नागरिकता संशोधन विधेयक राज्यसभा में कैसे पास कराएगी मोदी सरकार? जानें अमित शाह का पूरा गणित

नागरिकता संशोधन विधेयक राज्यसभा में कैसे पास कराएगी मोदी सरकार? जानें अमित शाह का पूरा गणित
नागरिकता संशोधन विधेयक को राज्यसभा से पारित कराने के लिए मोदी सरकार खास रणनीति बना रही है. गृह मंत्री अमित शाह आज लोकसभा में इस बिल को पेश करेंगे.

बीजेपी के पास किसी भी विधेयक को पारित कराने लायक पर्याप्त संख्या में राज्‍यसभा सदस्‍य नहीं हैं. ऐसे में नरेंद्र मोदी सरकार खास रणनीति के तहत नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 (Citizenship Amendment Bill 2019) पर आगे बढ़ रही है.

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  • Last Updated: December 10, 2019, 11:02 AM IST
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पायल मेहता

नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 (Citizenship Amendment Bill 2019) को विपक्ष के भारी विरोध और लंबी चली बहस के बाद सोमवार देर रात लोकसभा (Lok Sabha) से पास कर दिया गया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) अब इस बिल को संसद के उच्‍च सदन यानी राज्यसभा (Rajya Sabha) में रखेंगे. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह विधेयक बुधवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां इस बिल पर बहस के लिए छह घंटे का समय निर्धारित किया गया है. इस विधेयक पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार खास रणनीति के तहत आगे बढ़ रही है. ये रणनीति कुछ उसी तरह है, जैसी जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 (Article 370) हटाने के लिए अपनाई गई थी.

बीजेपी के पास राज्‍यसभा में नहीं हैं जरूरी नंबर
राज्यसभा में यूपीए के नेतृत्व वाले विपक्ष के नंबर कम हैं. उच्च सदन में विपक्ष के नेताओं की संख्या 100 से भी कम लग रही है. कुल 245 सदस्‍यों वाली राज्यसभा में अभी 238 सदस्य हैं. बाकी सीटें खाली हैं यानी सरकार को यह विधेयक पारित कराने के लिए कम से कम 120 सदस्य चाहिए. अभी भी बीजेपी के पास किसी भी विधेयक को पारित कराने लायक पर्याप्त संख्या में राज्‍यसभा सदस्‍य नहीं हैं. वहीं, कांग्रेस के पास 46 सांसद हैं. इनमें मोतीलाल वोहरा अस्वस्थ हैं. ऐसे में जाहिर तौर पर वह वोटिंग के वक्त सदन में मौजूद नहीं रहेंगे.
बिल रोकने को विपक्ष के पास हैं 100 सदस्‍य


अब बात करते हैं ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की. संसद के उच्च सदन में टीएमसी के 13 सांसद हैं. वहीं, समाजवादी पार्टी (SP) के 9, द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) के पांच, आरजेडी (RJD) और बीएसपी (BSP) के 4-4 सांसद हैं. वहीं, कुछ छोटी पार्टियों को मिलाकर विपक्ष (Opposition) की संख्या 100 हो जाती है.

एनडीए के पास उच्‍च सदन में हैं 118 सदस्‍य
अब आते हैं बीजेपी की संख्या पर. राज्यसभा में अकेले बीजेपी के 83 सांसद हैं. इनमें अरुण सिंह और केसी राममूर्ति नए-नए सांसद बने हैं. एनडीए के पास 118 सदस्य हैं. शिरोमणि अकाली दल के 3 सांसद हैं. वहीं, एआईएडीएमके के राज्‍यसभा में 11 सदस्‍य हैं. कई मुद्दों पर बीजेपी का विरोध करती रही नीतीश कुमार की जेडीयू ने बिल का समर्थन करने का फैसला किया है. जेडीयू के सदन में 6 सदस्‍य हैं. नामित सांसदों समेत 12 अन्‍य सदस्‍य हैं. इनमें कई पूर्वोत्‍तर राज्‍यों से बीजेपी के सहयोगी दलों के सदस्‍य हैं.

शिवसेना तमाम विरोधों के बाद भी करेगी समर्थन
महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव 2019 के बाद सरकार बनने से पहले बीजेपी और शिवसेना के बीच काफी सियासी उठापटक चली. आखिर में शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर महाराष्‍ट्र में सरकार बना ली. इस सब के बावजूद उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने विधेयक का समर्थन करने का फैसला किया है. सूत्रों का कहना है कि शिवसेना ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्‍ट्रहित में इस बिल का समर्थन करने का फैसला किया है. नवीन पटनायक की बीजू जनता दल ने 7 वोटों के साथ समर्थन का ऐलान कर दिया है. हालांकि, पार्टी प्रस्‍तावित संशोधनों में कुछ बदलाव की मांग कर सकती है.

ये सदस्‍य निजी कारणों से वोटिंग में नहीं लेंगे हिस्‍सा
तेलंगाना राष्‍ट्र समिति (TRS) के 6 सांसद और वाईएसआर जगन रेड्डी की वाईएसआरसीपी (YSRCP) के दो वोट और टीडीपी के दो सांसद भी विधेयक के पक्ष में हैं. अनिल बलूनी समेत बीजेपी के 2 सांसद वोटिंग के दौरान निजी कारणों से सदन से गैरहाजिर रहेंगे. इसके अलावा बिल का समर्थन करने वाले दो निर्दलीय राज्‍यसभा सदस्‍य भी वोटिंग में हिस्‍सा नहीं लेंगे. इस तरह से उच्‍च सदन में विधेयक के समर्थन में एनडीए को 132 सदस्‍यों का साथ मिल जाएगा, जो जरूरी 120 वोट से 12 ज्‍यादा है.

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