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झारखंड चुनाव में एनडीए के सहयोगी दलों की आपसी तकरार का बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में भी दिखेगा असर

News18Hindi
Updated: November 26, 2019, 1:17 PM IST
झारखंड चुनाव में एनडीए के सहयोगी दलों की आपसी तकरार का बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में भी दिखेगा असर
एनडीए के सहयोगी दलों बीजेपी, एलजेपी और जेडीयू के झारखंड चुनाव में एकदूसरे के खिलाफ प्रत्‍याशी उतारने का असर बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में दिख सकता है. (सांकेतिक फोटो)

जनता दल यूनाइटेड (JD-U) ने छोटे राज्‍यों में विधायकों (MLAs) की संख्‍या में वृद्धि कर अपना दायरा बढ़ाने का फैसला किया है. जेडीयू 2020 तक छोटे राज्‍यों (Smaller States) में प्रत्‍याशी उतारकर अपना मतप्रतिशत (Votes Percentage) बढ़ाने और 2020 तक राष्‍ट्रीय पार्टी (National Party) का दर्जा हासिल करना चाहता है. वहीं, एलजेपी (LJP) ने भी राज्‍य की 50 सीटों पर अपने प्रत्‍याशी उतारने की घोषणा की है.

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  • Last Updated: November 26, 2019, 1:17 PM IST
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अशोक मिश्रा

पटना/रांची. झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में (Jharkhand Assembly Election 2019) बीजेपी के सभी सहयोगी दल अलग-अलग धुन पर गीत गुनगुना रहे हैं. एनडीए (NDA) के सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड (JDU) और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) बीजेपी से अलग अकेले दम चुनाव लड़े रहे हैं. वहीं, राज्‍य में बीजेपी (BJP) की एकमात्र आधिकारिक सहयोगी पार्टी ऑल झारखंड स्‍टूडेंट्स यूनियन (AJSU) भी अलग राग अलाप रही है. एनडीए के सहयोगी दलों के एकदूसरे के खिलाफ तलवारें खींचने से राज्‍य में बीजेपी सरकार की वापसी की संभावनाएं कमजोर हो रही हैं. बता दें कि जेडीयू और एलजीपी बिहार (Bihar) व राष्‍ट्रीय स्‍तर (National Lavel) पर बीजेपी के सहयोगी दल (Allies) हैं.

AJSU राज्‍य की 27 सीटों पर बीजेपी को दे रही सीधी चुनौती
झारखंड में AJSU आधिकारिक तौर पर अलग तो नहीं हुई है, लेकिन राज्‍य की 81 में 27 सीटों पर अपने बड़े सहयोगी दल बीजेपी को सीधी चुनौती दे रही है. दरअसल, दोनों सहयोगियों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद भी सीटों के बंटवारे (Seat Sharing) पर सहमति नहीं बन पाई थी. बता दें कि साल 2000 में बिहार से अलग झारखंड के गठन के बाद से ही दोनों पार्टियां राज्‍य में एनडीए में शामिल हैं. बीजेपी ने AJSU अध्‍यक्ष सुदेश महतो के खिलाफ सिली (Silli) विधानसभा सीट पर कोई प्रत्‍याशी नहीं उतारा है. अजसू ने भी जमशेदपुर पूर्वी सीट से मैदान में उतरे सीएम रघुबर दास (CM Raghubar Das) के खिलाफ कोई प्रत्‍याशी खड़ा नहीं किया है.

जेडीयू ने रघुबर दास के खिलाफ खड़े प्रत्‍याशी का किया समर्थन
विधानसभा चुनाव 2014 में अजसू ने झारखंड की आठ सीटों पर जीत दर्ज की थी. इनमें सिली, लोहारदागा, तमार, रामगढ़, चंदनकियारी, तुंदी, बड़कागांव और जुगसलाई शमिल हैं. इस बार बीजेपी अजसू को 12 से ज्‍यादा सीटें देने को तैयार नहीं थी. इस बीच जेडीयू ने जमशेदपुर पूर्वी सीट (Jamshedpur East Seat) पर निर्दलीय प्रत्‍याशी व पूर्व सीएम सरयू राय (Saryu Rai) का समर्थन कर बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. इस बार जब राय का नाम बीजेपी प्रत्‍याशियों (BJP Candidates) की सूची से गायब हुआ तो उन्‍होंने बीजेपी के सीएम प्रत्‍याशी रघुबर दास के खिलाफ ही चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी. राय का कहना है कि उन्‍होंने बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की दोस्‍ती की खातिर बीजेपी के टिकट पर मैदान में उतरने से इनकार किया है. वहीं, जेडीयू ने भी जमशेदपुर पूर्वी सीट पर उतारे प्रत्‍याशी संजय ठाकुर का नाम वापस ले लिया है. इसके अलावा जमशेदपुर पश्चिमी सीट से संजीव आचार्य का नाम भी वापस ले लिया है. हालांकि, नीतीश कुमार ने राय के पक्ष में चुनाव प्रचार करने से साफ इनकार कर दिया है.

झारखंड के कद्दावर नेता सरयू राय ने जहां रघुबर दास सरकार में रहते हुए भ्रष्‍टाचार का मामला उठाया. वहीं, लालू प्रसाद के खिलाफ चारा घोटाला मामला उजागर कराने में अहम भूमिका निभाई थी.

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सरयू राय ने बीजेपी सरकार में रहते उठाया था भ्रष्‍टाचार का मुद्दा
झारखंड की रघुबर दास सरकार में रहते हुए भी राय ने कई बार भ्रष्‍टाचार (Corruption) का मामला उठाया था. बता दें कि संयुक्‍त बिहार और अब झारखंड के वरिष्‍ठ नेता राय ने बिहार के पूर्व मुख्‍यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad yadav) के खिलाफ चारा घोटाला (Fodder Scam) उजागर करने में अहम भूमिका निभाई थी. बताया जा रहा है कि जेडीयू के अलाव अजसू ने भी राय को अपना मौन समर्थन दे दिया है. वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) खुले तौर पर राय का समर्थन करने की अपील कर रहा है. स्‍पष्‍ट तौर पर झारखंड में बीजेपी और जेडीयू एकदूसरे खिलाफ तलवारें खींचे खड़े हैं.

JDU ने भी राज्‍य की 25 सीटों पर उतार दिए हैं अपने प्रत्‍याशी
जेडीयू ने राय को समर्थन देने के साथ ही राज्‍य की 25 सीटों पर अपने प्रत्‍याशी उतारने की घोषणा कर दी है. जदयू के झारखंड अध्‍यक्ष सल्‍खान मुर्मू ने कहा कि पार्टी ज्‍यादा से ज्‍यादा सीटों पर संभावनाएं ढूंढ रही है. मुर्मू खुद मझगांव सीट से मैदान में हैं. उन्‍होंने कहा कि जेडीयू बिहार और राष्‍ट्रीय स्‍तर पर बीजेपी के साथ है, लेकिन अन्‍य राज्‍यों में पार्टी अकेले दम मैदान में उतरेगी. उनके मुताबिक, जेडीयू इस तरह छोटे राज्‍यों में अपना मत-प्रतिशत बढ़ाकर 2020 तक राष्‍ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करना चाहती है. बता दें कि झारखंड विधानसभा चुनाव 2005 में जेडीयू ने राज्‍य में 18 सीटों पर प्रत्‍याशी उतारे और 6 पर जीत हासिल की थी. इसके बाद राज्‍य में उसके विधायकों की संख्‍या घटती गई. 2009 चुनाव में पार्टी के 14 में से सिर्फ 2 प्रत्‍याशी ही जीत पाए.

LJP ने झारखंड की 50 सीटों पर प्रत्‍याशी उतारने की घोषणा की
जेडीयू दिल्‍ली और जम्‍मू-कश्‍मीर विधानसभा चुनावों में भी पार्टी प्रत्‍याशियों को उतारने की योजना बना रही है. वहीं, बिहार और अरुणाचल प्रदेश में जेडीयू मजबूत पार्टी के तौर पर पहचान बना चुकी है. इसके अलावा एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान ने भी झारखंड में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. उन्‍होंने राज्‍य की 50 सीटों पर पार्टी प्रत्‍याशी उतारने की घो‍षणा कर दी है. इससे पहले एलजेपी राज्‍य में बीजेपी के साथ गठबंधन चाहती थी. लेकिन, बीजेपी नेताओं का मानना था कि राज्‍य में पार्टी की कोई पकड़ नहीं है. झारखंड में बीजेपी, जेडीयू और एलजेपी के बीच का ये विवाद निश्चित तौर पर बिहार विधानसभा चुनाव 2020 पर भी असर डालेगा. तय है कि झारखंड की तकरार बिहार में सहयोगी दलों को चोट पहुंचाएगी. बता दें कि झारखंड में 30 नवंबर से 20 दिसंबर के बीच पांच चरणों में मतदान होना है. मतगणना 23 दिसंबर को होगी.
(लेखक वरिष्‍ठ पत्रकार हैं. लेख उनके निजी विचार हैं.)

 

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First published: November 26, 2019, 1:10 PM IST
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