COVID-19 के अंधेरे से अनलॉक की रोशनी तक कैसे पहुंचा धारावी?

COVID-19 के अंधेरे से अनलॉक की रोशनी तक कैसे पहुंचा धारावी?
मुंबई स्थित धारावी में नए COVID केसों की संख्या में बेहद कमी दर्ज की गई. फाइल फोटो.

दुनिया के नक्शे पर नए Hot Spots के रूप में उभर रहे Africa के बेहद घने रिहाइशी इलाके हों या Brazil की बड़ी झुग्गी बस्तियां हों, Mumbai के Dharavi से अगर सबक लें तो Coronavirus संक्रमण पर काबू पाने की तरकीबें समझ सकते हैं. एक समय बेकाबू दिख रही महामारी से धारावी कैसे Unlock की स्थिति तक पहुंचा?

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देश भर में Corona virus संक्रमण के केसों की संख्या 4 लाख 10 हज़ार के पार जाने के बीच Asia की सबसे बड़ी निचली बस्ती धारावी से राहत की खबर आई. 20 जून को एक दिन में सिर्फ 7 नए केस यहां सामने आने के बाद कुल केस 2158 हुए, जिनमें से 1057 मरीज़ों के रिकवर होने की भी खबर है. Mumbai में 2400 वर्ग किलोमीटर में फैली इस स्लम में Covid-19 के खिलाफ जंग जिस तरह लड़ी गई, उसमें यहां तक पहुंचने में वक्त तो लगा, लेकिन सकारात्मक नतीजा आया.

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महाराष्ट्र में अप्रैल के महीने से कोविड 19 का सबसे बड़े हॉटस्पॉट बन गए धारावी में 1 अप्रैल के बाद से पहली बार नए केसों की संख्या इकाई में दर्ज की गई. यही नहीं, अप्रैल के आखिरी हफ्ते तक यहां केसों के दोगुने होने में 18 दिनों का समय लग रहा था, जो 20 जून को 78 दिनों तक हो गया. मुंबई में 34 दिनों में केस दोगुने होने की दर से धारावी की दर बहुत बेहतर है. धारावी में कैसे संक्रमण पर काबू पाया गया, यह जानना बहुत मददगार साबित हो सकता है.



क्या थीं धारावी में संक्रमण संबंधी चुनौतियां?
यहां संक्रमण के खतरे से लड़ने के लिए किन रणनीतियों पर काम हुआ, उसके बारे में जानने से पहले ये समझना ज़रूरी है कि यहां चुनौतियां किस किस्म की थीं.

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लॉकडाउन के दौरान धारावी से डेढ़ लाख से ज़्यादा प्रवासी अपने गृह प्रदेशों को लौटे.


1. धारावी बेहद घनी बस्ती है, जहां 10 गुणा 10 के कमरों में जहां 8 से 9 लोग रहते हैं.
2. ज़्यादातर लोग चूंकि रोज़ कमाकर खाने वाले हैं, इसलिए लोग लंबे समय तक घरों में नहीं रह सकते थे. उन्हें काम, पैसों या सप्लाई किए जा रहे खाने पीने के लिए घर से निकलना ही होता था.
3. यहां ज़्यादातर लोग शेयर्ड टॉयलेट और बाथरूम इस्तेमाल करते हैं, इसलिए सैनिटाइज़ेशन यहां बड़ी चुनौती था.
4. इस घनी बस्ती में सोशल डिस्टेंसिंग और आइसोलेशन या क्वारंटाइन की सुविधा नहीं थी, इसलिए इसके लिए बड़े पैमाने पर अलग व्यवस्थाएं करना ही थीं.

एक समय नामुमकिन लग रहा था काबू पाना!
1 अप्रैल को जब धारावी में पहला केस सामने आया था, तभी न सिर्फ स्लम बल्कि पूरा मुंबई प्रशासन सचेत हो गया था और चिंता तो देश भर में फैल गई थी क्योंकि इतनी घनी बस्ती में संक्रमण फैलने पर काबू पाना जैसे असंभव सी बात लग रही थी. ऐसे में, प्रशासन ने दो बातों पर सबसे पहले ध्यान दिया. एक तो बस्ती के एंट्री और एग्ज़िट पॉइंट सील किए गए. दूसरे, यहां सैनिटेशन की योजना बनाई गई.

लोगों को बीएमसी पर नहीं था विश्वास!
ब्रह्नमुंबई महानगर पालिका ने जब धारावी में टेस्टिंग और स्क्रीनिंग की कोशिशें शुरू कीं, तो लोगों ने बीएमसी स्टाफ से अपने परिवार के सदस्यों के बारे में और अपनी व परिवार की गंभीर बीमारियों के बारे में सही जानकारी नहीं दी क्योंकि उन्हें बीएमसी पर विश्वास नहीं था. खबरों के मुताबिक इसके बाद बीएमसी ने 350 प्राइवेट स्वास्थ्यकर्मियों को यहां बुलाया, जो बीएमसी और धारावी के लोगों के बीच सामंजस्य बना सके.

बीएमसी उपायुक्त किरण दिघावकर के हवाले से खबरों में कहा गया कि लोगों को यही लगा था कि बीएमसी के लोग उन्हें उनके घरों से निकालने पहुंचे हैं. इसके बाद प्राइवेट प्रैक्टिशनरों की मदद से लोगों का विश्वास बना. फिर बीएमसी ने यहां 4.8 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की, जिसमें करीब सवा लाख वरिष्ठ नागरिक शामिल थे. दिघावकर के मुताबिक इस तरह की प्रो एक्टिव स्क्रीनिंग और मॉनिटरिंग केस घटाने में मददगार साबित हुई.

प्रवासियों का कूच करना बड़ा कारण!
बीएमसी ने माना कि धारावी से प्रवासी कामगारों के बड़ी संख्या में जाने से यहां केस लोड प्रशासन पर कम हुआ. दिघावकर की मानें तो 1.5 लाख प्रवासियों के चले जाने से धारावी में मॉनिटरिंग और जांच व इलाज संबंधी सेवाओं में चूंकि दबाव कम हुआ इसलिए बेहतर ढंग से यहां काम हो सका.

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करीब 10 लाख की आबादी वाली घनी स्लम धारावी में पहला COVID केस 1 अप्रैल को आया था.


महीनों की मेहनत रंग लाई
खबरों की मानें तो अप्रैल से अब तक प्रशासन ने धारावी में 47,500 घरों तक जाकर तापमान चेक किया. फीवर क्लीनिक खोले गए. जिन लोगों में कोविड 19 संबंधी लक्षण दिखे, उन्हें नज़दीकी स्कूलों, क्लबों में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटरों में भेजा गया. इसके अलावा, सख्त लॉकडाउन के दौरान यहां लोगों को भोजन मुहैया कराया गया. टॉयलेट्स में कीटनाशक छिड़काव कर सफाई व्यवस्था की गई.

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जहां 20 अप्रैल को कंपाउंड डेली ग्रोथ रेट 23 फीसदी थी, वहीं 20 जून को यह दर 0.85 फीसदी तक कम हो गई. इसका मतलब है कि धारावी में नए केसों में बेहद कमी आई. अब खबर है कि धारावी को अनलॉक किए जाने पर बीएमसी विचार कर रही है. जल्द ही यहां छोटे कारोबार, कुम्हारी के काम जैसे धंधे कम से कम स्टाफ के साथ शुरू किए जा सकते हैं. अब प्रशासन का फोकस माटुंगा लेबर कैंप, 90 फीट रोड, धारावी क्रॉस रोड और कुंची कोरवे नगर जैसे हॉटस्पॉटों पर है.
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