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Ginkgo Biloba: 29 करोड़ साल पुराना है जिंको बाइलोबा पेड़ का इतिहास, औषधीय तत्व जानकर रह जाएंगे दंग

Ginkgo Biloba: जिंको बाइलोबा करीब 29 करोड़ साल पुराना पेड़ है, जो आज कुछ ही जगहों पर देखने को मिलता है. वहीं, इसकी पत्तियां हरी होती हैं, लेकिन कुछ समय बाद पीले रंग की दिखाई देती हैं, जो प्राकृतिक सौंदर्य को भी बढ़ाती हैं. इसे कई बीमारियों के इलाज के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है.

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    (रिपोर्ट- हिमांशु जोशी)

    नैनीताल. दुनिया में कुछ पेड़-पौधे ऐसे भी हैं, जो फोसिल प्लांट के रूप में आज भी देखने को मिलते हैं. इन्हीं में एक नाम शुमार है जिंको बाइलोबा (Ginkgo Biloba) का. यह करीब 29 करोड़ साल पुराना पेड़ है, जो आज कुछ ही जगहों पर देखने को मिलता है. उत्तराखंड के नैनीताल में भी इन्हें कल्टीवेटेड फॉर्म में रखा गया है. जिंको बाइलोबा इस वक्‍त नैनीताल के राजभवन, बॉटनिकल गार्डन और डीएसबी परिसर के बॉटनी डिपार्टमेंट में है.

    जिंको बाइलोबा चीन का राष्ट्रीय वृक्ष है. यह एक लिविंग फोसिल है, जिसके बाकी प्लांट ग्रुप इस दुनिया से खत्म हो चुके हैं और अपने समय की यह केवल इकलौती प्रजाति बची हुई है. इसको ‘मैडेहेयर ट्री’ नाम से भी जाना जाता है. शोध के अनुसार, आज से करीब 29 करोड़ साल पहले इसे धरती पर दर्ज किया गया है. इसकी लंबाई 20 से 35 मीटर तक होती है.

    वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ ललित तिवारी ने बताया कि इस पेड़ का नाम जिंको बाइलोबा इसकी पत्तियों की वजह से पड़ा है. इसकी पत्तियां हरी होती हैं लेकिन कुछ समय बाद पीले रंग की दिखाई देती हैं, जो प्राकृतिक सौंदर्य को भी बढ़ाती हैं.

    कई बीमारियों का जिंको बाइलोबा से होता है इलाज
    प्रोफेसर तिवारी ने बताया कि चीन में इसे कई बीमारियों में इस्तेमाल किया जाता है. यह एक ब्रेन टॉनिक है, जिससे याददाश्त तेज होती है. सांसों से जुड़ी बीमारी, कफ, फीवर, डायरिया और दांत दर्द में भी इसे प्रयोग किया जाता है. इसमें एंटीऐजिंग तत्व भी हैं. हालांकि इसका ज्यादा इस्तेमाल सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकता है.

    Tags: Nainital news

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