साल 2008 में उनसे जेल में मिलने पहुंची तो उन्होंने पूछा कि उनके पिता के साथ ऐसा क्यों किया? नलिनी के मुताबिक, प्रियंका फूट- फूट कर रोने लगीं.

नलिनी की रिहाई के मामले में गांधी परिवार की उदारता चर्चा का विषय रही है. साल 2000 में सोनिया गांधी की पैरवी के बाद नलिनी को सुनाई गई मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया था.
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इसी साल फरवरी में नलिनी ने मद्रास हाईकोर्ट में सीआरपीसी की धारा 435(1)(ए) को चुनौती दी थी. इस धारा ते अंतर्गत जिन मामलों में केंद्रीय एजेंसियां जांच कर रही हों, उनमें राज्यों को केंद्र सरकार की सलाह लेनी होती है. अप्रैल में मद्रास हाईकोर्ट ने नलिनी की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उसने मांग की थी कि उसे समय से पहले रिहा कर दिया जाए.

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इससे पहले तमिलनाडु राज्य सरकार ने राज्यपाल की क्षमा करने की शक्तियों से संबंधित संविधान के अनुच्छेद 161 के अंतर्गत नलिनी को रिहा करने का आदेश दिया था. हालांकि सीबीआई की ओर से जांच किए जाने की वजह से नलिनी की रिहाई नहीं हो पाई थी.
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