चुनाव अयोग ने कहा - इस साल जम्मू-कश्मीर में हो सकते हैं विधानसभा चुनाव

आयोग ने बताया, अमरनाथ यात्रा के बाद चुनाव की तारीखों की होगी घोषणा. इस साल 1 जुलाई से शुरू हो रही है अमरनाथ यात्रा. तब तक राज्य के हालात पर चुनाव आयोग की रहेगी नजर.

News18Hindi
Updated: June 5, 2019, 1:29 PM IST
चुनाव अयोग ने कहा - इस साल जम्मू-कश्मीर में हो सकते हैं विधानसभा चुनाव
महबूबा मुफ्ती सरकार गिरने के बद से जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दल नए सिरे से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं.
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Updated: June 5, 2019, 1:29 PM IST
जम्मू-कश्मीर में जून, 2018 में हुई सियासी हलचल के बीच बीजेपी ने पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया था. इसके बाद सूबे की महबूबा मुफ्ती सरकार गिर गई थी. तब से वादी के राजनीतिक दल राज्य में नए सिरे से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं. अब केंद्रीय चुनाव आयोग ने बताया है कि इस साल राज्य में विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं.

आयोग ने कहा कि 1 जुलाई से अमरनाथ यात्रा शुरू हो रही है, जो 15 अगस्त तक जारी रहेगी. 46 दिन चलने वाली अमरनाथ यात्रा मासिक शिवरात्रि पर शुरू होगी और श्रावण पूर्णिमा पर संपन्न होगी. यात्रा संपन्न होने के बाद कभी भी सूबे में विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान किया जा सकता है. आयोग के अवर सचिव पवन दीवान ने बताया, ईसी ने सर्वसम्मति से तय किया है कि राज्य में इस साल के अंत तक चुनाव कराने पर विचार किया जाए. तब तक आयोग राज्य के हालात पर नजर रखेगा.

पहले लोकसभा चुनाव 2019 के साथ ही राज्य में विधानसभा चुनाव कराने की योजना थी. हालांकि, बाद में कानून-व्यवस्था के मद्देनजर इस योजना को रद कर दिया गया. लोकसभा चुनाव के दौरान अपने अधिकार का इस्तेमाल करने वाले मतदाताओं की संख्या में जबरदस्त इजाफा दर्ज किया गया था. बावजूद इसके कश्मीर घाटी में मत-प्रतिशत काफी कम रहा. दक्षिणी जिले में महज 9 फीसदी मतदान हुआ था. वहीं, सुरक्षा कारणों के चलते अनंतनाग लोकसभा सीट पर तीन चरणों में मतदाना कराया गया.

चुनाव आयोग पर लगाया लोकतंत्र से खिलवाड़ का आरोप

जून 2018 में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन टूटने के बाद सूबे में राज्यपाल शासन लागू हो गया था. इसके बाद दिसंबर, 2018 से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया था. सूबे की ज्यादातर पार्टियां जल्द से जल्द विधानसभा चुनाव की मांग कर चुकी हैं. उन्होंने राज्य में लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव कराने की मांग भी की थी. हालांकि, चुनाव आयोग ने इसे खारिज कर दिया था. राजनीतिक दलों ने आयोग पर लोगों से लोकतांत्रिक सरकार चुनने का अधिकार छीनने का आरोप लगाया था. सियासी दलों ने इसे लोकतंत्र से खिलवाड़ करार दिया था.

सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू करने में नाकाम रहा आयोग
नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता अली मोहम्मद सागर ने कहा, 'आयोग सुप्रीम के उस आदेश को भी लागू करने में नाकाम रहा, जिसमें कहा गया था कि विधानसभा भंग होने के छह महीने के भीतर राज्य में चुनाव कराए जाएं. महबूबा सरकार गिरने के एक साल बाद भी चुनावों को लेकर तस्वीर साफ नहीं है.' पीडीपी प्रवक्ता ताहिर सईद ने दावा किया कि जानबूझकर चुनावों में देरी की जा रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य में निकाय, पंचायत और लोकसभा चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से कराए जा सकते हैं तो विधानसभा चुनाव में देरी क्यों की जा रही है.
बीजेपी भी राज्य में जल्द विधानसभा चुनाव के पक्ष में
बीजेपी भी राज्य में जल्द चुनाव कराने के पक्ष में है. जम्मू-कश्मीर बीजेपी के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने News18 से बातचीत में कहा कि केंद्रीय चुनाव आयोग स्वायत्त संस्था है. आयोग को ही चुनावों के बारे में फैसला लेना है. आयोग ही बता सकता है कि राज्य में कब विधानसभा चुनाव कराना मुफीद होगा. उन्होंने कहा, 'हम भी राज्य में चुनाव कराने और लोकप्रिय सरकार बनाना चाहते हैं.'

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