जानिए वो 5 कारण जिनकी वजह से सपा-बसपा के गठबंधन में आई दरार?

चुनाव से पहले जिस समय सपा-बसपा ने गठबंधन का ऐलान किया था तब भी राजनीतिक विश्लेषक मानते थे कि ये 'बेमेल' जोड़ी है.

News18Hindi
Updated: June 3, 2019, 6:28 PM IST
जानिए वो 5 कारण जिनकी वजह से सपा-बसपा के गठबंधन में आई दरार?
बीएसपी अध्यक्ष मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव.
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Updated: June 3, 2019, 6:28 PM IST
लोकसभा चुनाव बीतते ही उन दलों के 'दिलों में दूरिया' आने लगी हैं, जो लंबी रेस का घोड़ा साबित होने का दंभ भरते थे. खबर है कि यूपी में जल्द ही सपा-बसपा का गठबंधन टूट सकता है और इसका ऐलान जल्द ही हो जाएगा. चुनाव से पहले जिस समय सपा-बसपा ने गठबंधन का ऐलान किया था तब भी राजनीतिक विश्लेषक मानते थे कि ये 'बेमेल' जोड़ी है. फिलहाल ये जोड़ी टूट के कगार पर है. बसपा की अध्यक्ष मायावती ने 11 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में अकेले दम पर उतरने का मन बनाया है. उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से कहा है कि वो उपचुनाव की तैयारी शुरू कर दें.

इन 5 वजहों से आया मनमुटाव
1. दिल्ली के सेंट्रल ऑफिस में सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में मायावती गठबंधन से नाखुश नजर आईं. उन्होंने कहा कि गठबंधन से पार्टी को फायदा नहीं हुआ. यादव का वोट हमारी पार्टी को ट्रांसफर नहीं हुआ. यानी साफतौर पर मायवती मानती हैं कि गठबंधन जरूर किया यादव वोट उनकी पार्टी को नहीं मिला और उन्हें इसका नुकसान उठाना पड़ा.

2. मायावती के फैसले की दूसरी वजह हो सकती है शिवपाल सिंह यादव की पार्टी के उम्मीदवार. कहीं न कहीं उन्हें ये लगता है कि मुलायम सिंह परिवार में पारिवारिक विवाद के कारण उन्हें नुकसान हुआ. कई जगहों पर शिवपाल सिंह की पार्टी ने अपने उम्मीदवार खड़े किए और उन्होंने वोट काटने का काम किया.

3. पिछली बार मायावती को लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी, जबकि इस बार मायावती को 10 सीटें मिली हैं. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि BSP के लिए ये चुनाव नया जीवनदान साबित हुआ है. ऐसे में शायद मायावती सोच रही होंगी कि क्यों ने उपचुनाव में भी किस्मत आजमाई जाए.

4. इस चुनाव में BJP के खिलाफ महागठबंधन बन रहा था. विपक्ष के कई ऐसे नेता थे, जो PM पद पर दावेदारी जता रहे थे, उनमें से एक थीं मायावती. एक स्थिति ये भी बन रही थी कि बीएसपी, सपा को विधानसभा चुनाव में मदद करेगी ताकि अखिलेश यादव दोबारा मुख्यमंत्री बन सकें. जबकि बीएसपी का प्लान ये था कि ज्यादा लोकसभा सीट आने की स्थिति में सपा उन्हें प्रधानमंत्री के तौर पर प्रोटेक्ट करेगी.

5. बीएसपी और सपा का एक मजबूत गठबंधन साथी थे चौधरी अजित सिंह. लेकिन अजित सिंह अपने किसी भी क्षेत्र में जाट वोट गठबंधन को दिलाने में नाकामयाब हो गए. यहां तक कि रालोद के मुखिया अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी की चुनाव में बुरी तरह हार हुई. ऐसे में मायावती सोच रही होंगी कि आगे इस पार्टी के साथ गठबंधन में चलने से कोई फायदा नहीं होने वाला.
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BSP ने जीतीं 10 सीटें, SP ने महज 5
लोकसभा चुनाव में SP-BSP ने मिलकर प्रत्याशी उतारे. BSP ने करीब 38 सीटों पर जबकि 37 सीटों पर समाजवादी पार्टी ने प्रत्याशी उतारे थे. चुनावों में BSP के हिस्से 10 और समाजवादी पार्टी के हिस्से में 5 सीटें आईं.

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First published: June 3, 2019, 5:46 PM IST
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