सोनिया गांधी को कहा था इटली वाली बाई, प्रज्ञा ठाकुर के बारे में जानिए सब कुछ

हाल ही में साध्वी प्रज्ञा ने महात्मा गांधी के हत्यारे गोडसे को देशभक्त कहा था, जिसके बाद विपक्ष ने उन पर जमकर निशाना साधा.

News18Hindi
Updated: May 17, 2019, 7:03 PM IST
सोनिया गांधी को कहा था इटली वाली बाई, प्रज्ञा ठाकुर के बारे में जानिए सब कुछ
साध्वी प्रज्ञा की फाइल फोटो
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Updated: May 17, 2019, 7:03 PM IST
मध्य प्रदेश के भोपाल से बीजेपी की उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर अपने विवादित बयानों को लेकर लगातार चर्चा में बनी हुई हैं. हाल में उन्होंने महात्मा गांधी के हत्यारे गोडसे को देशभक्त कहा था, जिसके बाद पूरे देश में विपक्ष ने उन पर जमकर निशाना साधा. हालांकि, बाद में उन्होंने इसके लिए माफी मांग ली थी.
आइए जानते हैं कौन हैं प्रज्ञा ठाकुर...



पिता भी जुड़े थे संघ से
साध्वी प्रज्ञा का जन्म मध्य प्रदेश के भिंड में हुआ था. उनके पिता डॉ. चंद्रपाल सिंह आयुर्वेदिक डॉक्टर थे और प्राकृतिक जड़ी बूटियों से मरीजों का इलाज करते थे. पिता के संघ से जुड़े होने के कारण उनका भी झुकाव संघ और विहिप की ओर हो गया. संघ से जुड़ने के बाद उन्होंने संन्यास ले लिया.

इसके अलावा वह भोपाल में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ी रहीं. प्रज्ञा ठाकुर ने इतिहास में एमए किया है. वह विश्व हिन्दू परिषद की महिला शाखा दुर्गा वाहिनी से भी जुड़ी थीं. कॉलेज के दौरान वह मुखर वक्ता के तौर पर जानी जाती थीं.

दूसरा नाम भी है प्रज्ञा ठाकुर का
2002 में उन्होंने 'जय वंदे मातरम जन कल्याण समिति' बनाई. बाद में वह स्वामी अवधेशानंद गिरि के संपर्क में आईं. इसके बाद उन्होंने एक 'राष्ट्रीय जागरण मंच' बनाया. साल 2019 में प्रयागराज कुंभ केे अवसर पर उन्हें 'भारत भक्ति अखाड़े' का आचार्य महामंडलेश्वर घोषित किया गया था. अब वह 'महामंडलेश्वर स्वामी पूर्णचेतनानन्द गिरि' के नाम से जानी जाती हैं. राजनीतिक बयानों के अलावा गोमूत्र के सेवन से कैंसर ठीक करने वाले बयान को लेकर भी उनकी काफी आलोचना की गई थी. 17 अप्रैल 2019 को उन्होंने बीजेपी ज्वाइन कर ली. पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव 2019 में भोपाल से टिकट दिया.
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उम्र को लेकर हुआ था विवाद
कुछ दिन पहले साध्वी प्रज्ञा ने दावा किया था कि उन्होंने बाबरी मस्जिद पर चढ़कर विवादित ढांचा गिराया था. इस मामले को लेकर विवाद शुरू हो गया. पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और कुछ पत्रकारों ने उनकी उम्र को लेकर सवाल उठाए थे. सोशल मीडिया पर भी कुछ लोगों ने लिखा था कि उनका जन्म 2 अप्रैल 1988 में हुआ था. तो क्या उन्होंने 4 साल की उम्र में विवादित ढांचा गिराया था.

हालांकि, प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने लोकसभा चुनाव के लिए दाखिल किए गए नामांकन में अपनी उम्र 49 साल बताई है. यानी प्रज्ञा ठाकुर का जन्म 1970 में हुआ. एफिडेविट में प्रज्ञा ठाकुर ने बताया है कि उन्होंने 1994 में बीए फाइनल ईयर का कोर्स किया. यानी 1992 के समय वह ग्रेजुएशन फर्स्ट ईयर में थीं. वहीं, एक अंग्रेज़ी वेबपोर्टल की रिपोर्ट के मुताबिक़ साध्वी की बड़ी बहन उपमा सिंह का कहना है कि भाजपा प्रत्याशी का जन्म 2 फरवरी, 1970 को हुआ था.

मालेगांव धमाका
29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में एक बाइक में धमाका हुआ था. एटीएस ने इस ब्लास्ट केस की जांच शुरू की. सबसे पहले जांच की गई कि आखिर बाइक किसकी है? जांच में नाम सामने आया साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का. हालांकि, साध्वी ने दावा किया कि इस बाइक को उन्होंने 2004 में ही बेच दिया था.

24 अक्टूबर 2008 को साध्वी प्रज्ञा की गिरफ्तारी हुई. 4 नवंबर 2008 को एटीएस ने लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित को गिरफ्तार किया. आरोप था कि वह उस अभिनव भारत संगठन से जुड़े थे, जिसने हथियार और गोला बारूद खरीदे, जिसका इस्तेमाल मालेगांव ब्लास्ट में किया गया था.

जुलाई 2009 में स्पेशल कोर्ट ने साध्वी पर मकोका लगाया. 2010 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने मकोका जारी रखा, लेकिन 15 अप्रैल 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को पलटकर मकोका हटा दिया. 25 अप्रैल 2017 को बॉम्बे हाईकोर्ट से साध्वी प्रज्ञा को जमानत मिल गई. वह 9 साल तक जेल में रहीं. वह फिलहाल जमानत पर हैं. बाहर आने के बाद साध्वी ने कहा था कि उन्हें लगातार यातनाएं दी गई थीं. उन्होंने 26/11 में शहीद हुए हेमंत करकरे पर भी आरोप लगाए थे कि उन्होंने काफी टॉर्चर किया, जिसकी वजह से उन्होंने श्राप दे दिया था.

सोनिया गांधी को कहा था इटली वाली बाई
दिसंबर 2007 में साध्वी प्रज्ञा पर भाजपा विधायक सुनील जोशी की हत्या करने का भी आरोप लगा था. इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन साल 2017 में उन्हें रिहा कर दिया गया. साल 2018 में एक भाषण के दौरान, उन्होंने सोनिया गांधी को इटली वाली बाई (इटली की नौकरानी) के रूप में संदर्भित किया, जिससे वह विवादों में रहीं.

19 अप्रैल 2019 को उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विवादित बयान देते हुए कहा, “जब उन्हें मालेगांव बम विस्फोट मामले में गिरफ्तार किया गया था, तब उन्होंने 26/11 हमले के दोषी हेमंत करकरे को छोड़ने के लिए कहा था. उस समय उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं था. उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने हेमंत करकरे को शाप दिया कि “बहुत ही जल्द तू मृत्यु को प्राप्त होगा.'

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