इम्यूनिटी, सोशल डिस्टेंसिंग और आत्मनिर्भर भारत : सबका जवाब है 'साइकिल'

इम्यूनिटी, सोशल डिस्टेंसिंग और आत्मनिर्भर भारत : सबका जवाब है 'साइकिल'
साइकिल टूर के दौरान म्यांमार में भारतीय मूल के लोगों से मिलते हुए साइकिल प्रेमी मिथुन दास. न्यूज़18 फोटो.

एक तरफ Coronavirus के केस बढ़ रहे हैं. माना जा रहा है कि संक्रमण से वही लड़ सकेगा जिसकी Immunity बेहतर होगी. दूसरी तरफ, कहीं Lockdown है तो कहीं Unlock शुरू हुआ है. इस पूरे परिदृश्य में साइकिल प्रेमियों के नज़रिये से जानते हैं कि साइकिल (Cycling) कितना बेहतर विकल्प है. World Bicycle Day पर यह भी समझते हैं कि आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण से साइकिल कितनी प्रासंगिक है.

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'जीवन एक चुनौती है लेकिन साइकिल प्रेमियों (Bicycle Lover) में जिगर है कि चुनौती स्वीकार करें और विजेता के रूप में उभरें.' पिछले 10 सालों में साइकिल को पैशन बना चुके मिथुन दास जब यह बात कहते हैं तो मानना पड़ता है कि यह सच है क्योंकि वह देश ही नहीं बल्कि एशिया (Asia) के कुछ और देशों तक की साइकिल यात्रा (Cycle Travel) कर चुके हैं. आइए जानें कि साइकिल के दीवाने दुनिया को क्यों दो पहियों पर चलते हुए क्यों देखना चाहते हैं.

साइकिल सुलभ है और सोशल डिस्टेंसिंग में कारगर भी
एक तो साइकिल आसानी से देश में हर जगह मुहैया हो सकती है और वंचित वर्गों तक की पहुंच में आ सकने लायक है. दूसरी बात, यह कि कोरोना वायरस के खतरे के समय में सोशल डिस्टेंसिंग बरतने के लिहाज़ से यह बेहद कारगर है. दो पहिया वाहन पर एक व्यक्ति और निजी कारों में ड्राइवर के अलावा एक व्यक्ति तक के सरकारी नियम हम देख चुके हैं. ऐसे में साइकिल ज़्यादा सुविधाजनक विकल्प हो सकता है.

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एक प्रायोजित साइकिल यात्रा के तहत मणिपुर के मोरेह से म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया होते हुए सिंगापुर के आईएनए मार्केट पहुंचे मिथुन दास.




लद्दाख जैसे देश के काफी कठिन ट्रैक्स समेत भारत से सिंगापुर तक साइकिल चला चुके मिथुन दास के मुताबिक हालांकि शारीरिक फिटनेस के लिए स्वीमिंग सर्वोत्तम विकल्प हो सकता है लेकिन यह हर जगह उपलब्ध भी नहीं है और महंगा भी है इसलिए साइकिलिंग हर तरह से सर्वोत्तम है.



लॉकडाउन के बाद साइकिल है बेहतर विकल्प?
'कोरोना वायरस के संक्रमण के दौरान और उसके बाद के हालात में बसों और मेट्रो में सफर करने पर संक्रमण का जोखिम रहेगा ही इसलिए साइकिल बेहतर विकल्प होगा क्योंकि यह सोशल डिस्टेंसिंग के लिए उपयुक्त है.' यह कहने वाले साइकिल लवर मिथुन को लॉकडाउन के वक्त अरुणाचल में ही रुकना पड़ा और वहां उन्हें कैंपस से बाहर निकलने की इजाज़त नहीं थी लेकिन होती तो वह कहते हैं कि इन्हीं दो पहियों पर कहीं जाते.

और भी साइकिल प्रेमी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं. पूरे महाराष्ट्र समेत गोवा, हिमाचल और अरुणाचल में साइकिल चला चुके प्रशांत ननावरे कहते हैं कि लॉकडाउन में मज़दूर अपने गांवों को लंबी दूरी तक साइकिल पर निकले क्योंकि उनके पास कोई विकल्प नहीं था, लेकिन साइकिल हर स्थिति में सबके लिए सबसे मुफीद और पर्यावरण फ्रेंडली विकल्प है.

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पिछले कुछ सालों से अरुणाचल के उन कुदरती इलाकों में प्रशांत ननवारे साइकिल चला रहे हैं, जो अब तक अछूते रहे हैं.


इको फ्रेंडली के साथ ही ट्रैफिक कंट्रोल में कारगर
ज़ाहिर है कि बगैर ईंधन के चलने वाली साइकिल पर्यावरण को नुकसान कैसे पहुंचाएगी. एक बात यह भी है कि पिछले 60 दिनों के लॉकडाउन के बाद न केवल दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों बल्कि देश और दुनिया के कई हिस्सों में हवा की क्वालिटी सुधरी है, तो ऐसे में साइकिल प्रेमी चाहते हैं कि साइकिल को अपनाया जाए तो साफ हवा का यह स्तर बरकरार रखा जा सकता है.

साइकिल के प्रचार और एडवोकेसी के लिए 2015 में साइकिल प्रेमियों ने मुंबई में साइकिल कट्टा शुरू किया था. इसके प्रमुख सदस्य प्रशांत कहते हैं कि इससे बेहतर इको फ्रेंडली विकल्प नहीं है. आपको यह जानकर भी हैरत हो सकती है कि इको फ्रेंडली यानी बांस की साइकिल भी देश में बनाई जा रही है. जानिए कैसी है यह खास साइकिल.

साइकिल एक और फायदे अनेक
पेशे से पायलट शशिशेखर पाठक बांस के फ्रेम की अनूठी साइकिलें बनाते हैं और खुद भी चलाते हैं. शशिशेखर का मानना है कि साइकिल इकलौता वाहन है, ​समय के साथ जिसकी कीमत बढ़ती है. यानी आप कार लेंगे तो समय के साथ आप उस पर मेंटेनेंस पर खर्च करेंगे, फिर सेहत पर खर्च करेंगे और कार की कीमत भी तेज़ी से घटेगी. लेकिन साइकिल के इस्तेमाल से सेहत बेहतर होगी तो खर्च कम होंगे और उसकी कीमत में भी कमी नहीं आएगी.

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कैप्टन शशिशेखर को साइकिल का शौक ऐसा लगा कि उन्होंने अपने और अपनी पत्नी के लिए इस तरह की बांस की साइकिल खुद बनाई.


बेहतर योजनाओं की वकालत
बांस की साइकिलें बनाने के बारे में शशिशेखर से प्रशिक्षण लेकर गए एक फ्रेंच व्यक्ति ने फ्रांस में इस तरह की साइकिलें बनाकर लोगों को प्रेरित करना शुरू कर दिया है. शशिशेखर मानते हैं कि साइकिल जीवनशैली का हिस्सा है और इसे लेकर सरकारों को बेहतर योजनाएं बनाना चाहिए. प्रशांत और उनका पूरा समूह साइकिल कट्टा शहरी प्रशासनों और स्थानीय स्तर पर साइकिल को बढ़ावा देने संबंधी योजनाओं के लिए कोशिश कर रहा है.

इसी तरह एमटीबी प्रशिक्षक मिथुन मानते हैं कि कोविड और लॉकडाउन के हालाते के चलते साइकिल को बढ़ावा देना ही चाहिए लेकिन इसके लिए सुरक्षित सड़कों और स्पेस की ज़रूरत होगी. ऐसे में समाज और सरकारों को मिलकर काम करना होगा.

साइकिल से जुड़ी है हेल्थ और हैपिनेस
मुंबई के साइकिल समूहों से जुड़े और 'पैदल या पैडल' समूह चलाने वाले शम्मी सेठी कहते हैं कि साइकिल चलाने से आपकी इम्युनिटी मज़बूत होती है, सांस का तंत्र बेहतर रहता है. शम्मी मानते हैं कि वह बगैर थके लंबी दूरी तक साइकिल चला पाते हैं और उनकी सेहत साइकिल की वजह से लगातार सुधरी है. वहीं, मिथुन ने कहा कि 'पहले से ज़्यादा फिट महसूस करता हूं. आप समझ सकते हैं कि लद्दाख में खारडूंगला पास पर 18 हज़ार फीट की ऊंचाई तक साइकिल चलाने के लिए कितनी फिटनेस चाहिए.'

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इंडिपेंडेंस डे सा​इकिलिंग के अलावा नियमित रूप से एक तरफ से 70 किमी की साइकिलिंग यात्राओं जैसी गतिविधियों से लगातार जुड़े शम्मी सेठी साइकिलिंग को जीवन मानते हैं.


जो काम आप पसंद करते हैं, वो खुशी तो देता ही है. फिर सेहत ठीक रहे तो मन भी खुश रहता है. इससे भी आगे जाकर मिथुन के पास खुशी के बारे में बताने के लिए एक पूरी लिस्ट है :

साइकिलिंग से खुशी हमेशा जुड़ी हुई है. दफ्तर की राजनीति का जवाब है साइकिलिंग, ब्रेकअप हुआ तो साइकिलिंग, पैसे कम हैं तो साइकिलिंग, दुख है तो साइकिलिंग, कार खराब हो गई तो साइकिलिंग... हर समस्या का इलाज साइकिल है.


साइकिल चलाना अपने आप में एक पूरा व्यायाम है इसलिए अगर आप यह करते हैं तो आप वज़न को लेकर चिंतित नहीं होते. 1200 किमी की सह्याद्रि बचाओ साइकिल यात्रा को लीड कर चुके प्रशांत कहते हैं कि वो बेहद फूडी हैं और अक्सर खाना ज़्यादा खा लेते हैं लेकिन नियमित रूप से साइकिल चलाने की वजह से विश्वास रहता है कि उनकी सेहत और वज़न काबू में रहेगा इसलिए कोई परेशानी नहीं होती.

साइकिल के लिए सड़कों के बारे में सोचना ज़रूरी
कोविड 19 के समय से हम कुछ सीख सकते हैं. पूरे देश को जोड़ने वाली एक रोड पर एक पूरी लेन साइकिल के लिए डेडिकेटेड क्यों नहीं हो सकती? बांस की कस्टमाइज़्ड साइकिलें तैयार करने वाले शशिशेखर यह सवाल उठाते हुए कहते हैं कि यह संभव है, ऐसा हो सकता है अगर इच्छाशक्ति हो तो. बकौल शशिशेखर:

इस बारे में सीएम और पीएम को पत्र लिखने के बारे में सोच रहा हूं. मसलन मुंबई में पूरी एसवी रोड पर अगर एक साइकिल लेन बना दी जाए तो एक बड़ी कम्युनिटी को न केवल फायदा होगा बल्कि उससे बड़ी आबादी साइकिल की तरफ प्रेरित हो सकती है.


आत्मनिर्भर भारत के लिए एक पहल
अस्ल में, कोरोना वायरस महामारी के चलते सरकारों को किसी किस्म की पहल करना ही होगी. नीदरलैंड्स में साइकिल को बहुत बढ़ावा दिया जाता है. वहां प्रधानमंत्री भी साइकिल चलाते हैं. साथ ही, नीदरलैंड्स में साइकिल से ही ट्रैफिक की समस्या पर काबू पाया गया. लेकिन, यह भी एक मसला है कि भारत अब भी बेहतर क्वालिटी की साइकिलों के लिए विदेशों से आयात पर निर्भर है.

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शशिशेखर बांस की साइकिलें लोगों की ज़रूरत के हिसाब से बनाकर देते हैं.


इस बारे में कैप्टन शशिशेखर ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के कॉंसेप्ट के चलते अगर हीरो जैसी बड़ी साइकिल निर्माता कंपनियां साइकिल के बेहतर पुर्ज़ों का उत्पादन कर पाएं तो क्वालिटी सुधारने के लिए हमें विदेशों की तरफ नहीं देखना होगा. दूसरी तरफ, साइकिल चलाना भारत की आत्मनिर्भरता इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि आत्मनिर्भर समाज और फिट इंडिया के लिए भी मंत्र साबित हो सकता है.

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