अब भारत में भी गर्भ से निकालकर शिशुओं का किया जा सकेगा इलाज

डॉक्टर इलाज के बाद शिशु को ऑपरेशन कर दोबारा गर्भ में पहुंचा देंगे. ब्रिटेन में डॉक्टरों ने किया था इस तरह का सफल ऑपरेशन.

News18Hindi
Updated: June 5, 2019, 11:32 AM IST
अब भारत में भी गर्भ से निकालकर शिशुओं का किया जा सकेगा इलाज
गुजरात के अहमदाबाद में इस साल शुरू हो जाएगी शिशुओं को गर्भ से निकालकर इलाज करने की सुविधा.
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Updated: June 5, 2019, 11:32 AM IST
क्या ये संभव है कि गर्भस्थ शिशु को कोई बीमारी हो तो उसे बाहर निकालकर उसका इलाज किया जाए और फिर वापस गर्भ में पहुंचा दिया जाए. सुनने में अजीब लगता है लेकिन अब ये भारत में संभव है. अमूमन गर्भस्थ शिशुओं में कोई गंभीर बीमारी होने पर डॉक्टर अबॉर्शन की ही सलाह देते हैं. अब ऐसा नहीं होगा. अब डॉक्टर गर्भस्थ शिशुओं की गंभीर बीमारी का इलाज कर सकेंगे.

सबसे पहले ब्रिटेन में डॉक्टरों ने कीहोल सर्जरी कर गर्भ से शिशु को बाहर निकालकर इलाज के बाद दोबारा उसे गर्भ में पहुंचा दिया था. अब भारत में गुजरात के अहमदाबाद में सिविल अस्पताल के इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजीज एंड रिसर्च सेंटर में गर्भस्थ शिशु को बाहर निकालकर इलाज किया जा सकेगा. इंस्टीट्यूट में यह सुविधा इसी साल शुरू हो जाएगी.

तीन चरण में होगी 'फीटल सर्जरी'
सोनोग्राफी के जरिये गर्भावस्था में शिशु की शारीरिक परेशानियों के बारे में पता किया जाता सकता है. डॉक्टर इसमें रीढ़ की हड्डी, न्यूरो, हृदय या दूसरी शारीरिक तकलीफों का पता लगने पर शिशु को गर्भ से बाहर निकालकर इलाज कर सकेंगे. मेडिकल साइंस की भाषा में इसे 'फीटल सर्जरी' कहा जाता है. यह सर्जरी तीन चरण में पूरी होगी. पहला, शिशु को बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन. दूसरा, बीमारी का इलाज करना और तीसरा दोबारा गर्भ में पहुंचाना.

अभी चलन में है फीटल एंडोस्कोपी
फीटल एंडोस्कोपी फीटल सर्जरी से मिलती जुलती प्रक्रिया है. इसमें ऑपरेशन के जरिये गर्भस्थ शिशु की गंभीर बीमारियों का इलाज गर्भ में ही किया जाता है. इस तरह का उपचार जुड़वां बच्चों के मामलों में किया जाता है. दरअसल, इसकी जरूरत तब पड़ती है जब एक शिशु को मां की ओर से मिलने वाली खुराक ज्यादा और एक को कम मिलती है. इसमें एक शिशु कमजोर हो जाता है. अब इस परेशानी के इलाज में भी फीटल सर्जरी की जा सकेगी.

फीटल सर्जरी में लगते हैं कई विशेषज्ञ
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इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजीज एंड रिसर्च सेंटर के निदेशक और गाइनी डिपार्टमेंट के प्रमुख विनीत मिश्रा ने बताया कि अस्पताल में फीटल सर्जरी से इलाज करना काफी जटिल होता है. इसमें न्यूरो, हृदय, रीढ़ की हड्डी के विशेषज्ञों की भी जरूरत होती है. इसके लिए इंस्टीट्यूट में विशेष व्यवस्था की जा रही है. देश में गर्भस्थ शिशुओं में गंभीर बीमारी का औसत एक हजार शिशुओं में एक का हो सकता है. यह तकनीक ऐसे शिशुओं के लिए रामबाण का काम करेगी.

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First published: June 5, 2019, 11:32 AM IST
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