पहले फेल हो चुकी एंटी वायरल दवा रेमडेसिविर को अब कैसे मिली मंज़ूरी?

पहले फेल हो चुकी एंटी वायरल दवा रेमडेसिविर को अब कैसे मिली मंज़ूरी?
कोरोना के इलाज में रेमिडिसिविर महत्वपूर्ण दवा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

क्या Remdisivir को भारत में मंज़ूरी मिलने का कारण ड्रग एंड क्लिनिकल ट्रायल संबंधी नियमों में कुछ ही समय पहले किए गए बदलाव हैं? पहले कैसे फेल हो गई थी यह दवा और अब क्यों और कैसे पास हुई? इन तमाम पहलुओं के साथ ये भी जानें कि यह दवा Covid-19 का इलाज है या भारत (India) में किसी तरह का ट्रायल है.

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एंटी वायरल (Anti-Viral) ड्रग रेमडेसिविर के फेज़ थ्री ट्रायल के नतीजों में दिखा कि 65 फीसदी मरीज़ ये दवा लेकर 11वें दिन बेहतर दिखे. पिछले महीने White House में इस दवा की कामयाबी के ऐलान के बाद अब भारत के Durg Controller General और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDCSCO) ने अस्पताल में भर्ती Coronavirus पीड़ित वयस्कों व बच्चों पर रेमडेसिविर के इस्तेमाल की इजाज़त दी है. जानिए कि कैसे इस दवा को मंज़ूरी दी गई क्योंकि पहले ट्रायल में तो यह फेल हो गई थी.

जापान के बाद भारत ने जताया भरोसा
अमेरिका से इस दवा को मुंबई की एक कंपनी क्लिनेरा ग्लोबल सर्विसेज द्वारा आयात किया जाएगा. फिलहाल कोरोना मरीज़ों पर इस दवा का इस्तेमाल सिर्फ 5 दिनों के लिए होगा. यह भी ध्यान देने लायक बात है कि जापान ने कोरोना संक्रमण के इलाज में रेमडेसिविर दवा के इस्तेमाल को मंजूरी पिछले महीने ही दी थी. जापान में कोरोना के इलाज की आधिकारिक दवा रेमडेसिविर ही है.





इस तरह फेल हुई थी रेमडेसिविर


एंटी वायरल दवा रेमडेसिविर पर कई देशों की उम्मीद टिकी थी, लेकिन पहले ही ट्रायल में ये बुरी तरह से फेल हो गई थी. इससे संबंधित रिपोर्ट असावधानी से 23 अप्रैल को WHO की वेबसाइट पर क्लिनिकल ट्रायल डेटाबेस में भी आ गई थी, जिसे आनन-फानन में हटाया गया था. ट्रायल के दौरान 18 मरीजों पर साइड इफेक्ट के कारण रेमडेसिविर दवा बंद करनी पड़ी थी. महीने भर बाद इसके नतीजे डराने वाले थे. रेमडेसिविर दिए जा रहे 13.9 प्रतिशत मरीजों की मौत हो गई थी.

यह ट्रायल एक अमेरिकी बायोटेक कंपनी गिलिएड साइंसेज (Gilead Sciences) ने किया था जिसके नतीजे WHO की साइट पर विस्तार से आ गए थे. कंपनी का कहना था कि ट्रायल के नतीजे अंतिम नहीं थे क्योंकि इतने छोटे ग्रुप पर हुए ट्रायल से कुछ भी नतीजा नहीं निकाला जा सकता. इस तर्क को विशेषज्ञों ने भी समर्थन दिया था.

फिलहाल दवा के बारे में कुछ भी पक्के तौर कहना मुनासिब नहीं होगा क्योंकि इस दवा को बुरा या अच्छा कहने के लिहाज़ से स्टडी ग्रुप काफी छोटा था.
स्टीफन इवांस, प्रोफेसर-एसएचटीएम, लंदन


रेमडेसिविर किस तरह की दवा है?
ये एक एंटीवायरल दवा है, जो साल 2009 में सामने आई थी. ये उन दवाओं की श्रेणी में आती है जो वायरस पर सीधा हमला करती हैं. वहीं बहुत सी दवाएं वो होती हैं, जो सीधे हमले की बजाए इम्यून सिस्टम को हमले के लिए तैयार करती हैं. ये वायरस के भीतर घुस जाती है और इसकी वजह से उनका जीनोम सीक्वेंस गड़बड़ा जाता है, जिससे वायरस खुद को बढ़ा नहीं पाते.

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इबोला के कहर के दौरान भी मरीजों को आराम देने के लिए इस दवा का उपयोग हुआ था, हालांकि तब भी इसका ट्रायल सफल नहीं हुआ था. कोरोना वायरस पर शुरूआती जांचों में कहा गया था कि ये दवा वायरस की बढ़त को रोक देती है लेकिन सिर्फ शुरुआती संक्रमण के दौरान, गंभीर मरीज़ों पर ये खास असर नहीं करती. दूसरी तरफ, इसके ट्रायल चल रहे थे.

अब कैसे मिली भारत में इजाज़त?
व्हाइट हाउस और कंपनी गिलिएड साइंसेज के ताज़ा दावों के बाद भारत ने इस दवा के इस्तेमाल को मंज़ूरी दी है. हालांकि ये सभी मरीज़ों के लिए नहीं सिर्फ गंभीर कोरोना मरीज़ों के लिए होगी और इसका इस्तेमाल लिखित प्रेस्क्रिप्शन के बाद सिर्फ अस्पतालों के अंदर ही होगा. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक रीनल और हेपेटिक समस्याओं वाले मरीज़ों के संदर्भ में इसे कैसे इस्तेमाल किया जाना है, इस बारे में अभी भारत अमेरिकी कंपनी से बातचीत कर रहा है.

क्या यह भारत में दवा का ट्रायल है?
इसी रिपोर्ट की मानें तो CDSCO ने अनिवार्य तौर पर कहा है कि भारत में इस दवा के इस्तेमाल में अगर कोई नकारात्मक रिएक्शन पाए जाते हैं, तो उसकी सूचनाएं इकट्ठी कर सौंपना होंगी और यह प्रक्रिया एक महीने के भीतर होगी. ये भी कहा गया है कि भारत में रेमडेसिविर के इस्तेमाल और इसके मरीज़ों पर निगरानी से जुड़े नतीजे हर महीने साझा करने होंगे. ऐसे निर्देश सवाल खड़ा करते हैं कि क्या यह रेमडेसिविर के भारत में ट्रायल का दौर है?

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सरकार रेमडेसिविर का क्लिनिकल ट्रायल करेगी: हर्षवर्धन
करीब एक महीने पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने सीएनएन न्यूज़ 18 के साथ खास इंटरव्यू में कहा था कि 'भारत चूंकि डब्ल्यूएचओ का सहभागी देश है इसलिए डब्ल्यूएचओ के उपलब्ध कराए जाने पर देश के कुछ राज्यों में करीब 1000 मरीज़ों पर रेमडेसिविर का क्लिनिकल ट्रायल करने के लिए सरकार तैयार है.'

दूसरी तरफ, द हिंदू की ताज़ा रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि रेमडेसिविर को मंज़ूरी देने की प्रक्रिया में तेज़ी का कारण नई ड्रग एंड क्लिनिकल ट्रायल नियमावली 2019 रही है, जिसमें विशेष स्थिति में क्लिनिकल ट्रायल को मंज़ूरी देने का प्रावधान है. गौरतलब है कि Gilead Sciences कंपनी ने 29 मई को भारत में रेमडेसिविर की मार्केटिंग के लिए अप्लाई किया था और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अब इसे मंज़ूरी दी गई है.

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First published: June 2, 2020, 3:35 PM IST
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