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Ayodhya Case Verdict: जानें, क्‍या है अनुच्‍छेद-142 और फैसले में क्‍यों किया गया इसका जिक्र

News18Hindi
Updated: November 9, 2019, 3:33 PM IST
Ayodhya Case Verdict: जानें, क्‍या है अनुच्‍छेद-142 और फैसले में क्‍यों किया गया इसका जिक्र
सुप्रीम कोर्ट ने राममंदिर निर्माण के लिए बनाई जाने वाले ट्रस्‍ट में निर्मोही अखाड़ा को शामिल करने का आदेश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने संविधान के अनुच्‍छेद-142 (Article 142) का इस्‍तेमाल करते हुए निर्मोही अखाड़ा (Nirmohi Akhara) को मंदिर निर्माण के लिए बनाए जाने वाले ट्रस्‍ट (Trust) में प्रतिनि‍धित्‍व देने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार (Central Government) तीन महीने के भीतर ट्रस्‍ट बनाए. वहीं, शीर्ष अदालत ने अयोध्‍या जमीन विवाद मामले (Ayodhya Land Dispute Case) में निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज कर दिया.

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  • Last Updated: November 9, 2019, 3:33 PM IST
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नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अयोध्‍या जमीन विवाद मामले (Ayodhya Land Dispute Case) में फैसला सुनाते हुए 2.77 एकड़ विवादित जमीन हिंदू पक्षकारों को दे दी है. साथ ही आदेश दिया है कि इस जमीन पर राममंदिर (Ram Temple) का निर्माण किया जाए. मुख्‍य न्‍यायाधीश रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) की अध्‍यक्षता वाली संविधान पीठ (Constitution) ने राममंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार (Central Government) को तीन महीने के भीतर ट्रस्‍ट (Trust) बनाने का आदेश दिया है. पीठ ने निर्मोही अखाड़ा को ट्रस्‍ट में प्रतिनिधित्‍व देने के लिए संविधान के अनुच्‍छेद-142 का इस्‍तेमाल किया. साथ ही मुस्लिम पक्ष को अधिग्रहीत भूमि में या अयोध्‍या में कहीं भी पांच एकड़ जमीन देने को कहा.

अनुच्‍छेद निर्मोही अखाड़ा को हस्‍तक्षेप की अनुमति देता है
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में निर्मोही अखाड़ा (Nirmohi Akhara) का दावा खारिज कर दिया. बावजूद इसके अनुच्‍छेद-142 (Article-142) निर्मोही अखाड़े को मामले में हस्‍तक्षेप की अनुमति देता है. इस अनुच्‍छेद के तहत सुप्रीम कोर्ट अपने अधिकार का इस्‍तेमाल करते हुए किसी भी मामले में पूर्ण न्‍याय (Complete Justice) के लिए इस तरह का फैसला दे सकता है. यह अनुच्‍छेद सुप्रीम कोर्ट को किसी मामले में किसी व्‍यक्ति या संस्‍था का हस्‍तक्षेप (Interference) सुनिश्चित करने, किसी दस्‍तावेज (Document) को पेश करने की मंजूरी देने या किसी जांच (Investigation) का आदेश देने की शक्ति देता है.

निर्मोही अखाड़ा ने मांगा था संपत्ति के प्रबंध का अधिकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने 2 के मुकाबले एक के बहुमत (majority) से अयोध्‍या की विवादित जमीन (Disputed Land) को रामलला विराजमान (Ramlala Virajman), सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड (Sunni Waqf Board) और निर्मोही अखाड़ा के बीच तीन बराबर हिस्‍सों में बांटने का आदेश दिया था. इसके बाद निर्मोही अखाड़े ने इलाहाबाद होईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि अखाड़ा सदियों से भगवान राम (Lord Ram) का अनुयायी है. साथ ही अखाड़ा ने मंदिर में सेवायत अधिकार देने की मांग की थी. अखाड़ा ने दावा किया था कि उन्‍हें देवता की संपत्ति के प्रबंधन का अधिकार है. अब इस फैसले के 9 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में निर्मोही अखाड़ा के दावे को खारिज कर दिया.

ताजमहल की सफाई से लेकर भोपाल गैस कांड तक में हुआ इस्‍तेमाल
इससे पहले अनुच्‍छेद-142 का इस्‍तेमाल समाज के वंचित तबके को पूर्ण न्‍याय देने या पर्यावरण को बचाने के लिए ही किया गया था. वहीं, इस अनुच्‍छेद का इस्‍तेमाल फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं में शामिल सल्‍फर के कारण पीले हो रहे ताजमहल को साफ करने का आदेश देने के लिए भी किया गया. इसी तरह भोपाल गैस त्रासदी के हजारों पीडि़तों को राहत देने के लिए भी इस अनुच्‍छेद का इस्‍तेमाल किया गया था. बता दें कि यूनियन कार्बाइड मामले में हजारों लोग प्रभावित हुए थे. अनुच्‍छेद-142 का इस्‍तेमाल सजा पूरी होने के बाद भी जेलों में बंद हजारों कैदियों को रिहा करने के लिए भी किया जा चुका है. वहीं, दो जजों की एक बेंच ने बाबरी मस्जिद विध्‍वंस मामले में आरोपियों के मामले को 25 साल से लंबित रहने के कारण रायबरेली से लखनऊ स्‍थानांतरित करने के लिए अनुच्‍छेद-142 का इस्‍तेमाल किया था.
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First published: November 9, 2019, 3:31 PM IST
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