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महाराष्‍ट्र पर महा-संग्राम: 'अजित पवार ही NCP' से लेकर घुड़सवार और घोड़े तक- पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की पूरी बहस

News18Hindi
Updated: November 25, 2019, 1:38 PM IST
महाराष्‍ट्र पर महा-संग्राम: 'अजित पवार ही NCP' से लेकर घुड़सवार और घोड़े तक- पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की पूरी बहस
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्‍ट्र के सियासी उठापटक पर दो घंटे सुनवाई के बाद कल सुबह 10.30 बजे फैसला सुनने का वक्‍त तय कर दिया है.

महाराष्‍ट्र (Maharashtra) में देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) को सीएम और एनसीपी के अजित पवार (Ajit Pawar) को डिप्‍टी सीएम पद की शपथ दिलाने के राज्‍यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी (Bhagat Singh Koshyari) के फैसले के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपना फैसला मंगलवार सुबह 10.30 बजे तक के लिए सुरक्षित रख लिया है.

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  • Last Updated: November 25, 2019, 1:38 PM IST
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नई दिल्‍ली. महाराष्‍ट्र (Maharashtra) की सियासी उठपटक शनिवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की चौखट तक पहुंच गई. सुप्रीम कोर्ट ने अवकाश के बाद भी रविवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आज सुबह 10.30 बजे फिर सुनवाई का वक्‍त दिया. इस समय सुप्रीम कोर्ट में महाराष्‍ट्र के राज्‍यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी (Bhagat Singh Koshyari) के बीजेपी (BJP) के देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) को सीएम और एनसीपी (NCP) के बागी नेता अजित पवार (Ajit Pawar) को डिप्‍टी सीएम पद की शपथ दिलाने के खिलाफ दायर शिवसेना (Shiv Sena), एनसीपी व कांग्रेस (Congress) की याचिका पर सुनवाई कर रहा है. अजित पवार ने अपने वकील के मार्फत सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि मैं ही एनसीपी हूं और मैं ही नेता हूं. विधायक मेरे साथ हैं. जैसे भी हो मामले का हल निकले. सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कल यानी मंगलवार को सुबह 10.30 बजे फैसला सुनाया जाएगा.

एसजी तुषार मेहता ने कोर्ट को सौंपा राज्‍यपाल का पत्र
सुप्रीम कोर्ट के कोर्टरूम नंबर 2 में चल रही सुनवाई को सुनने के लिए बीजेपी, कांग्रेस और एनसीपी के कई सांसद व विधायक मौजूद रहे. मामले में सीएम देवेंद्र फडणवीस की ओर से मुकुल रोहतगी (Mukul Rohatgi), अजित पवार की ओर से वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता मनिंदर सिंह ने पक्ष रखा. वहीं, कांग्रेस की ओर से वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता कपिल सिब्‍बल (Kapil Sibal) ने पैरवी की. सुनवाई शुरू होते ही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (SG Tushar Mehta) ने राज्‍यपाल का पत्र सुप्रीम कोर्ट को सौंपा. उन्‍होंने पूछा कि क्या कोर्ट राज्‍यपाल के फैसले को पलट सकता है? उन्होंने राज्यपाल के संवैधानिक अधिकारों (Constitutional Rights) का हवाला भी दिया.

एसजी ने बीजेपी को मिले समर्थन पत्र पढ़कर सुनाए

एसजी ने कहा कि बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन (Alliance) की जानकारी राज्यपाल को थी. राज्यपाल के पास चुनाव के नतीजे भी थे. बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी थी और शिवसेना के पास 56 सीटें थी. राज्यपाल ने काफी दिन इंतजार किया. इसके बाद बीजेपी को सरकार बनाने के लिए बुलाया. बीजेपी ने सरकार बनाने से मना किया. फिर शिवसेना ने भी मना किया. एनसीपी के साथ भी ऐसा ही हुआ. विपक्ष की ओर से अभी तक सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया गया. हमारे पास राज्यपाल के आदेश की कॉपी है. तुषार मेहता ने राज्‍यपाल के सचिव की चिट्ठी अदालत को सौंपी, जिसमें विधायकों के हस्ताक्षर हैं. बीजेपी के 105 विधायकों के अलावा अजित पवार ने 54 विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा था, जिसमें उन्‍होंने खुद को विधायक दल का नेता बताया. तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में समर्थन पत्र पढ़कर सुनाए.

'राज्‍यपाल का काम समर्थन की जांच कराना नहीं है'
सुप्रीम कोर्ट में एसजी ने कहा कि राज्‍यपाल (Governor) को अजित पवार की चिट्ठी मिली. इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति शासन (President's Rule) हटाने का अनुरोध दिया. 23 नवंबर को राज्यपाल ने देवेंद्र फडणवीस को चिट्ठी लिखी. फडणवीस ने राज्यपाल को 170 विधायकों का समर्थन दिखाया था. राज्यपाल का काम जांच करवाना नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि सबसे पहले चिट्ठी किसकी आई थी? इस पर एसजी ने बताया कि सबसे पहले चिट्ठी फडणवीस ने लिखी थी. बीजेपी के पास 105 अपने, एनसीपी 54 और 11 निर्दलीयों का समर्थन है. राज्यपाल के पास सभी विधायकों का समर्थन पत्र पहुंचा था.
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अजित पवार ने कहा मैं ही एनसीपी, तो गूंजे ठहाके
इस बीच मुकुल रोहतगी ने कहा, 'हमें इससे कोई मतलब नहीं कि पवार परिवार में क्या हो रहा है. एक पवार मेरे साथ है और एक कोर्ट में है. वह हस्ताक्षर गलत नहीं बता रहे हैं, बल्कि हॉर्स ट्रेडिंग (Horse Trading) का आरोप लगा रहे हैं. इसके बाद जस्टिस खन्ना ने पूछा कि अजित पवार की तरफ से कौन है? अजित पवार की तरफ से पेश मनिंदर सिंह ने सुनवाई के दौरान कहा कि मैं ही एनसीपी हूं. जी हां, मैं ही एनसीपी हूं और मैं ही नेता हूं. इस पर कोर्ट में ठहाके गूंजने (Lobbing) लगे. उन्‍होंने कहना जारी रखा कि विधायक मेरे साथ हैं. जैसे भी हो मामले का हल निकले. विधायक करें या सुप्रीम कोर्ट तय करे. राज्यपाल को दी गई चिट्ठी कानूनी रूप से सही है. फिर विवाद क्यों? अगर बाद में कोई स्थिति बनी है तो इसे राज्यपाल देखेंगे. उनके ऊपर छोड़ा जाए. कोर्ट इसमें दखल क्यों दे.

'हॉर्स ट्रेडिंग नहीं, पूरा अस्‍तबल ही दूसरी ओर गया'
मुकुल रोहतगी ने कहा कि फ्लोर टेस्ट (Floor Test) कभी भी हो सकता है. ये फैसला स्पीकर के ऊपर है. आज वो कह रहे हैं कि उनके पास 54 विधायक हैं. कल मैं भी ये कह सकता हूं. फ्लोर टेस्ट कराना स्पीकर की जिम्मेदारी है. इस पर तुषार मेहता ने कहा कि यहां हॉर्स ट्रेडिंग का सवाल नहीं है. यहां तो पूरा अस्‍तबल ही दूसरी ओर चला गया है. अगर राज्यपाल कहते हैं कि आज फ्लोर टेस्ट नहीं होना चाहिए तो उन्हें अपना काम करने दिया जाए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हालात ऐसे नहीं हैं. ऐसे कई केस हैं, जिनमें 24 घंटे के अंदर फ्लोर टेस्ट हुआ है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर कहा कि ये राज्यपाल का फैसला है. क्या अब विधानसभा का एजेंडा भी अदालत तय करेगी? इसके दूरगामी परिणाम होंगे. राज्यपाल को ये भी देखना होगा कि कौन स्थायी सरकार देगा? पूर्व के आदेशों के आधार पर अंतरिम आदेश न दें. हमें विस्तृत जवाब दायर करने दें. जो चिट्ठी राज्यपाल को दी गई वो कानूनी रूप से सही है.

सिब्‍बल ने कहा, सिर्फ घुड़सवार गया, घोड़े वहीं के वहीं
तुषार मेहता के पूरा अस्तबल गायब होने के दावे पर वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता कपिल सिब्बल ने कहा कि सिर्फ घुड़सवार ही भागा है. घोड़े वहीं के वहीं हैं. इस पर मुकुल रोहतगी ने कहा कि विधायकों को होटल में बंद किया गया था, फैसला जल्दी होना चाहिए. फिर कपिल सिब्बल ने कहा कि 22 की रात को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना ने सरकार बनाने की बात कही. सभी ने कहा कि उद्धव ठाकरे सीएम होंगे, लेकिन सुबह 5 बजे ही फडणवीस सीएम बन गए. ऐसी कौन-सी इमरजेंसी थी कि सुबह सवा 5 बजे राष्ट्रपति शासन हटाया गया और शपथ दिला दी गई. इस इमरजेंसी का खुलासा होना चाहिए.

सिंघवी और रोहतगी के बीच हो गई तीखी बहस
एनसीपी (शरद पवार खेमा) की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी कहा कि अगर दोनों पक्ष फ्लोर टेस्ट को तैयार हैं तो देरी क्यों हो रही है. उन्होंने कहा कि अगर कुछ छिपाया जा रहा है तो फर्जीवाड़ा हुआ है. अजित पवार की चिट्ठी फर्जी है. इस पर मुकुल रोहतगी भड़क गए. उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई. सिंघवी ने 48 एनसीपी, 56 शिवसेना और 44 कांग्रेस विधायकों का समर्थन पत्र सौंपने की बात कही. इस पर रोहतगी ने आपत्ति जताई. अदालत ने कहा कि अगर आप ये दाखिल करेंगे तो मुझे उनसे जवाब लेना होगा. इसके बाद सिंघवी ने चिट्ठी वापस ले ली. इस दौरान तुषार मेहता ने कहा कि महाविकास अघाड़ी (MVA) ने सूची में गड़बड़ी की है. इस पर सिंघवी ने कहा कि फ्लोर टेस्ट से पता चलेगा कि आप औंधे मुंह गिरेंगे.

कोर्ट ने कहा, हमें पता है कि क्‍या आदेश देना है
कोर्ट ने सिंघवी से पूछा कि आप क्या मांग रख रहे हैं. इस पर उन्‍होंने कहा कि हम फ्लोर टेस्ट की मांग कर रहे हैं. इस पर जस्टिस एनवी रमन्‍ना ने कहा, हमें पता है कि क्या आदेश देना है. इस पर मुकुल रोहतगी ने कहा कि विधानसभा की कुछ परंपराएं हैं, जिनका पालन होना चाहिए. पहले प्रोटेम स्पीकर, सदस्यों का शपथग्रहण, स्पीकर का चुनाव, राज्यपाल का अभिभाषण और फिर फ्लोर टेस्ट होना चाहिए. रोहतगी ने कहा कि राज्यपाल ने फ्लोर टेस्ट के लिए 14 दिन का वक्त दिया है. तुरंत फ्लोर टेस्ट का आदेश ना दिया जाए. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में कल सुबह 10.30 बजे फैसला सुनाया जाएगा. आज करीब 2 घंटे इस मामले पर कोर्ट में तीखी बहस हुई, जिसके बाद कोर्ट ने कल फैसला सुनाने का आदेश दिया.

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First published: November 25, 2019, 12:35 PM IST
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