Analysis: NRC की आखिरी सूची के बाद बांग्लादेशी-रोहिंग्या जैसे अवैध अप्रवासियों का क्या होगा?

गृह मंत्री अमित शाह ने हाल में कहा कि सरकार इंच-इंच जमीन से अवैध अप्रवासियों को देश से बाहर करेगी. 31 जुलाई को एनआरसी की अंतिम सूची जारी होनी है. ऐसे में सवाल उठता है कि जरूरी दस्तावेज मुहैया नहीं कराने पर क्या वाकई सरकार अवैध अप्रवासियों का प्रत्यर्पण कर सकती है.

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Updated: July 18, 2019, 9:17 PM IST
Analysis: NRC की आखिरी सूची के बाद बांग्लादेशी-रोहिंग्या जैसे अवैध अप्रवासियों का क्या होगा?
असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC) की अंतिम सूची 31 जुलाई को जारी की जानी है. जिन लोगों का नाम इस सूची में नहीं होगा उनके पास अपील करने के कई विकल्प होंगे.
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Updated: July 18, 2019, 9:17 PM IST
असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC) की अंतिम सूची 31 जुलाई को जारी की जानी है. जिन लोगों का नाम इस सूची में नहीं होगा उनके पास अपील करने के कई विकल्प होंगे. वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि सरकार देश की इंच-इंच जमीन से अवैध प्रवासियों को बाहर करेगी. अब सवाल उठता है कि दस्तावेज मुहैया नहीं कराने पर क्या वाकई सरकार अवैध अप्रवासियों का प्रत्यर्पण कर सकती है. बीजेपी ने यह भी वादा किया है कि एनआरसी को पूरे देश में लागू किया जाएगा.

अंतिम सूची से बाहर लोगों की संख्या स्पष्ट नहीं
एनआरसी की अंतिम सूची से बाहर रहने वालों की संख्या के बारे में अब तक कोई अंतिम जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है. साथ ही यह भी नहीं बताया गया है कि कितने लोगों का प्रत्यर्पण किया जाएगा. बता दें कि एनआरसी के अंतिम मसौदे में 40 लाख आवेदकों को शामिल नहीं किया गया था यानी उन्हें भारत का नागरिक नहीं माना गया था. इसके बाद अंतिम मसौदे में शामिल 2.89 करोड़ लोगों में से एक लाख लोगों को सत्यापन प्रक्रिया के बाद बाहर कर दिया गया.

बढ़ सकती है सूची से बाहर लोगों की संख्या

अभी यह भी नहीं कहा जा सकता कि सूची से बाहर होने वालों की संख्या 41 लाख ही रहेगी. यह संख्या बढ़ सकती है क्योंकि दो लाख अन्य लोगों के खिलाफ भी आपत्ति दर्ज कराई गई है. हालांकि, सूची में नए नाम जोड़े जाने की उम्मीद भी है. सूची से बाहर किए गए 40 लाख लोगों में से 36 लाख ने नागरिकता का दावा पेश कर दिया है. हो सकता है कि इनमें कुछ को दस्तावेजों के आधार पर अपनी नागरिकता साबित करने में कामयाबी मिल जाए.

सूची से बाहर किए गए 40 लाख लोगों में से 36 लाख ने नागरिकता का दावा पेश कर दिया है.


नागरिकता संशोधन बिल हो सकता है पारित
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संभावना यह भी है कि सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक को संसद में दोबारा पेश कर पारित कराए. अगर सरकार राज्यसभा में भी विधेयक को पारित करा लेती है तो सूची से बाहर हुए हिंदू नागरिक अंतिम सूची में शामिल किए जाने का दावा करने के योग्य हो जाएंगे. ज्यादातर नेताओं का कहना है कि अंतिम मसौदे में मुस्लिमों से ज्यादा हिंदू शामिल किए जाने से छूट गए हैं. अगर विधेयक कानून में तब्दील हो जाता है तो 40 लाख में से बड़ी संख्या में लोग एनआरसी में शामिल होने के दावेदार बन जाएंगे.

प्रत्यर्पण के लिए दूसरे देश की सहमति जरूरी
किसी भी देश से बड़ी संख्या में लोगों के प्रत्यर्पण के लिए यह जरूरी है कि दूसरा देश यह स्वीकार करे कि वे उसके नागरिक हैं और अवैध तरीके से उनके देश में घुस गए थे. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2013 से फरवरी, 2019 तक महज 166 लोगों को बांग्लादेश प्रत्यर्पित किया जा सका था. एनआरसी का मामला सैकड़ों नहीं लाखों लोगों से जुड़ा है. इनमें बड़ी तादाद में लोग दशकों से असम में रह रहे हैं. वे खुद को भारतीय नागरिक के तौर पर पहचानते हैं.

बांग्लादेश बार-बार करता रहा है इनकार
बांग्लादेश के कई नेता सालों से बार-बार यही कहते आ रहे हैं कि उनका कोई नागरिक भारत में नहीं है. वहीं, भारत की ओर से भी इस मामले में बांग्लादेश के साथ असरदार कोशिश नहीं की गई है. कहा तो यहां तक जा रहा है कि एनआरसी का अंतिम मसौदा प्रकाशित करने से पहले भारत ने बांग्लादेश को बता दिया था कि किसी भी नागरिक के प्रत्यर्पण की बात नहीं हो रही है. बताया जाता है कि तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बांग्लादेश के अपने समकक्ष को एनआरसी प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी दी थी.

अंतिम सूची में शामिल होने से छूट गए लोग क्वासी ज्युडिशियल फॉरनर्स ट्रिब्यूनल, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगा सकते हैं.


नागरिकता साबित करने के कई मौके मिलेंगे
एनआरसी की अंतिम सूची में शामिल नहीं होने वाले लोगों के पास अपनी नागरिकता साबित करने के कई मौके होंगे. इस प्रक्रिया में कई वर्ष निकल जाएंगे. अंतिम सूची में शामिल होने से छूट गए लोग सबसे पहले क्वासी ज्युडिशियल फॉरनर्स ट्रिब्यूनल में अपील कर सकते हैं. यहां से निराशा मिलने पर वे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं. यहां भी फैसला हक में नहीं आने पर सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई जा सकती है.

डिटेंशन कैंप में रखे जा सकते हैं अवैध अप्रवासी
इस बीच अंतिम सूची से बाहर लोगों को डिटेंशन कैंपों में रखा जा सकता है. ये कैंप ज्यादातर बार सुविधाओं के अभाव के चलते ही सुर्खियां बनते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने हाल में आदेश दिया था कि ऐसे कैंपों में तीन साल गुजार चुके लोगों को सशर्त छोड़ा जा सकता है. हाल में असम के मंत्री हेमंत बिस्व शर्मा ने कहा था कि उन्हें डिटेंशन सेंटर्स में नहीं रखा जाना चाहिए. डिजिटली उनकी पहचान रिकॉर्ड की जानी चाहिए. इसके बाद उन्हें दूसरे राज्यों में भारतीय नागरिकता का दावा करने की मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए. ऐसा करने के बाद उन्हें मानवाधिकारों के मुताबिक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए.

लाखों लोगों का भविष्य अधर में लटका है
आखिर में कहा जा सकता है कि अंतिम सूची से बाहर रहने वाले लोगों का भविष्य अधर में होगा. उनके सामने लंबी अदालती लड़ाई होगी. अगर प्रत्यर्पण होता है भी तो यह बहुत दूर की बात है और यह बहुत पीड़ादयी प्रक्रिया होगी.

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First published: July 18, 2019, 8:39 PM IST
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