जानिए बिहार चुनाव में सूरत BJP के वॉलंटियर कैसे अदा कर रहे हैं महत्वपूर्ण रोल

बिहार चुनाव में आज पहले फेज की वोटिंग है.
बिहार चुनाव में आज पहले फेज की वोटिंग है.

बिहार में मजदूरों का एक बड़ा वर्ग जो गुजरात के सूरत (Surat) में नौकरी करता है उनसे बीजेपी के वॉलंटियर तकरीबन रोज बात करते हैं. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट कहती है कि सूरत में 50 बीजेपी वॉलंटियर तकरीबन हर दिन 100 उन अप्रवासी मजदूरों (Migrant Workers) से बातचीत कर रहे हैं जो गुजरात में काम करते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 28, 2020, 5:23 AM IST
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नई दिल्ली. देश के राजनीतिक तौर पर सर्वाधिक मुखर जाने वाले बिहार में  71 सीटों के लिए पहले फेज की वोटिंग (Bihar Election First Phase Voting) आज होगी. राज्य में इस वक्त चुनावी मुद्दे के तौर पर बेरोजगारी का मसला जबरदस्त तरीके से छाया हुआ है. राष्ट्रीय जनता दल के नेता और सीएम प्रत्याशी तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने जीतने पर दस लाख सरकारी नौकरियों का वादा किया है. लेकिन इस बीच बिहार में मजदूरों का एक बड़ा वर्ग जो गुजरात के सूरत में नौकरी करता है उनसे बीजेपी के कार्यकर्ता तकरीबन रोज बात करते हैं. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट कहती है कि सूरत में 50 बीजेपी कार्यकर्ता तकरीबन हर दिन 100 उन अप्रवासी मजदूरों से बातचीत कर रहे हैं जो गुजरात में काम करते हैं. इन अप्रवासी मजदूरों और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच की कहानी अप्रैल महीने में शुरू हुई थी जब देशभर में लॉकडाउन लगा हुआ था.

लॉकडाउन में सूरत में मुश्किलों का दौर, तेजस्वी के फोन पर गुजरात के सीएम ने पहुंचाई मदद
दरअसल 24 मार्च को जब कोरोना के मद्देनजर देशभर में लॉकडाउन लगा तो बड़ी संख्या में बिहार के अप्रवासी मजदूर गुजरात के सूरत में फंस गए. कई दिनों तक मुश्किल में रहने के बाद मजदूरों ने बिहार की मढ़ौरा सीट के आरजेडी विधायक जितेंद्र राय से संपर्क साधा. अप्रवासी उन्हीं के इलाके के रहने वाले थे. जितेंद्र राय ने तेजस्वी यादव को इस बारे में बताया तो उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से बातचीत की. तब बीजेपी के एक कार्यकर्ता अकरम शाह, जो इस वक्त राज्य बीजेपी अध्यक्ष सीआर पाटिल के साथ काम करते हैं, इन अप्रवासी मजदूरों की मदद के लिए पहुंचे. उन्होंने अप्रवासी मजदूरों की मदद की और महीने भर का राशन उपलब्ध करवाया. अकरम शाह ने बाद में इन लोगों की मदद श्रमिक ट्रेन के जरिए बिहार पहुंचने में भी की.

बिहार में सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा बीजेपी
अब बिहार में सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा बीजेपी की सूरत विंग के कार्यकर्ता कोशिश कर रहे हैं जिन अप्रवासी मजदूरों की उन्होंने मदद की थी वो लगातार संपर्क करें. लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की खबर कहती है कि इनमें से कई अप्रवासियों का मानना है कि ये दांव बीजेपी को उल्टा भी पड़ सकता है. यह सच है कि अप्रवासी मजदूरों को मदद पहुंचाई गई लेकिन लॉकडाउन के बाद उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. तब सूरत में अप्रवासी मजदूरों को लेकर काफी बवाल भी हुआ था.



स्पेशल श्रमिक ट्रेनों के जरिए पहुंचाने की करवाई थी व्यवस्था
गौरतलब है सूरत की फैक्टरियों में बिहार के करीब 4 लाख लोग काम करते हैं. लॉकडाउन के दौरान सूरत में अप्रवासियों से जुड़ी हिंसा की करीब 6 घटनाएं सामने आई थीं. बीजेपी के पदाधिकारी रह चुके कपड़ों का व्यवसाय करने वाले अजय चौधरी बताते हैं कि उन्होंने मजदूरों के लिए स्पेश श्रमिक ट्रेन में घर लौटने की व्यवस्था करवाई थी. वो कहते हैं-'हमारे वॉलंटियर उन लोगों से लगातार संपर्क में बने हुए हैं. वॉलंटियर उन लोगों से कहते हैं कि आप बिहार चुनाव के बाद ही वापस आइए.' हालांकि अजय चौधरी भी मानते हैं कि मजदूरों में नीतीश कुमार की उस सलाह को लेकर गुस्सा है जब उन्होंने कहा था कि कोरोना के समय जो जहां है वहीं रहे.
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